Laparoscopic Videos from World Laparoscopy Hospital

Laparoscopic Surgery for Ovarian Cyst Diseases

This video demonstrate laparoscopic surgery for various ovarian diseases. Ovarian cyst removal is surgery to remove a cyst or cysts from 1 or both of ovaries. A laparoscopic surgery uses small incisions and specialized tools. It may offer faster recovery times than open surgery , which uses a larger abdominal incision. Most cysts can be removed using laparoscopy. This is a type of keyhole surgery where small cuts are made in your tummy and gas is blown into the pelvis to allow the surgeon to access your ovaries. A laparoscope is passed into abdomen so the surgeon can see your internal organs. The surgeon then removes the cyst through the small cuts in skin. After the cyst has been removed, the cuts will be closed using dissolvable stitches. A laparoscopy is preferred because it causes less pain and has a quicker recovery time. Most women are able to go home on the same day or the following day. For detail go to https://www.laparoscopyhospital.com/

अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | क्‍या है अपेंडिक्‍स? अपेंडिक्स छोटी और बड़ी आंतों के बीच की कड़ी है, जो शहतूत के आकार की होती है। यह आंतों से बाहर की ओर निकली रहती है। पहले इसकी उपयोगियता या अनुपयोगियता के बारे में जानकारी नहीं थी। अक्सर चिकित्सक पेट दर्द होने पर अपेंडिक्स को हटा देने में ही भलाई समझते थे, इससे मरीजो को कोई समस्या नहीं आती है। फिर भी पूरी तरह परीक्षण किए बगैर मामूली से या अन्य किसी कारण से होने वाले पेटदर्द के निदान के लिए इस अवशेषी अंग को निकाल फेंकना गलत है। अपेंडिक्‍स के कारण अपेंडिक्‍स के कारणों में लम्बे समय तक कब्ज का रहना, पेट में पलने वाला परजीवी व आंतों के रोग इत्यादि से अपेंडिक्स की नाली में रुकावट आ जाती है। ऐसे भोजन का सेवन करना जिसमें फाइबर बहुत ही कम या बिल्कुल न हो, भी इस समस्या को निमंत्रण दे सकता है। जब यह अपेंडिक्स में लगातार रुकावट की स्थिति बनी रहे तो सूजन और संक्रमण के बाद यह फटने की स्थिति में हो जाती है। फटने पर यह पेट और रक्‍त में संक्रमण फैला सकता है। फिर तो यह बहुत ही भयावह हो सकता है।

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | महिलाओं में बांझपन के लक्षण इस वीडियो मे बांझपन का लेप्रोस्कोपी से इलाज एवं लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | महिलाओं में बांझपन के लक्षण मासिकधर्म प्रारंभ होने के साथ ही दिखने लगते हैं. इन में से कईर् लक्षण ऐसे होते हैं, जिन्हें तुरंत पहचान कर उन का उपचार करा लिया जाए तो बहुत संभव है कि भविष्य में होने वाली बांझपन की आशंका से बचा जाए. अनियमित मासिकधर्म महिलाओं में मासिकधर्म की अनियमितता बांझपन का सब से प्रमुख कारण है. कईर् महिलाओं में संतुलित व पोषक भोजन के सेवन और नियमित ऐक्सरसाइज के द्वारा यह समस्या दूर हो जाती है, लेकिन कई महिलाओं को उपचार की आवश्यकता पड़ती है. मासिकचक्र से संबंधित निम्न अनियमितताएं हो सकती हैं: – 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना. – पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना. – 2 पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं. – 3 मासिकचक्र में पीरियड्स न आना. – पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना. – मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना. मासिकधर्म न आना कई महिलाओं में कभीकभी मासिकधर्म आता ही नहीं. इस का कारण अंडाशय या गर्भाशय की अनुपस्थिति होती है. यह समस्या जन्मजात हाती है, लेकिन इस के बारे में पता यौवनावस्था प्रारंभ होने पर लगता है. ऐसी महिलाएं कभी मां नहीं बन पाती हैं. हारमोन असंतुलन कभीकभी महिलाओं में बांझपन हारमोन समस्याओं से भी संबंधित होता है. इस मामले में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं: – त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है. – सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना. – होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास. – बालों का झड़ना या पतला होना. – वजन बढ़ना. – निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है. – सैक्स के दौरान दर्द होना. – असामान्य मासिकचक्र.

Laparoscopic Myomectomy Step by Step Video

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html This video demonstrate all the steps of laparoscopic myomectomy. Surgeons who have the experience and skill and know the size, number, and position of fibroids are able to select the appropriate candidates for laparoscopic myomectomy. Authors of a study of 2,050 laparoscopic myomectomies found that fibroids larger than 5 cm, removal of more than 3 fibroids, and broad ligament fibroids were more likely to be associated with major complications, including visceral injury, conversion to laparotomy, and bleeding requiring blood transfusion. For all women considering laparoscopic or robot-assisted myomectomy, Surgeon should order pelvic MRI with and without contrast. Having the radiologist limit the number of MRI sequences may reduce the cost and make it comparable to that of other imaging modalities. Fibroids may affect quality of life—they may cause heavy menstrual bleeding, pelvic pain or pressure, or urinary frequency or incontinence. For many women who want large or numerous fibroids removed but the uterus preserved, abdominal myomectomy is required. Smaller and less numerous fibroids usually can be managed laparoscopically or with robotic assistance.

Laparoscopic Nephrectomy

This video demonstrate details of Laparoscopic Nephrectomy. Laparoscopic Nephrectomy provides patients with a safe and effective way to remove a diseased or cancerous kidney. Laparoscopic nephrectomy is a minimally invasive technique, which provides patients with less discomfort and equivalent results when compared to the larger incision required with traditional open surgery. When compared to conventional open surgery, laparoscopic nephrectomy has resulted in significantly less post-operative pain, a shorter hospital stay, earlier return to work and daily activities, a more favorable cosmetic result and outcomes identical to that of open surgery.

MGB - An Effective Bariatric Surgery

The Mini-Gastric Bypass MGB is an excellent choice for bariatric surgery. All over world bariatric surgeons generally provides the MGB with strongly positive reviews. This international group of bariatric experts from 6 continents and 23 countries judged the MGB as a short simple effective durable bariatric procedure. In most questions the MGB was judged significantly better than similar assessments of the Band, Sleeve and the RNY. This video demonstration suggests that there is a deep reservoir of knowledge and experience that has here to fore been untapped that may assist surgeons and their patients in making good decisions about weight loss surgery. This surgery was developed by considering its less operating time and simplicity. Mini gastric bypass reduces stomach size and reroutes intestines because of which patient feels full even with small meals, absorbs less calories, lose ¾ of weight in 2 years, improves health. As compared to gastric bypass, mini gastric bypass involves low complications and minimum size effects. Mini Gastric Bypas Surgery in Qatar,Oman Because of its simplicity mini gastric bypass can minimize the chances of post-surgical complications. Patient can live a healthy lifestyle after surgery with sustained weight loss. Mini-gastric bypass is a good option to reduce unhealthy weight and is enjoying high success rate. It is true that MGB can help in weight loss, but it totally depends on patients’ ability to maintain healthy lifestyle followed by regular exercise and diet.

Laparoscopic Meltzer's Knot

This video demonstrate how to ligate Laparoscopic Meltzer's Knot. Laparoscopic Meltzer's Knot is also called as modified roeder's knot. However, after accumulating over 20 years of experience in this field, we have consistently observed this knot to be very user-friendly; on the contrary, it is ergonomically much easy particularly in areas with limited accessibility for laparoscopic instruments. To counter the limitations of laparoscopic surgery, we have devised a simple technique that ensures gripping the suture in a peculiar way to make endoscopic Meltzer's knotting rather effortless, faster and easy to learn.

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) |

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) | हिस्टेरेक्टॉमी एक शल्यक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी महिला के गर्भाशय को निकाला जाता है। गर्भाशय महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का एक अंग है तथा यह मनुष्य की बंद मुट्ठी के आकार का होता है। आपका गर्भाशय निकाले जाने के बाद आप संतान पैदा नहीं कर सकती, तथा इसके बाद आपको मासिक धर्म भी नहीं होगा। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) नहीं निकाले गए हैं, तो आप मादा हार्मोन पैदा करती रहेंगी। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) निकाले गए हैं, तो मासिक धर्म रुक जाएगा। हिस्टेरेक्टॉमी शल्य क्रिया की कई किस्में हैं। अपने चिकित्सक से पूछें कि आप किस प्रकार की शल्य क्रिया करा रहीं हैं तथा क्या आपकी गर्भग्रीवा (सर्विक्स), डिंबवाही नलियां तथा अंडाशय भी हटाए जा रहे हैं। • योनीय (वेजाइनल) हिस्टेरेक्टॉमी - गर्भाशय को योनि मार्ग से हटाया जाता है, तथा पेट में कोई चीरफाड़ नहीं होती। • उदरीय (एब्डॉमिनल) हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में चीरा लगाकर, गर्भाशय को निकाला जाता है। • लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में कई छोटे सुराख किए जाते हैं और डॉक्टर इन छोटे सुराखों के माध्यम से लेप्रोस्कोप का प्रयोग करते हुए काम करता है। यह यंत्र डॉक्टर को शल्य क्रिया के दौरान छोटे स्थानों को देख पाना आसान बनाता है। अन्य छोटे यंत्र गर्भाशय को अलग करने और निकालने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी - यह लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी से बहुत मिलती जुलती है। यंत्र अधिक लचीले होते हैं और डॉक्टर द्वारा शल्य क्रिया के दौरान यंत्र की सहायता करने के लिए विशेष कैमरे का उपयोग किया जाता है।

Laparoscopic Cholecystectomy for 5 Year Old Child

https://www.laparoscopyhospital.com/ This video demonstrate laparoscopic cholecystectomy in a five year old girl. Gallstone disease has been considered an uncommon entity in children and infants, but its incidence is reportedly increasing which may be attributed to widespread use of diagnostic imaging (ultrasonography). An apparently healthy 5 year old female child presented to our Outpatient department with chief complaint of recurrent abdominal pain. The episodes of pain were acute in onset and associated with vomiting. As per the complete examination and findings, a diagnosis of chronic calculous cholecystitis was made. A four port laparoscopic cholecystectomy was done. The incidence of gallstones in children in India has not been sufficiently studied. The incidence of gallstone disease in India was found to be 0.3% with the incidence in age group 0–10 being less than 0.1%. In contrast to adult gallstone disease, it has been found that there is no female preponderance in gallstone diseases of infancy. Also, the majority of children having increased haemoglobin turnover develop pigment stones only after 5 years of age. The probability of gallstone disease in infants and young children should not be ignored. Gall stones should always be considered as a differential diagnosis when young patients present with complaints of abdominal pain.

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Myoma

This video demonstrate laparoscopic myomectomy for large intramural myoma. Laparoscopic myomectomy using pneumoperitoneum for large intramural myomas is considered a difficult and time-consuming procedure, requiring great skill to move a large uterus; to locate, grasp, enucleate, and remove a bulky myoma from the abdominal cavity; to achieve adequate hemostasis; and to repair the muscle layer. Laparoscopic myomectomy allows your surgeon to remove your fibroids through several small incisions. This may be done robotically. It's less invasive and recovery is faster than with abdominal myomectomy. Laparoscopic myomectomy (LM) currently brings more attention because of increased demands on uterine conservation and less invasive management of myomas. The advantages of Laparoscopic Myomectomy are shorter hospitalization, faster recovery, fewer adhesions, and less blood loss. In spite of the increasing improvements in laparoscopic instruments and techniques, advanced laparoscopic technical skills are required to perform Laparoscopic Myomectomy with success. Technical problems inherent to the removal of large uterine myomas include hemostasis, uterine closure, and removal of the uterine tissue.

Laparoscopic Dundee Jamming Knot

Acquiring the skills of laparoscopic suturing and knotting techniques can be considered a prerequisite to learn advanced laparoscopic procedures for laparoscopic surgeon and gynecologist. Despite the concept that developing such suturing skills should be reserved for the younger generation of laparoscopic surgeons due to the high level of difficulty in manual laparoscopic skills involved. Dundee Jamming knot is very good starter knot which is prepared outside the abdomen and then dropped inside the abdomen through one of the port to tie intracorporeal continuous suturing.

Laparoscopic Weston Knot

Nowadays, the acquisition of safe, effective yet rapid and minimally invasive suturing skills has become not only desirable but also an essential part of any laparoscopic intervention. Laparoscopic Weston Knot was initially started by arthroscopic surgeons but now widely used in laparoscopic general surgery or gynecology. Although there remains a substantial body of literature focusing mainly on varied minimal access knotting techniques, there seem to be scarcely any contributions devoted specifically to the crux of its successful execution—the precise intracorporeal needle loading methodology that eventually translates into easy and secure tissue approximation.

Laparoscopic Roeder's Knot

Although it demands an advanced set of skills that remain substantially hard to don, many of the salient steps of “open” surgery, including suturing, are credibly “replicated” in its laparoscopic counterpart with the intention of achieving similar optimal results. This video demonstrate how to tie Laparoscopic Roeder's Knot. Laparoscopic Roeder's Knot is one of the oldest knot used in laparoscopic surgery. It is used most commonly during laparoscopic appendectomy surgery. Recent literature, though abundant with numerous reports pertaining to a variety of endoscopic knotting techniques and technologies, appears to lack scientific data but Roeder's knot is a time tasted extra corporeal slip knot which is secure for 6-8 mm diameter tubular structure.

Learn Steps of Total Laparoscopic Hysterectomy in 15 Minutes with Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html Vaginal and laparoscopic hysterectomies have been clearly associated with decreased blood loss, shorter hospital stay, speedier return to normal activities, and fewer abdominal wall infections when compared with abdominal hysterectomies. In this video Dr R K Mishra has outlined the steps to a successful Total laparoscopic hysterectomy. Due to a wide variety in anatomy and in the course of the uterine vessels, we find it helpful to initially skeletonize them with the Harmonic scalpel and uterine artery with ligasure. Total laparoscopic hysterectomy is a safe and effective procedure for women needing a hysterectomy. We enjoy a high operative volume and perform approximately 200 laparoscopic hysterectomy cases annually. The steps described herein are not meant to be an absolute truth, but rather a true and tested method that has served us well to safely accomplish this procedure.

Laparoscopic Management of Retrocecal Subserous Ruptured Appendix

This video demonstrate Retrocecal Subserous ruptured appendix surgery performed by Laparoscopy. Although there are several factors that can contribute to this rare pathology, the main cause of neglected medical management of appendicitis is the persistence of a large appendicular lump. CT and US are very useful diagnosis tools. Treatment consists to a careful appendectomy of the subserous part of appendix which can be carried out by laparoscopic approach. In this rare pathology a prior history of appendectomy can delay the diagnosis and increase its associated morbidity and even mortality. https://www.laparoscopyhospital.com/international-patients.html

Laparoscopic Tayside Knot

Tayside knot is a good laparoscopic knot which is used by laparoscopic surgeons to ligate tubular structures using multifilament suture material. practice of this not is necessary. In this video the Tayside knots correct configuration and method of tying this knot has been demonstrated. After experience of 20 years of teaching laparoscopic surgery we conclude that the acquisition of laparoscopic incorporeal suturing and knot tying technique is dependent on practice rather than whether the surgeon is in training or not.

Laparoscopic Cervical Cerclage for cervical incompetence or insufficiency

When a woman’s cervix is weak (sometimes called an incompetent cervix) she is more likely to have a baby born prematurely because the cervix shortens or opens too early. In order to prevent premature labor, a woman’s doctor may recommend a cervical cerclage. A cerclage is used to prevent these early changes in a woman’s cervix, thus preventing premature labor. A closed cervix helps a developing baby stay inside the uterus until the mother reaches 37-38 weeks of pregnancy. Treatment for cervical incompetence is a surgical procedure called cervical cerclage, in which the cervix is sewn closed during pregnancy. The cervix is the lowest part of the uterus and extends into the vagina. For more information https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic orchiectomy combined with hernia repair

This video demonstrate Laparoscopic treatment for inguinal hernia combined with cryptorchidism management by Trans Abdominal Preperitoneal repair of hernia in a patient with undescended testes with hernia. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view. Approximately 7% of child patients with inguinal hernias also present with cryptorchidism. On the other hand, combined adult cases are uncommon. Here we report two adult cases of inguinal hernia combined with intra-canalicular cryptorchidism who underwent TAPP repair with orchiodectomy under the same operative view. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view could be safely performed in adults with an inguinal hernia combined with extra-abdominal cryptorchidism. This procedure could be an option for the treatment of such adult patients. Cryptorchidism is a condition in which one or both testes fail to descend into the scrotum before birth. The frequency of undescended testes has been reported as 4.1–6.9% during the neonatal period, 1.0–1.6% by 3 months of age, 1.0–1.7% by 1 year of age, and less than 1.0% after 1 year of age. Orchiectomy is also recommended for adult cases because adult patients with cryptorchidism already lack spermatogenic function and have a risk of neoplasms. https://www.laparoscopyhospital.com/laparoscopic-urology.html

लेप्रोस्कोपी सर्जरी के बारे में सब कुछ जाने |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | लैप्रोस्कोपी एक सर्जरी प्रक्रिया है जो आम तौर पर पेट या श्रोणि के अंदर अंगों की जांच करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह छोटी चीजों (0.5-1.5 सेमी), छोटी ट्यूबों, सर्जरी उपकरणों और छोटे कैमरों की मदद से किया जाता है। यह एक जटिल सर्जरी है और बहुत कम दिन तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता पड़ती है। लैप्रोस्कोपी जीनाकोलॉजिक सर्जरी, हृदय सर्जरी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, किडनी की सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, एक या दोनों एड्रेनल ग्रंथियों को हटाने और गैल्स्टोन को हटाने के लिए किया जाता है। डॉक्टर इस प्रक्रिया के माध्यम से बायोप्सी नमूने भी ले सकते हैं। इसे पारंपरिक (खुली) सर्जरी पर तेजी से पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें बड़ी चीरे और अस्पताल में रहने का समय शामिल है।

Extra-peritoneal Hernia Surgery

This video demonstrate Totally Extra-peritoneal Hernia Surgery (TEP). A hernia is repaired generally using a synthetic mesh either with open surgery or increasingly using less invasive laparoscopic procedures. The most common laparoscopic techniques for inguinal hernia repair are transabdominal preperitoneal (TAPP) repair and totally extraperitoneal (TEP) repair.

Extra Corporeal Mishra's Knot

Extra Corporeal Mishra's Knot is ideal knot for thick pedicles. We prefer to use a monofilament poly trimethylene carbonate absorbable suture for Mishra's Knot. It is very good knot for uterine vascular bundle, splenic artery, renal artery or In-mass Ligation in cholecystectomy. It combines excellent tensile strength with good handling properties. It has a good first-throw holding capacity and a smooth knot tie-down, which facilitates tissue approximation and reduces intraoperative knot repositioning, despite its relatively high memory. If a Mishra's knot has to be placed extracorporeally, we use a monofilament polypropylene or polygalactane suture as in conventional surgery. We prefer to use coated, braided polyester nonabsorbable sutures in sutured rectopexy also in Mishra's Knot.

Laparoscopic Mishra's Knot

This video demonstrate how to tie extracorporeal Mishra's knot. Nowadays, laparoscopy has become an indispensable component of surgical training across the globe. Many complicated procedures are quite regularly performed by minimally invasive approaches. As such, acquiring proficiency in endoscopic suturing has virtually turned an obligatory prerequisite into safe execution of not only advanced but also basic laparoscopic. However, intracorporeal suturing is remarkably difficult to learn and at times quite frustrating and time-consuming. To attain that required dexterity, a needle-to driver shaft angle is generally recommended].However, as per the persistent observations made and experience gained by us over the last two decades, such a right angled grip is arguably supportive only in the most favorable circumstances wherein the tissue to be sutured lies on the “floor” of the monitor, is co-axially aligned with the needle holder, and is easily accessible; thus can it finally tied the knot. Etracorporeal knot does not has these problems. Extracorporeal surgeons knot is used widely to ligated big vessels like splenic artery, renal artery and vein. Uterine artery and partial cholecystectomy. Configuration of this knot is 1:1:1:1:1:1:1.

Laparoscopic Mini Gastric Bypass Step by Step Demonstration by Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ Laparoscopic Mini Gastric Bypass (MGB) is one of the most commonly performed bariatric surgery and slowly getting popular all over world as obesity surgery. This video demonstrate step by step technique of performing mini gastric bypass surgery by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital for a female suffering from Morbid Obesity. Mini Gastric Bypass has Restrictive, Malabsorptive and Hormonal component. Restrictive: A small stomach pouch is created restricting the amount of food you can eat. Malabsorptive: A portion of the small intestine is bypassed. Since the small intestine is responsible for absorbing the calories from the food you eat, bypassing a portion of the small intestine results in fewer calories being absorbed, thus creating additional weight loss. Hormonal: The hormone ghrelin has been nicknamed the “Hunger Hormone” by researchers because of its significant effect on appetite. Gastric Bypass results in a fall in ghrelin levels resulting in a reduced appetite.

Tips and Tricks for Hysterectomy

This video demonstrate Tips and Tricks of performing Laparoscopic Hysterectomy. Hysterectomy stills represents the most common gynecological surgery. However, despite the development of laparoscopy, only 12% of hysterectomies are performed by laparoscopy. In this lecture, some tips and tricks for the different key steps of hysterectomy are explained to simplify this surgery, make it faster and also reproducible. https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM

Extra Corporeal Tayside Knot

The surgeon's preference usually determines which suture knot he want to use in conventional surgery. The choice may be somewhat restricted in laparoscopic surgery because access to the target tissue and techniques for suturing and tying the knot may be limited. For extracorporeal knots (slip or square knots), a suture material that slides easily (such as silk, catgut, or a monofilament suture ) is preferable. In suture material that slides easily, however, the first hitch may loosen before the second hitch can be secured. Thus, in some cases a material that does not slide as easily but that provides a good knot strength will be preferable. Although sutures made of polyglycolic or polyglactic acid may be used as in conventional surgery, it may be difficult to slide the knot in place smoothly using these materials. Tayside knot is a good extracorporeal knot for a suture material like silk.

Extra Corporeal Meltzer's Knot

Extra Corporeal Meltzer's Knot is a modification of roeder's knot. Roeder's knot is 1:3:1 and Melzer's knot is 2:3:2. In this knot 2 hitches three wind and two lock is present. Therefore, Melzer knot is a geometrical modified roeder's knot which was made of all modifications and all data on knot security and loop security of the knot were analyzed. The introduction of the original knot and its applicable modifications paralleled the increase in minimally invasive techniques and the spread of these techniques in all the medical specialties. Roeder loop security depends predominantly on the number of initial turns around the standing part. Its knot security depends on the additional half hitches used to backup the knot after it has been tightened. Only a few of the modifications improved the security of the knot or its previous modifications and one of that is Meltzer's knot.

Laparoscopic Management of Bladder Endometrioma

https://www.laparoscopyhospital.com/ An optimal treatment of bladder and urethral endometriosis should ideally involve a team of experts, ie, gynecologic endoscopists, radiologists, and urologists, who are familiar with endometriosis. Endometriosis means presence of endometrium outside the uterus. Pelvic surgeries such as caesarean section, tubal ligation, hysterotomy, laparotomy for ectopic pregnancy and hysterectomy lead to implantation of endometrium in skin, subcutaneous tissue, sheath, rectus muscles, vesicovaginal septum and in uterine scar . Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. This supports the migratory or metastatic theory of implantation of endometriosis. Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. Most commonly it affects organs such as the ovaries, uterine ligaments, fallopian tubes, rectum and the cervico-vaginal region. Involvement of the urinary tract, is seen in just about 1% cases. Bladder is involved in 84% cases. Patients underwent coagulation of the endometriotic foci over the uterovesical peritoneum.

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus

This video demonstrate Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus. Despite the increased operation time and blood loss, laparoscopic myomectomy can be safely performed in the treatment of large uterine fibroid. However, high risk of blood transfusion in these patients has to be kept in mind. With laparoscopic approach, there is minimal tissue handling which reduces risk of adhesions. Saline irrigation is also constantly in use which prevents drying of tissues and blood clots from sticking to the tissues. Meticulous control of bleeding also is essential. Finally, adhesion prevention barrier such as Adept solution or Interceed is used at the end of the procedure.

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | |

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | | पित्ताशय में पथरी के कारण (Causes of gall bladder stone) पित्ताशय में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता हैं। कुछ फ़ैक्टर हैं जो गॉलस्टोन्स (gallstones) की संभावना को बढ़ा सकता है जैसे की – मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes) मोटापा (Obesity) गर्भधारण (Pregnancy) मोटापे की सर्जरी के बाद (post bariatric surgery) कुछ दवाओं का सेवन कुछ लम्बी अवधि की बीमारीयों के बाद “गॉलस्टोन्स की सम्भावना मोटापे और डायबिटीज से बढ़ती है” डॉ अमरचंद सूचित करते हैं। “ज़्यादातर पित्त की थैली में पथरी औरतों में पाई जाती है” “ऐसा होने का कारण अभी तक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ हैं।” गॉलस्टोन्स के लक्षण (Signs and symptoms of gallstones) कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी होती है। पित्त की थैली में पथरी के दिखाई देनें वाले कुछ खास लक्षण हैं (signs and symptoms of gallstones): पेट के उपरी भाग और दाहिने तरफ़ में दर्द बदहजमी खट्टापन पेट फुलाना अगर पित्त की थैली में पथरी होने की वजह से आपको पेट दर्द हो रहा है तो इसका ईलाज करना ज़रूरी है।नहीं तो यह पथरी आगे जाके दिक़्क़त का कारण बन सकती हैं।” अगर गॉल्स्टोन 3 cm से बड़ा है या फिर अगर गॉलब्लेडर पोलिप (gallbladder polyp) के साथ है जो 1 cm या उससे बड़ा है, तो गॉलब्लेडर कैंसर (gallbladder cancer) की संभावना भी बढ़ जाती हैं। लैप्रोस्कोपी अर्थात दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं जबकि चीरा विधि की अपेक्षा दूरबीन विधि में मरीज को ज्यादा लंबे समय तक हॉस्पिटल में भर्ती नहीं रहना पड़ता। इसके साथ ही पेट पर एक या चार छेद कर हार्निया, एपेंडिक्स, ट्यूमर व पथरी का सफल ऑपरेशन किया जा सकता है। इसमें समय कम लगता है और खून की भी जरूरत न के बराबर होती है। दूरबीन विधि का एक अन्य लाभ यह है कि इसमें पेट में चीरा व टांके नहीं लगते और सिर्फ एक छेद नाभि में होने से पेट कटने के कोई निशान भी नहीं आते।

Why Laparoscopic Surgery is Better ?

The purported advantages of laparoscopic surgery over conventional open techniques are less pain and faster return to normal functional status. Very few studies have included validated measures of quality of life as end points. This lecture of Dr R K Mishra assessed the health status outcomes of patients.. Here’s an example. With traditional methods, you might spend a week or more in the hospital for intestinal surgery, and your total recovery might take 4 to 8 weeks. If you have laparoscopic surgery, you might stay only 2 nights in the hospital and recover in 2 or 3 weeks. And a shorter hospital stay generally costs less. Laparoscopic surgery has demonstrably better quality-of-life outcomes than open surgery for cholecystectomy, splenectomy, and esophageal surgery. However, open hernioplasty has at least as good, if not better, health status outcomes than laparoscopic repair.

Laparoscopic Management of Ectopic Pregnancies Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ This Video Lecture of Dr R K Mishra is to compare the laparoscopic approach with laparotomy in the treatment of ectopic pregnancy. The aim of this lecture was to evaluate the safety and efficacy of laparoscopic surgery for ectopic pregnancies. In the laparoscopic group, the postoperative morbidity and post-hospital stay were significantly less. Although laparoscopic surgery for ectopic pregnancies is a new approach and it is not widely practised in service hospitals, it has more advantages than open surgery and it has been well accepted by the surgeons and patients. It is a safe and feasible approach.

Laparoscopic Repair of Incisional Hernia by Two Ports

Various ventral and incisional hernia repair techniques exist and have largely replaced the open ones. The purpose of this video is to show the 2-port technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Laparoscopic herniorrhaphy with the 2-port technique offers an efficient, safe, and effective repair for ventral and incisional hernias. We at Worls Laparoscopy Hospital started performing all the ventral hernia by two port in year 2002. Access to the abdomen and creation of pneumoperitoneum is obtained by placing a Veress needle in the left upper quadrant. One 10-mm to 12-mm balloon port and one 5-mm straight port are placed opposite the hernia as laterally as possible, preferably on the left side. The surgeon's nondominant hand compresses the abdominal wall to bring it down to the scissors tip or Harmonic scalpel for dissection or adhesiolysis. The hernia sac content is then reduced, and the margins of the hernia defect cleared circumferentially to a distance of at least 6 cm.

Laparoscopic Cervical Cerclage

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM This video demonstrate laparoscopic cervical cerclage performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Laparoscopic Cervical cerclage, also known as a cervical stitch, is a treatment for cervical incompetence or insufficiency, when the cervix starts to shorten and open too early during a pregnancy causing either a late miscarriage or preterm birth in second trimester. As a general rule, laparoscopic cervical cerclages work best when they are placed early in pregnancy and when the cervix is longer and thicker. Rates for carrying the pregnancy to term after cerclage vary from 85 to 90 percent, depending on the type of cerclage used.

IPOM Umbilical Hernia Repair by VIPRO II Mesh

Laparoscopic umbilical hernia repair has largely replaced open method. The purpose of this video is to demonstrate the laparoscopic umbilical hernia repair using two port with intraabdominal VIPRO II mesh fixation with transabdominal absorbable suture technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Methods. Two-port technique was used and the umbilical defect was closed using transabdominal VIPRO II mesh was placed intra-bdominally and fixed to abdominal wall using transabdominal suture. Results. Laparoscopic umbilical hernia repair with intraabdominal mesh fixation using absorbable sutures offers an efficient, safe, and effective repair for umbilical hernia.

Extra Corporeal Dundee Jamming Knot

The ability to suture in laparoscopic surgery is necessary less frequently than in conventional surgery, yet this ability is essential in certain critical situations, such as providing tissue support, maintaining tissue closure, and in creating certain surgical anastomoses. Although the principles of suturing and tying knots in endoscopic surgery are identical to those in conventional surgery, major modifications in technique are necessary as a result Extra Corporeal Dundee Jamming Knot is very useful. It can be prepared outside and then it can be introduced inside the abdomen to use as continuous suturing. The termination of this knot is by Aberdeen termination.

Laparoscopic Cholecystectomy made easy by Mishra's Knot

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM Extracorporeal and intracorporeal knotting in laparoscopic surgery can be used in various situations and though it can be technically demanding, it can be overcome with repeated practice. Mishra's knot is a modification of the Roeder's knot or the Meltzer's knot. In the case of a wide cystic duct, where laparoscopic clips would not occlude the full width, an extracorporeal slip knot would be appropriate. Other advantages of applying Mishra knot include less expense and eliminating the risk of catching the common bile duct with the end of the clips. In step 1, interpose the stem of instrument A above the suture to prevent ‘cheese wiring’ the cystic duct on pulling through. remember to ‘snug down’ the throws that have been previously performed. Finally, push the knot down using a knot pusher as in step 6. Do not pull up like a lasso as it would saw through and tear the tissue.

कैंसर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

कैंसर क्या है? कैंसर एक किस्म की बीमारी नहीं होती, बल्कि यह कई रूप में होता है। कैंसर के 100 से अधिक प्रकार होते हैं। अधिकतर कैंसरों के नाम उस अंग या कोशिकाओं के नाम पर रखे जाते हैं जिनमें वे शुरू होते हैं- उदाहरण के लिए, बृहदान्त्र में शुरू होने वाला कैंसर पेट का कैंसर कहा जाता है, कैंसर जो कि त्वचा की बेसल कोशिकाओं में शुरू होता है बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है। ओवेरियन कैंसर : 10% ओवरी के ट्यूमर कैंसरस हो सकते हैं. इस उम्र में अधिकतर कैंसर जर्म सेल ट्यूमर होते हैं जैसे-डिसजर्मिनोमा, योक सैक ट्यूमर आदि. ये ठोस होते हैं और बढ़ कर 10-15 सेमी हो जाते हैं. इनका पता पेट दर्द से चलता है. यह प्राय: एक ओर होता है तथा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाला जा सकता है. शुरू में इलाज हो जाये, तो यह ठीक हो सकता है. इलाज से दूसरे तरफ की ओवरी बचा ली जाती है, जिससे प्रजनन संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं | लेप्रोस्कोपी सर्जरी में पेट में तीन छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं, जो एक मिलीमीटर से लेकर एक सेंटीमीटर के हो सकते हैं। इस की-होल शल्य चिकित्सा के उपयोग से मरीज को दर्द कम होता है। कैंसर शब्द ऐसे रोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के विभाजित होती हैं और वे अन्य ऊतकों पर आक्रमण करने में सक्षम होती हैं। कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं। कैंसर के कुछ लक्षण - स्तन या शरीर के किसी अन्य भाग में कड़ापन या गांठ। - एक नया तिल या मौजूदा तिल में परिवर्तन। - कोई ख़राश जो ठीक नहीं हो पाती। - स्वर बैठना या खाँसी ना हटना। - आंत्र या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन। - खाने के बाद असुविधा महसूस करना। - निगलने के समय कठिनाई होना। - वजन में बिना किसी कारण के वृद्धि या कमी। - असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज। - कमजोर लगना या बहुत थकावट महसूस करना।

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery. Recently major developments in video imaging have been achieved: among these, the use of high definition and 3D imaging systems, and more recently indocyanine green (ICG) fluorescence imaging are emerging as major contributions to intraoperative decision making during surgical procedures. Many Infrared systems are developed to determine the potential role of infrared imaging as a tool for localizing anatomic structures and assessing tissue viability during laparoscopic surgical procedures. A camera system sensitive to emitted energy in the midinfrared range (3-5 micron) is incorporated into a two-channel visible laparoscope. Laparoscopic cholecystectomy, dissection of the ureter, and assessment of bowel perfusion were performed in a porcine model with the aid of this infrared imaging system. The ICG fluorescence imaging system seems to be simple, safe, and useful. The technique may well become a standard in the near future in view of its different diagnostic and oncological capabilities.

ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें |

ओवरियन सिस्ट अंडाशय से सिस्ट (पुटी) हटाने की सर्जरी क्या है? ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें | औरतों के दो ओवरी होते हैं। जब किसी एक ओवरी में द्रव से भरी हुई थैली उत्पन्न हो जाती है उसे सिस्ट कहते हैं। माना जाता है कि ज़्यादातर महिलाओं को उनके जीवनकाल में कम से कम एक बार सिस्ट का विकास होता है। ओवेरियन सिस्ट के प्रकार 1. फॉलिकल सिस्ट 2. कार्पस लुटियम सिस्ट 3. डरमोईड सिस्ट 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम 1. फॉलिकल सिस्ट महिलाओं के मासिक चक्र के दौरान फॉलिकल थैली में एक अंडे का विकास होता है। अधिकांश मामलों में यह थैली टूट जाती है और अंडा रिलीज़ हो जाता है। जब फॉलिकल टूटता नहीं और अंडा रिलीज़ नहीं करता तब उसके अंदर का फ्लूइड सिस्ट बना देता है। आमतौर पर यह समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाता है। 2. कार्पस लुटियम सिस्ट अंडा निकलने के बाद फॉलिकल नष्ट हो जाते हैं। यदि यह फॉलिकल नष्ट नहीं होता तो इसमें अतिरिक्त द्रव इकठ्ठा हो जाता है जिसकी वजह से कार्पस लुटियम सिस्ट बनता है। 3. डरमोईड सिस्ट सिस्ट जिनमें बाल, चमड़ी या दांत जैसे टिशू होते हैं दूसरे टिशू बनाने के लिए इस तरह के टिशू का विकास असामान्य तरीके से होता है। 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट यह ओवरी के बाहरी सतह पर विकसित होता है। यह पानी या फिर म्यूकस मटेरियल से भरा हो सकता है। 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट जब कोई टिशू गर्भाशय के अंदर बनता है तो वो गर्भाशय के बाहर भी विकसित होने लगता है और अंडाशय से जुड़ा होता है जिसके कारण सिस्ट बनता है। ऐसा तब होता है जब यूटरन एंडोमेट्रियल कोशिका गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह वह स्थिति है जब दोनों ओवरी में विभिन्न छोटे सिस्ट विकसित होने लगते हैं। यह कई सारे हार्मोनल समस्याओं से जुड़ा हुआ है। क्या ओवेरियन सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर होता है? आमतौर पर ओवेरियन सिस्ट हानिकारक नहीं होता और बिना किसी इलाज के अपने आप ही खत्म हो जाता है। कई महिलाओं में सिस्ट का विकास उनके रिप्रोडक्टिव पीरियड के दौरान होता है। सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर हो भी सकता है और नहीं भी। कई सिस्ट कैंसर का रूप नहीं लेते लेकिन कुछ मामलों में ऐसा संभव है। जैसा कि सिस्ट और कैंसर के लक्षण एक जैसे ही होते हैं इसलिए इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। हालांकि कुछ जांच और परीक्षण से इसका पता लगाया जा सकता है। सही समय पर चिकित्सीय ध्यान देकर कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। ओवेरियन सिस्ट डायग्नोसिस नियमित श्रोणि के परीक्षण से ओवेरियन सिस्ट और कैंसर की संभावनाओं के बारे में पता लगाया जा सकता है। टेस्ट का प्रकार सिस्ट के साइज़ और कम्पोजीशन पर निर्भर करता है। डॉक्टर इमेजिंग टूल्स की मदद से सिस्ट का पता लगा सकते हैं जिसमें सी टी स्कैन: आंतरिक ऑर्गन्स के क्रॉस सेक्शनल इमेज बनाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है ताकि सिस्ट का पता लगाया जा सके। एमआरआई: इसका प्रयोग आंतरिक अंगों की गहरी छवि के लिए किया जाता है ताकि सिस्ट का इलाज हो सके। अल्ट्रासाउंड टेस्ट (अल्ट्रासोनोग्राफी): इसका प्रयोग सिस्ट के साइज़, शेप, लोकेशन और कम्पोजीशन को जानने के लिए किया जाता है।

Extra Corporeal Weston Knot

In Laparoscopic Surgery there is no ideal suture available that combines easy handling, ability to form secure knots for all situations, easy sterilization, and low cost. Thus, the surgeon has to choose which suture is appropriate for each purpose, which means deciding between monofilamentous or multifilamentous (twisted or braided) and absorbable (polyglycolic acid, polyglactin, polydioxanone, or polytrimethylene carbonate) or nonabsorbable sutures (silk, nylon, polypropylene, braided polyester). Weston knot is very good knot which can be used as extracorporeal locked knot without a knot pusher. In general, superior tensile strength and knot security reduce the risk of breakage and allow the use of finer sutures with Weston Knot. These properties also minimize tissue reaction and expedite laparoscopic procedures.

रोबाटिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी प्राप्त करें |

चिकित्सा क्षेत्र में आ रहे तकनीकी बदलावों के बीच रोबोटिक सर्जरी अब अपने देश में भी होने लगी है. रोबोटिक सर्जरी में विशेषज्ञता प्राप्त सर्जन मुश्किल सर्जरी के लिए रोबोट का इस्तेमाल कर रहे हैं. रोबोट की मदद से सर्जन बेहद सटीकता व निपुणता के साथ सर्जरी को सफलतापूर्वक कर पा रहे हैं | उन्होंने कहा, मरीज भी रोबाटिक सर्जरी के बाद जल्दी ठीक होता है क्योंकि इसमें छोटा चीरा लगाया जाता है, जिसके कारण खून बहने की संभावना कम होती है. मरीज को खून चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती. मरीज को रोबाटिक सर्जरी के बाद अस्पताल में कम समय के लिए रुकना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च भी कम हो जाता है. कॉस्मेसिस इसका एक और फायदा है जिसके चलते आज बड़ी संख्या में मरीज रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुन रहे हैं.

Bilateral Dermoid Cyst

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM The challenging aspect of this case was that the patient was a 19-year-old unmarried woman with bilateral mature cystic teratoma of the ovary. The whole of the left ovary was involved in the dermoid cyst without any normal ovarian tissue. An Ovarian dermoid cyst is a saclike growth that is present at birth. It contains structures such as hair, fluid, teeth, or skin glands that can be found on or in the skin. Dermoid cysts grow slowly and are not tender unless ruptured. They usually occur on the face, inside the skull, on the lower back, and in the ovaries. Superficial dermoid cysts on the face usually can be removed without complications. Removal of other, more rare dermoid cysts requires special laparoscopic techniques and training.

Standard Laparoscopic Cholecystectomy

This video describes a standard approach for laparoscopic cholecystectomies with ideal anatomy. In laparoscopic cholecystectomy, the safest and best approach to identify the structures of the Triangle of Calot is to achieve the Critical View of Safety (CVS). The Triangle of Calot is also known as the cystohepatic triangle. It is bounded by the inferior surface of the liver, the cystic duct, and the common hepatic duct. To achieve CVS, the Triangle of Calot must be clearly dissected, the lowest part of the gallbladder must be separated from the cystic plate, and only two structures should be seeing entering the gallbladder - the cystic artery and the cystic plate.

Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM This video demonstration is Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture by Dr. R. K. Mishra at World Laparoscopy Hospital. A major benefit of the laparoscopic technique is for patients who present with bilateral inguinal hernias and recurrent hernia. Laparoscopy allows for both hernias to be repaired in a single operation without need for additional ports or incisions. As a result, recovery time is similar to unilateral laparoscopic hernia repair.

Errors in laparoscopic surgery

Laparoscopic surgery is the most significant advancement in the field of surgery over the past 25 years. This minimal access approach has been widely embraced and adopted to many common operations. Demonstrated benefits include decreased post-operative pain, shorter lengths of in-patient hospitalization, increased patient acceptance, and a more rapid return to gainful employment. With its ever-growing popularity, it has become fertile ground for civil litigation, ranking along with birth injuries and failure to diagnose cancer. A brief synopsis of the history of its evolution is presented along with general and specific comments concerning potential errors as they relate to specific common operations which are commonly done utilizing this technique. This video lecture demonstrate how to avoid mistakes in Minimal Access Surgery. https://www.laparoscopyhospital.com/

गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ की सारी जानकारी दी गयी है | गर्भाशय में रसौली, जिसे गर्भाशय लेयोओमामा या फाइब्रॉएड भी कहा जाता है, गर्भाशय के सौम्य चिकनी मांसपेशियों के ट्यूमर होते हैं। ज्यादातर महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता है जबकि अन्य दर्दनाक या भारी माहवारी हो सकती हैं। एक महिला में एक गर्भाशय रसौली या कई हो सकती हैं। कभी-कभी, रसौली से गर्भवती होने में मुश्किल हो सकती है, हालांकि यह असामान्य है। गर्भाशय में रसौली का सटीक कारण अस्पष्ट है। हालांकि, रसौली परिवार के एक पिडी से दुसरी पिडी में चलती हैं और आंशिक रूप से हार्मोन के स्तर से निर्धारित होती हैं। इसका निदान पैल्विक परीक्षा या चिकित्सा इमेजिंग द्वारा किया जा सकता है। यदि कोई लक्षण नहीं है तो उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। एनआईबीएड्स, जैसे कि इबुप्रोफेन, दर्द और खून बहने में मदद कर सकते हैं जबकि पेरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) दर्द से मदद कर सकता है। भारी माहवारी वाले लोगों में आयरन की खुराक की आवश्यकता हो सकती है। हार्मोन एगोनिस्ट क्लास को जारी करने वाले गोनाडोट्रॉपिन की दवाएं रसौली के आकार को कम कर सकती हैं लेकिन महंगी हैं और साइड इफेक्ट्स से जुड़ी हैं।यदि अधिक लक्षण मौजूद हैं, तो रसौली या गर्भाशय को हटाने के लिए सर्जरी मदद कर सकती है। गर्भाशय धमनी अन्त:शल्य प्रक्रिया भी मदद कर सकती हैं। रसौली के कैंसर संस्करण बहुत दुर्लभ हैं और यह लेयोमायोसारकोमा के रूप में जाना जाता है। लगभग 20% से 80% महिलाएं 50 वर्ष की आयु तक रसौली विकसित करती हैं। 2013 में, अनुमान लगाया गया था कि 171 मिलियन महिलाएं प्रभावित हुईं। रसौली आम तौर पर प्रजनन वर्षों के मध्य और बाद के दौरान पाई जाती हैं। रजोनिवृत्ति के बाद,रसौली आमतौर पर आकार में कम हो जाती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में,गर्भाशय में रसौली गर्भाशय को हटाने के लिए एक आम कारण है।

Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse in Elderly Women

This video demonstrate Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Total Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy is performed in order to correct prolapse and/or herniation of the vagina, uterus, and bladder. In this procedure, which is done in conjunction with a laparoscopic hysterectomy, mesh is used to anchor the cervix to the anterior longitudinal ligament of sacrum, thereby lifting the vagina and bladder into their normal anatomic positions. Laparoscopic sacrocolpopexy can also be performed in women who have suffered a prolapse of the vagina and sometimes the intestines as well—a condition known as enterocele. Traditional open abdominal sacrocolpopexy has been shown to be a durable and successful method of repairing symptomatic prolapse while maintaining natural vaginal depth and length. We have now adapted the techniques utilized in open surgery to laparoscopic sacrocolpopexy. Laparoscopic surgery offers a minimally invasive approach with several technical advantages for the surgeon, including enhanced visualization with magnification, reduced blood loss, improved suturing techniques. Laparoscopic sacrocolpopexy avoids the need for a large abdominal incision, women undergoing this procedure are able to experience a less painful recovery with a significantly quicker return to normal activities than would be possible with open surgery. In this procedure, the patient is placed under general anesthesia and five small incisions are made in the lower abdomen, allowing introduction of a camera, three robotic instrument arms and one accessory port for passage of sutures and mesh materials. In cases of advanced uterine prolapse, a hysterectomy will then be performed with preservation of the cervix. Following this, a small piece of polypropylene mesh is used to anchor the cervix, vagina and bladder to the anterior longitudial ligament of sacral bone. In some cases, the uterus can be preserved and suspended in a similar manner—a procedure known as sacrohysteropexy. Finally, tissues are sewn over the mesh to form a barrier between the mesh and surrounding pelvic organs.

Laparoscopic Instrument Demonstration - Trocars and other Hand Instruments

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM Demonstration of laparoscopic instrument design of Hand Instruments. Laparoscopic Instruments like Laparoscopy Veress Needle, Laparoscopic Hand Instruments also known as laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, monopolar hand instruments, laparoscopic atraumatic grasper, Laparoscopic Forceps, Laparoscopic Hand Instruments available in different types like Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Long Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Kelly Dissecting and Grasping Forceps, Mixter/ Right angled Dissecting & Grasping Forceps, Fenestrated Grasping Forceps, Babcock Grasping Forceps, Universal/ Maxi Grip Grasping Forceps, Strong Atraumatic Grasping Forceps, Allis Grasping Forceps , Tooth Grasping Forceps, Endoclinch Grasping Forceps, Bowel Grasping Forceps, Crocie-Olmi type Grasping Forceps, Grasping Forceps, Claw Forceps, Spoon Forceps, Metzenbaum Curved Scissor, Hook Scissors and Micro Scissor. Laparoscopic Trocar, Laparoscopic Hand Instruments, laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, Laparoscopic Clip Applicator, Laparoscopic Needle Holder, Laparoscopic Suction Irrigation SET, Laparoscopic Bipolar Instruments, Laparoscopic Electrodes, Laparoscopic Fan Retractor, Port Closure, Laparoscopic Aspiration Needle, Laparoscopic Knot Pusher, Laparoscopic Cable .

Extra Corporeal Roeder's Knot

The first laparoscopic sliding knot to be described was the Roeder knot; it has been used for a variety of procedures in all surgical disciplines. It was surmised that the introduction of new modifications in the geometry of the knot paralleled the introduction of its new indications, and that not all modifications improved its security of roeder's knot but still it is most popular extracorporeal knot in laparoscopic surgery. The lack of direct manual contact, for which palpation with current laparoscopic instruments cannot completely compensate is atracting surgeon to use extracorporeal knot in laparoscopic surgery. Roeder's knot is one of the oldest extracorporeal knot which was first time used for appendectomy. The limited movement of laparoscopic instruments that are inserted through a cannula anchored to the abdominal wall. The working field is a cone with a fixed point at the insertion point of the cannula. Because of the limited field of movement of laparoscopic instruments, proper placement of the cannula is critical to tie an entracorporeal knot. In these situation extracorporeal roaders knot is a good alternative.. The lack of normal binocular vision without true depth perception, which makes conventional techniques difficult to apply make these knots easier. Roeder's knot can be safely used to ligate any tubular structure upto 6-8mm in diameter.

मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे | मोटापे के कारण | मोटापे के कई कारण हो सकते है। इनमें से प्रमुख है:- मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना, ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा के उपयोग के बीच असंतुलन के कारण होता है। मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना भी मोटापे का कारण है। कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन मोटापे का प्रमुख कारण है। असंतुलित व्यवहार औऱ मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापे का कारण बनता है। शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है। बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा व्यस्क होने पर भी रह सकता है। हाइपोथाइरॉयडिज़्म (अवटु अल्पक्रियता) | स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी और ऐसी ही दूसरी बैरियाट्रिक सर्जरी में पेट के आकार को ऑपरेशन के जरिए छोटा किया जाता है. इससे भूख जगाने वाले हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है जिससे वजन कम होने लगता है. ओबेसिटी ऐंड मेटाबॉलिक सर्जरी सोसायटी ऑफ इंडिया का अनुमान है कि देश में हर साल 12 से 15 हजार बैरियाट्रिक सर्जरी की जाती हैं. इनमें से एक बड़ी तादाद विदेशी मरीजों की भी होती है.

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Laparoscopic Myomectomy Step by Step Video

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html This video demonstrate all the steps of laparoscopic myomectomy. Surgeons who have the experience and skill and know the size, number, and position of fibroids are able to select the appropriate candidates for laparoscopic myomectomy. Authors of a study of 2,050 laparoscopic myomectomies found that fibroids larger than 5 cm, removal of more than 3 fibroids, and broad ligament fibroids were more likely to be associated with major complications, including visceral injury, conversion to laparotomy, and bleeding requiring blood transfusion. For all women considering laparoscopic or robot-assisted myomectomy, Surgeon should order pelvic MRI with and without contrast. Having the radiologist limit the number of MRI sequences may reduce the cost and make it comparable to that of other imaging modalities. Fibroids may affect quality of life—they may cause heavy menstrual bleeding, pelvic pain or pressure, or urinary frequency or incontinence. For many women who want large or numerous fibroids removed but the uterus preserved, abdominal myomectomy is required. Smaller and less numerous fibroids usually can be managed laparoscopically or with robotic assistance.

Laparoscopic Mishra's Knot

This video demonstrate how to tie extracorporeal Mishra's knot. Nowadays, laparoscopy has become an indispensable component of surgical training across the globe. Many complicated procedures are quite regularly performed by minimally invasive approaches. As such, acquiring proficiency in endoscopic suturing has virtually turned an obligatory prerequisite into safe execution of not only advanced but also basic laparoscopic. However, intracorporeal suturing is remarkably difficult to learn and at times quite frustrating and time-consuming. To attain that required dexterity, a needle-to driver shaft angle is generally recommended].However, as per the persistent observations made and experience gained by us over the last two decades, such a right angled grip is arguably supportive only in the most favorable circumstances wherein the tissue to be sutured lies on the “floor” of the monitor, is co-axially aligned with the needle holder, and is easily accessible; thus can it finally tied the knot. Etracorporeal knot does not has these problems. Extracorporeal surgeons knot is used widely to ligated big vessels like splenic artery, renal artery and vein. Uterine artery and partial cholecystectomy. Configuration of this knot is 1:1:1:1:1:1:1.

Laparoscopic Management of Ectopic Pregnancies Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ This Video Lecture of Dr R K Mishra is to compare the laparoscopic approach with laparotomy in the treatment of ectopic pregnancy. The aim of this lecture was to evaluate the safety and efficacy of laparoscopic surgery for ectopic pregnancies. In the laparoscopic group, the postoperative morbidity and post-hospital stay were significantly less. Although laparoscopic surgery for ectopic pregnancies is a new approach and it is not widely practised in service hospitals, it has more advantages than open surgery and it has been well accepted by the surgeons and patients. It is a safe and feasible approach.

Extra Corporeal Roeder's Knot

The first laparoscopic sliding knot to be described was the Roeder knot; it has been used for a variety of procedures in all surgical disciplines. It was surmised that the introduction of new modifications in the geometry of the knot paralleled the introduction of its new indications, and that not all modifications improved its security of roeder's knot but still it is most popular extracorporeal knot in laparoscopic surgery. The lack of direct manual contact, for which palpation with current laparoscopic instruments cannot completely compensate is atracting surgeon to use extracorporeal knot in laparoscopic surgery. Roeder's knot is one of the oldest extracorporeal knot which was first time used for appendectomy. The limited movement of laparoscopic instruments that are inserted through a cannula anchored to the abdominal wall. The working field is a cone with a fixed point at the insertion point of the cannula. Because of the limited field of movement of laparoscopic instruments, proper placement of the cannula is critical to tie an entracorporeal knot. In these situation extracorporeal roaders knot is a good alternative.. The lack of normal binocular vision without true depth perception, which makes conventional techniques difficult to apply make these knots easier. Roeder's knot can be safely used to ligate any tubular structure upto 6-8mm in diameter.

Laparoscopic Nephrectomy

This video demonstrate details of Laparoscopic Nephrectomy. Laparoscopic Nephrectomy provides patients with a safe and effective way to remove a diseased or cancerous kidney. Laparoscopic nephrectomy is a minimally invasive technique, which provides patients with less discomfort and equivalent results when compared to the larger incision required with traditional open surgery. When compared to conventional open surgery, laparoscopic nephrectomy has resulted in significantly less post-operative pain, a shorter hospital stay, earlier return to work and daily activities, a more favorable cosmetic result and outcomes identical to that of open surgery.

Laparoscopic Mini Gastric Bypass Step by Step Demonstration by Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ Laparoscopic Mini Gastric Bypass (MGB) is one of the most commonly performed bariatric surgery and slowly getting popular all over world as obesity surgery. This video demonstrate step by step technique of performing mini gastric bypass surgery by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital for a female suffering from Morbid Obesity. Mini Gastric Bypass has Restrictive, Malabsorptive and Hormonal component. Restrictive: A small stomach pouch is created restricting the amount of food you can eat. Malabsorptive: A portion of the small intestine is bypassed. Since the small intestine is responsible for absorbing the calories from the food you eat, bypassing a portion of the small intestine results in fewer calories being absorbed, thus creating additional weight loss. Hormonal: The hormone ghrelin has been nicknamed the “Hunger Hormone” by researchers because of its significant effect on appetite. Gastric Bypass results in a fall in ghrelin levels resulting in a reduced appetite.

Extra Corporeal Dundee Jamming Knot

The ability to suture in laparoscopic surgery is necessary less frequently than in conventional surgery, yet this ability is essential in certain critical situations, such as providing tissue support, maintaining tissue closure, and in creating certain surgical anastomoses. Although the principles of suturing and tying knots in endoscopic surgery are identical to those in conventional surgery, major modifications in technique are necessary as a result Extra Corporeal Dundee Jamming Knot is very useful. It can be prepared outside and then it can be introduced inside the abdomen to use as continuous suturing. The termination of this knot is by Aberdeen termination.

Bilateral Dermoid Cyst

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM The challenging aspect of this case was that the patient was a 19-year-old unmarried woman with bilateral mature cystic teratoma of the ovary. The whole of the left ovary was involved in the dermoid cyst without any normal ovarian tissue. An Ovarian dermoid cyst is a saclike growth that is present at birth. It contains structures such as hair, fluid, teeth, or skin glands that can be found on or in the skin. Dermoid cysts grow slowly and are not tender unless ruptured. They usually occur on the face, inside the skull, on the lower back, and in the ovaries. Superficial dermoid cysts on the face usually can be removed without complications. Removal of other, more rare dermoid cysts requires special laparoscopic techniques and training.

Extra Corporeal Tayside Knot

The surgeon's preference usually determines which suture knot he want to use in conventional surgery. The choice may be somewhat restricted in laparoscopic surgery because access to the target tissue and techniques for suturing and tying the knot may be limited. For extracorporeal knots (slip or square knots), a suture material that slides easily (such as silk, catgut, or a monofilament suture ) is preferable. In suture material that slides easily, however, the first hitch may loosen before the second hitch can be secured. Thus, in some cases a material that does not slide as easily but that provides a good knot strength will be preferable. Although sutures made of polyglycolic or polyglactic acid may be used as in conventional surgery, it may be difficult to slide the knot in place smoothly using these materials. Tayside knot is a good extracorporeal knot for a suture material like silk.

Laparoscopic Dundee Jamming Knot

Acquiring the skills of laparoscopic suturing and knotting techniques can be considered a prerequisite to learn advanced laparoscopic procedures for laparoscopic surgeon and gynecologist. Despite the concept that developing such suturing skills should be reserved for the younger generation of laparoscopic surgeons due to the high level of difficulty in manual laparoscopic skills involved. Dundee Jamming knot is very good starter knot which is prepared outside the abdomen and then dropped inside the abdomen through one of the port to tie intracorporeal continuous suturing.

Laparoscopic Instrument Demonstration - Trocars and other Hand Instruments

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM Demonstration of laparoscopic instrument design of Hand Instruments. Laparoscopic Instruments like Laparoscopy Veress Needle, Laparoscopic Hand Instruments also known as laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, monopolar hand instruments, laparoscopic atraumatic grasper, Laparoscopic Forceps, Laparoscopic Hand Instruments available in different types like Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Long Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Kelly Dissecting and Grasping Forceps, Mixter/ Right angled Dissecting & Grasping Forceps, Fenestrated Grasping Forceps, Babcock Grasping Forceps, Universal/ Maxi Grip Grasping Forceps, Strong Atraumatic Grasping Forceps, Allis Grasping Forceps , Tooth Grasping Forceps, Endoclinch Grasping Forceps, Bowel Grasping Forceps, Crocie-Olmi type Grasping Forceps, Grasping Forceps, Claw Forceps, Spoon Forceps, Metzenbaum Curved Scissor, Hook Scissors and Micro Scissor. Laparoscopic Trocar, Laparoscopic Hand Instruments, laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, Laparoscopic Clip Applicator, Laparoscopic Needle Holder, Laparoscopic Suction Irrigation SET, Laparoscopic Bipolar Instruments, Laparoscopic Electrodes, Laparoscopic Fan Retractor, Port Closure, Laparoscopic Aspiration Needle, Laparoscopic Knot Pusher, Laparoscopic Cable .

Extra Corporeal Meltzer's Knot

Extra Corporeal Meltzer's Knot is a modification of roeder's knot. Roeder's knot is 1:3:1 and Melzer's knot is 2:3:2. In this knot 2 hitches three wind and two lock is present. Therefore, Melzer knot is a geometrical modified roeder's knot which was made of all modifications and all data on knot security and loop security of the knot were analyzed. The introduction of the original knot and its applicable modifications paralleled the increase in minimally invasive techniques and the spread of these techniques in all the medical specialties. Roeder loop security depends predominantly on the number of initial turns around the standing part. Its knot security depends on the additional half hitches used to backup the knot after it has been tightened. Only a few of the modifications improved the security of the knot or its previous modifications and one of that is Meltzer's knot.

रोबाटिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी प्राप्त करें |

चिकित्सा क्षेत्र में आ रहे तकनीकी बदलावों के बीच रोबोटिक सर्जरी अब अपने देश में भी होने लगी है. रोबोटिक सर्जरी में विशेषज्ञता प्राप्त सर्जन मुश्किल सर्जरी के लिए रोबोट का इस्तेमाल कर रहे हैं. रोबोट की मदद से सर्जन बेहद सटीकता व निपुणता के साथ सर्जरी को सफलतापूर्वक कर पा रहे हैं | उन्होंने कहा, मरीज भी रोबाटिक सर्जरी के बाद जल्दी ठीक होता है क्योंकि इसमें छोटा चीरा लगाया जाता है, जिसके कारण खून बहने की संभावना कम होती है. मरीज को खून चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती. मरीज को रोबाटिक सर्जरी के बाद अस्पताल में कम समय के लिए रुकना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च भी कम हो जाता है. कॉस्मेसिस इसका एक और फायदा है जिसके चलते आज बड़ी संख्या में मरीज रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुन रहे हैं.

Laparoscopic Cholecystectomy for 5 Year Old Child

https://www.laparoscopyhospital.com/ This video demonstrate laparoscopic cholecystectomy in a five year old girl. Gallstone disease has been considered an uncommon entity in children and infants, but its incidence is reportedly increasing which may be attributed to widespread use of diagnostic imaging (ultrasonography). An apparently healthy 5 year old female child presented to our Outpatient department with chief complaint of recurrent abdominal pain. The episodes of pain were acute in onset and associated with vomiting. As per the complete examination and findings, a diagnosis of chronic calculous cholecystitis was made. A four port laparoscopic cholecystectomy was done. The incidence of gallstones in children in India has not been sufficiently studied. The incidence of gallstone disease in India was found to be 0.3% with the incidence in age group 0–10 being less than 0.1%. In contrast to adult gallstone disease, it has been found that there is no female preponderance in gallstone diseases of infancy. Also, the majority of children having increased haemoglobin turnover develop pigment stones only after 5 years of age. The probability of gallstone disease in infants and young children should not be ignored. Gall stones should always be considered as a differential diagnosis when young patients present with complaints of abdominal pain.

IPOM Umbilical Hernia Repair by VIPRO II Mesh

Laparoscopic umbilical hernia repair has largely replaced open method. The purpose of this video is to demonstrate the laparoscopic umbilical hernia repair using two port with intraabdominal VIPRO II mesh fixation with transabdominal absorbable suture technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Methods. Two-port technique was used and the umbilical defect was closed using transabdominal VIPRO II mesh was placed intra-bdominally and fixed to abdominal wall using transabdominal suture. Results. Laparoscopic umbilical hernia repair with intraabdominal mesh fixation using absorbable sutures offers an efficient, safe, and effective repair for umbilical hernia.

Laparoscopic Repair of Incisional Hernia by Two Ports

Various ventral and incisional hernia repair techniques exist and have largely replaced the open ones. The purpose of this video is to show the 2-port technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Laparoscopic herniorrhaphy with the 2-port technique offers an efficient, safe, and effective repair for ventral and incisional hernias. We at Worls Laparoscopy Hospital started performing all the ventral hernia by two port in year 2002. Access to the abdomen and creation of pneumoperitoneum is obtained by placing a Veress needle in the left upper quadrant. One 10-mm to 12-mm balloon port and one 5-mm straight port are placed opposite the hernia as laterally as possible, preferably on the left side. The surgeon's nondominant hand compresses the abdominal wall to bring it down to the scissors tip or Harmonic scalpel for dissection or adhesiolysis. The hernia sac content is then reduced, and the margins of the hernia defect cleared circumferentially to a distance of at least 6 cm.

Errors in laparoscopic surgery

Laparoscopic surgery is the most significant advancement in the field of surgery over the past 25 years. This minimal access approach has been widely embraced and adopted to many common operations. Demonstrated benefits include decreased post-operative pain, shorter lengths of in-patient hospitalization, increased patient acceptance, and a more rapid return to gainful employment. With its ever-growing popularity, it has become fertile ground for civil litigation, ranking along with birth injuries and failure to diagnose cancer. A brief synopsis of the history of its evolution is presented along with general and specific comments concerning potential errors as they relate to specific common operations which are commonly done utilizing this technique. This video lecture demonstrate how to avoid mistakes in Minimal Access Surgery. https://www.laparoscopyhospital.com/

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery. Recently major developments in video imaging have been achieved: among these, the use of high definition and 3D imaging systems, and more recently indocyanine green (ICG) fluorescence imaging are emerging as major contributions to intraoperative decision making during surgical procedures. Many Infrared systems are developed to determine the potential role of infrared imaging as a tool for localizing anatomic structures and assessing tissue viability during laparoscopic surgical procedures. A camera system sensitive to emitted energy in the midinfrared range (3-5 micron) is incorporated into a two-channel visible laparoscope. Laparoscopic cholecystectomy, dissection of the ureter, and assessment of bowel perfusion were performed in a porcine model with the aid of this infrared imaging system. The ICG fluorescence imaging system seems to be simple, safe, and useful. The technique may well become a standard in the near future in view of its different diagnostic and oncological capabilities.

Laparoscopic Meltzer's Knot

This video demonstrate how to ligate Laparoscopic Meltzer's Knot. Laparoscopic Meltzer's Knot is also called as modified roeder's knot. However, after accumulating over 20 years of experience in this field, we have consistently observed this knot to be very user-friendly; on the contrary, it is ergonomically much easy particularly in areas with limited accessibility for laparoscopic instruments. To counter the limitations of laparoscopic surgery, we have devised a simple technique that ensures gripping the suture in a peculiar way to make endoscopic Meltzer's knotting rather effortless, faster and easy to learn.

Extra Corporeal Weston Knot

In Laparoscopic Surgery there is no ideal suture available that combines easy handling, ability to form secure knots for all situations, easy sterilization, and low cost. Thus, the surgeon has to choose which suture is appropriate for each purpose, which means deciding between monofilamentous or multifilamentous (twisted or braided) and absorbable (polyglycolic acid, polyglactin, polydioxanone, or polytrimethylene carbonate) or nonabsorbable sutures (silk, nylon, polypropylene, braided polyester). Weston knot is very good knot which can be used as extracorporeal locked knot without a knot pusher. In general, superior tensile strength and knot security reduce the risk of breakage and allow the use of finer sutures with Weston Knot. These properties also minimize tissue reaction and expedite laparoscopic procedures.

मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे | मोटापे के कारण | मोटापे के कई कारण हो सकते है। इनमें से प्रमुख है:- मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना, ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा के उपयोग के बीच असंतुलन के कारण होता है। मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना भी मोटापे का कारण है। कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन मोटापे का प्रमुख कारण है। असंतुलित व्यवहार औऱ मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापे का कारण बनता है। शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है। बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा व्यस्क होने पर भी रह सकता है। हाइपोथाइरॉयडिज़्म (अवटु अल्पक्रियता) | स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी और ऐसी ही दूसरी बैरियाट्रिक सर्जरी में पेट के आकार को ऑपरेशन के जरिए छोटा किया जाता है. इससे भूख जगाने वाले हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है जिससे वजन कम होने लगता है. ओबेसिटी ऐंड मेटाबॉलिक सर्जरी सोसायटी ऑफ इंडिया का अनुमान है कि देश में हर साल 12 से 15 हजार बैरियाट्रिक सर्जरी की जाती हैं. इनमें से एक बड़ी तादाद विदेशी मरीजों की भी होती है.

Tips and Tricks for Hysterectomy

This video demonstrate Tips and Tricks of performing Laparoscopic Hysterectomy. Hysterectomy stills represents the most common gynecological surgery. However, despite the development of laparoscopy, only 12% of hysterectomies are performed by laparoscopy. In this lecture, some tips and tricks for the different key steps of hysterectomy are explained to simplify this surgery, make it faster and also reproducible. https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM

Learn Steps of Total Laparoscopic Hysterectomy in 15 Minutes with Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html Vaginal and laparoscopic hysterectomies have been clearly associated with decreased blood loss, shorter hospital stay, speedier return to normal activities, and fewer abdominal wall infections when compared with abdominal hysterectomies. In this video Dr R K Mishra has outlined the steps to a successful Total laparoscopic hysterectomy. Due to a wide variety in anatomy and in the course of the uterine vessels, we find it helpful to initially skeletonize them with the Harmonic scalpel and uterine artery with ligasure. Total laparoscopic hysterectomy is a safe and effective procedure for women needing a hysterectomy. We enjoy a high operative volume and perform approximately 200 laparoscopic hysterectomy cases annually. The steps described herein are not meant to be an absolute truth, but rather a true and tested method that has served us well to safely accomplish this procedure.

MGB - An Effective Bariatric Surgery

The Mini-Gastric Bypass MGB is an excellent choice for bariatric surgery. All over world bariatric surgeons generally provides the MGB with strongly positive reviews. This international group of bariatric experts from 6 continents and 23 countries judged the MGB as a short simple effective durable bariatric procedure. In most questions the MGB was judged significantly better than similar assessments of the Band, Sleeve and the RNY. This video demonstration suggests that there is a deep reservoir of knowledge and experience that has here to fore been untapped that may assist surgeons and their patients in making good decisions about weight loss surgery. This surgery was developed by considering its less operating time and simplicity. Mini gastric bypass reduces stomach size and reroutes intestines because of which patient feels full even with small meals, absorbs less calories, lose ¾ of weight in 2 years, improves health. As compared to gastric bypass, mini gastric bypass involves low complications and minimum size effects. Mini Gastric Bypas Surgery in Qatar,Oman Because of its simplicity mini gastric bypass can minimize the chances of post-surgical complications. Patient can live a healthy lifestyle after surgery with sustained weight loss. Mini-gastric bypass is a good option to reduce unhealthy weight and is enjoying high success rate. It is true that MGB can help in weight loss, but it totally depends on patients’ ability to maintain healthy lifestyle followed by regular exercise and diet.

अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | क्‍या है अपेंडिक्‍स? अपेंडिक्स छोटी और बड़ी आंतों के बीच की कड़ी है, जो शहतूत के आकार की होती है। यह आंतों से बाहर की ओर निकली रहती है। पहले इसकी उपयोगियता या अनुपयोगियता के बारे में जानकारी नहीं थी। अक्सर चिकित्सक पेट दर्द होने पर अपेंडिक्स को हटा देने में ही भलाई समझते थे, इससे मरीजो को कोई समस्या नहीं आती है। फिर भी पूरी तरह परीक्षण किए बगैर मामूली से या अन्य किसी कारण से होने वाले पेटदर्द के निदान के लिए इस अवशेषी अंग को निकाल फेंकना गलत है। अपेंडिक्‍स के कारण अपेंडिक्‍स के कारणों में लम्बे समय तक कब्ज का रहना, पेट में पलने वाला परजीवी व आंतों के रोग इत्यादि से अपेंडिक्स की नाली में रुकावट आ जाती है। ऐसे भोजन का सेवन करना जिसमें फाइबर बहुत ही कम या बिल्कुल न हो, भी इस समस्या को निमंत्रण दे सकता है। जब यह अपेंडिक्स में लगातार रुकावट की स्थिति बनी रहे तो सूजन और संक्रमण के बाद यह फटने की स्थिति में हो जाती है। फटने पर यह पेट और रक्‍त में संक्रमण फैला सकता है। फिर तो यह बहुत ही भयावह हो सकता है।

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | महिलाओं में बांझपन के लक्षण इस वीडियो मे बांझपन का लेप्रोस्कोपी से इलाज एवं लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | महिलाओं में बांझपन के लक्षण मासिकधर्म प्रारंभ होने के साथ ही दिखने लगते हैं. इन में से कईर् लक्षण ऐसे होते हैं, जिन्हें तुरंत पहचान कर उन का उपचार करा लिया जाए तो बहुत संभव है कि भविष्य में होने वाली बांझपन की आशंका से बचा जाए. अनियमित मासिकधर्म महिलाओं में मासिकधर्म की अनियमितता बांझपन का सब से प्रमुख कारण है. कईर् महिलाओं में संतुलित व पोषक भोजन के सेवन और नियमित ऐक्सरसाइज के द्वारा यह समस्या दूर हो जाती है, लेकिन कई महिलाओं को उपचार की आवश्यकता पड़ती है. मासिकचक्र से संबंधित निम्न अनियमितताएं हो सकती हैं: – 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना. – पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना. – 2 पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं. – 3 मासिकचक्र में पीरियड्स न आना. – पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना. – मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना. मासिकधर्म न आना कई महिलाओं में कभीकभी मासिकधर्म आता ही नहीं. इस का कारण अंडाशय या गर्भाशय की अनुपस्थिति होती है. यह समस्या जन्मजात हाती है, लेकिन इस के बारे में पता यौवनावस्था प्रारंभ होने पर लगता है. ऐसी महिलाएं कभी मां नहीं बन पाती हैं. हारमोन असंतुलन कभीकभी महिलाओं में बांझपन हारमोन समस्याओं से भी संबंधित होता है. इस मामले में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं: – त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है. – सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना. – होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास. – बालों का झड़ना या पतला होना. – वजन बढ़ना. – निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है. – सैक्स के दौरान दर्द होना. – असामान्य मासिकचक्र.

गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ की सारी जानकारी दी गयी है | गर्भाशय में रसौली, जिसे गर्भाशय लेयोओमामा या फाइब्रॉएड भी कहा जाता है, गर्भाशय के सौम्य चिकनी मांसपेशियों के ट्यूमर होते हैं। ज्यादातर महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता है जबकि अन्य दर्दनाक या भारी माहवारी हो सकती हैं। एक महिला में एक गर्भाशय रसौली या कई हो सकती हैं। कभी-कभी, रसौली से गर्भवती होने में मुश्किल हो सकती है, हालांकि यह असामान्य है। गर्भाशय में रसौली का सटीक कारण अस्पष्ट है। हालांकि, रसौली परिवार के एक पिडी से दुसरी पिडी में चलती हैं और आंशिक रूप से हार्मोन के स्तर से निर्धारित होती हैं। इसका निदान पैल्विक परीक्षा या चिकित्सा इमेजिंग द्वारा किया जा सकता है। यदि कोई लक्षण नहीं है तो उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। एनआईबीएड्स, जैसे कि इबुप्रोफेन, दर्द और खून बहने में मदद कर सकते हैं जबकि पेरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) दर्द से मदद कर सकता है। भारी माहवारी वाले लोगों में आयरन की खुराक की आवश्यकता हो सकती है। हार्मोन एगोनिस्ट क्लास को जारी करने वाले गोनाडोट्रॉपिन की दवाएं रसौली के आकार को कम कर सकती हैं लेकिन महंगी हैं और साइड इफेक्ट्स से जुड़ी हैं।यदि अधिक लक्षण मौजूद हैं, तो रसौली या गर्भाशय को हटाने के लिए सर्जरी मदद कर सकती है। गर्भाशय धमनी अन्त:शल्य प्रक्रिया भी मदद कर सकती हैं। रसौली के कैंसर संस्करण बहुत दुर्लभ हैं और यह लेयोमायोसारकोमा के रूप में जाना जाता है। लगभग 20% से 80% महिलाएं 50 वर्ष की आयु तक रसौली विकसित करती हैं। 2013 में, अनुमान लगाया गया था कि 171 मिलियन महिलाएं प्रभावित हुईं। रसौली आम तौर पर प्रजनन वर्षों के मध्य और बाद के दौरान पाई जाती हैं। रजोनिवृत्ति के बाद,रसौली आमतौर पर आकार में कम हो जाती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में,गर्भाशय में रसौली गर्भाशय को हटाने के लिए एक आम कारण है।

Laparoscopic Cervical Cerclage

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM This video demonstrate laparoscopic cervical cerclage performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Laparoscopic Cervical cerclage, also known as a cervical stitch, is a treatment for cervical incompetence or insufficiency, when the cervix starts to shorten and open too early during a pregnancy causing either a late miscarriage or preterm birth in second trimester. As a general rule, laparoscopic cervical cerclages work best when they are placed early in pregnancy and when the cervix is longer and thicker. Rates for carrying the pregnancy to term after cerclage vary from 85 to 90 percent, depending on the type of cerclage used.

Laparoscopic Surgery for Ovarian Cyst Diseases

This video demonstrate laparoscopic surgery for various ovarian diseases. Ovarian cyst removal is surgery to remove a cyst or cysts from 1 or both of ovaries. A laparoscopic surgery uses small incisions and specialized tools. It may offer faster recovery times than open surgery , which uses a larger abdominal incision. Most cysts can be removed using laparoscopy. This is a type of keyhole surgery where small cuts are made in your tummy and gas is blown into the pelvis to allow the surgeon to access your ovaries. A laparoscope is passed into abdomen so the surgeon can see your internal organs. The surgeon then removes the cyst through the small cuts in skin. After the cyst has been removed, the cuts will be closed using dissolvable stitches. A laparoscopy is preferred because it causes less pain and has a quicker recovery time. Most women are able to go home on the same day or the following day. For detail go to https://www.laparoscopyhospital.com/

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) |

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) | हिस्टेरेक्टॉमी एक शल्यक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी महिला के गर्भाशय को निकाला जाता है। गर्भाशय महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का एक अंग है तथा यह मनुष्य की बंद मुट्ठी के आकार का होता है। आपका गर्भाशय निकाले जाने के बाद आप संतान पैदा नहीं कर सकती, तथा इसके बाद आपको मासिक धर्म भी नहीं होगा। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) नहीं निकाले गए हैं, तो आप मादा हार्मोन पैदा करती रहेंगी। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) निकाले गए हैं, तो मासिक धर्म रुक जाएगा। हिस्टेरेक्टॉमी शल्य क्रिया की कई किस्में हैं। अपने चिकित्सक से पूछें कि आप किस प्रकार की शल्य क्रिया करा रहीं हैं तथा क्या आपकी गर्भग्रीवा (सर्विक्स), डिंबवाही नलियां तथा अंडाशय भी हटाए जा रहे हैं। • योनीय (वेजाइनल) हिस्टेरेक्टॉमी - गर्भाशय को योनि मार्ग से हटाया जाता है, तथा पेट में कोई चीरफाड़ नहीं होती। • उदरीय (एब्डॉमिनल) हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में चीरा लगाकर, गर्भाशय को निकाला जाता है। • लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में कई छोटे सुराख किए जाते हैं और डॉक्टर इन छोटे सुराखों के माध्यम से लेप्रोस्कोप का प्रयोग करते हुए काम करता है। यह यंत्र डॉक्टर को शल्य क्रिया के दौरान छोटे स्थानों को देख पाना आसान बनाता है। अन्य छोटे यंत्र गर्भाशय को अलग करने और निकालने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी - यह लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी से बहुत मिलती जुलती है। यंत्र अधिक लचीले होते हैं और डॉक्टर द्वारा शल्य क्रिया के दौरान यंत्र की सहायता करने के लिए विशेष कैमरे का उपयोग किया जाता है।

Laparoscopic Cholecystectomy made easy by Mishra's Knot

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM Extracorporeal and intracorporeal knotting in laparoscopic surgery can be used in various situations and though it can be technically demanding, it can be overcome with repeated practice. Mishra's knot is a modification of the Roeder's knot or the Meltzer's knot. In the case of a wide cystic duct, where laparoscopic clips would not occlude the full width, an extracorporeal slip knot would be appropriate. Other advantages of applying Mishra knot include less expense and eliminating the risk of catching the common bile duct with the end of the clips. In step 1, interpose the stem of instrument A above the suture to prevent ‘cheese wiring’ the cystic duct on pulling through. remember to ‘snug down’ the throws that have been previously performed. Finally, push the knot down using a knot pusher as in step 6. Do not pull up like a lasso as it would saw through and tear the tissue.

Extra-peritoneal Hernia Surgery

This video demonstrate Totally Extra-peritoneal Hernia Surgery (TEP). A hernia is repaired generally using a synthetic mesh either with open surgery or increasingly using less invasive laparoscopic procedures. The most common laparoscopic techniques for inguinal hernia repair are transabdominal preperitoneal (TAPP) repair and totally extraperitoneal (TEP) repair.

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Myoma

This video demonstrate laparoscopic myomectomy for large intramural myoma. Laparoscopic myomectomy using pneumoperitoneum for large intramural myomas is considered a difficult and time-consuming procedure, requiring great skill to move a large uterus; to locate, grasp, enucleate, and remove a bulky myoma from the abdominal cavity; to achieve adequate hemostasis; and to repair the muscle layer. Laparoscopic myomectomy allows your surgeon to remove your fibroids through several small incisions. This may be done robotically. It's less invasive and recovery is faster than with abdominal myomectomy. Laparoscopic myomectomy (LM) currently brings more attention because of increased demands on uterine conservation and less invasive management of myomas. The advantages of Laparoscopic Myomectomy are shorter hospitalization, faster recovery, fewer adhesions, and less blood loss. In spite of the increasing improvements in laparoscopic instruments and techniques, advanced laparoscopic technical skills are required to perform Laparoscopic Myomectomy with success. Technical problems inherent to the removal of large uterine myomas include hemostasis, uterine closure, and removal of the uterine tissue.

Laparoscopic Cervical Cerclage for cervical incompetence or insufficiency

When a woman’s cervix is weak (sometimes called an incompetent cervix) she is more likely to have a baby born prematurely because the cervix shortens or opens too early. In order to prevent premature labor, a woman’s doctor may recommend a cervical cerclage. A cerclage is used to prevent these early changes in a woman’s cervix, thus preventing premature labor. A closed cervix helps a developing baby stay inside the uterus until the mother reaches 37-38 weeks of pregnancy. Treatment for cervical incompetence is a surgical procedure called cervical cerclage, in which the cervix is sewn closed during pregnancy. The cervix is the lowest part of the uterus and extends into the vagina. For more information https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic orchiectomy combined with hernia repair

This video demonstrate Laparoscopic treatment for inguinal hernia combined with cryptorchidism management by Trans Abdominal Preperitoneal repair of hernia in a patient with undescended testes with hernia. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view. Approximately 7% of child patients with inguinal hernias also present with cryptorchidism. On the other hand, combined adult cases are uncommon. Here we report two adult cases of inguinal hernia combined with intra-canalicular cryptorchidism who underwent TAPP repair with orchiodectomy under the same operative view. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view could be safely performed in adults with an inguinal hernia combined with extra-abdominal cryptorchidism. This procedure could be an option for the treatment of such adult patients. Cryptorchidism is a condition in which one or both testes fail to descend into the scrotum before birth. The frequency of undescended testes has been reported as 4.1–6.9% during the neonatal period, 1.0–1.6% by 3 months of age, 1.0–1.7% by 1 year of age, and less than 1.0% after 1 year of age. Orchiectomy is also recommended for adult cases because adult patients with cryptorchidism already lack spermatogenic function and have a risk of neoplasms. https://www.laparoscopyhospital.com/laparoscopic-urology.html

Extra Corporeal Mishra's Knot

Extra Corporeal Mishra's Knot is ideal knot for thick pedicles. We prefer to use a monofilament poly trimethylene carbonate absorbable suture for Mishra's Knot. It is very good knot for uterine vascular bundle, splenic artery, renal artery or In-mass Ligation in cholecystectomy. It combines excellent tensile strength with good handling properties. It has a good first-throw holding capacity and a smooth knot tie-down, which facilitates tissue approximation and reduces intraoperative knot repositioning, despite its relatively high memory. If a Mishra's knot has to be placed extracorporeally, we use a monofilament polypropylene or polygalactane suture as in conventional surgery. We prefer to use coated, braided polyester nonabsorbable sutures in sutured rectopexy also in Mishra's Knot.

Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse in Elderly Women

This video demonstrate Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Total Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy is performed in order to correct prolapse and/or herniation of the vagina, uterus, and bladder. In this procedure, which is done in conjunction with a laparoscopic hysterectomy, mesh is used to anchor the cervix to the anterior longitudinal ligament of sacrum, thereby lifting the vagina and bladder into their normal anatomic positions. Laparoscopic sacrocolpopexy can also be performed in women who have suffered a prolapse of the vagina and sometimes the intestines as well—a condition known as enterocele. Traditional open abdominal sacrocolpopexy has been shown to be a durable and successful method of repairing symptomatic prolapse while maintaining natural vaginal depth and length. We have now adapted the techniques utilized in open surgery to laparoscopic sacrocolpopexy. Laparoscopic surgery offers a minimally invasive approach with several technical advantages for the surgeon, including enhanced visualization with magnification, reduced blood loss, improved suturing techniques. Laparoscopic sacrocolpopexy avoids the need for a large abdominal incision, women undergoing this procedure are able to experience a less painful recovery with a significantly quicker return to normal activities than would be possible with open surgery. In this procedure, the patient is placed under general anesthesia and five small incisions are made in the lower abdomen, allowing introduction of a camera, three robotic instrument arms and one accessory port for passage of sutures and mesh materials. In cases of advanced uterine prolapse, a hysterectomy will then be performed with preservation of the cervix. Following this, a small piece of polypropylene mesh is used to anchor the cervix, vagina and bladder to the anterior longitudial ligament of sacral bone. In some cases, the uterus can be preserved and suspended in a similar manner—a procedure known as sacrohysteropexy. Finally, tissues are sewn over the mesh to form a barrier between the mesh and surrounding pelvic organs.

Standard Laparoscopic Cholecystectomy

This video describes a standard approach for laparoscopic cholecystectomies with ideal anatomy. In laparoscopic cholecystectomy, the safest and best approach to identify the structures of the Triangle of Calot is to achieve the Critical View of Safety (CVS). The Triangle of Calot is also known as the cystohepatic triangle. It is bounded by the inferior surface of the liver, the cystic duct, and the common hepatic duct. To achieve CVS, the Triangle of Calot must be clearly dissected, the lowest part of the gallbladder must be separated from the cystic plate, and only two structures should be seeing entering the gallbladder - the cystic artery and the cystic plate.

लेप्रोस्कोपी सर्जरी के बारे में सब कुछ जाने |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | लैप्रोस्कोपी एक सर्जरी प्रक्रिया है जो आम तौर पर पेट या श्रोणि के अंदर अंगों की जांच करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह छोटी चीजों (0.5-1.5 सेमी), छोटी ट्यूबों, सर्जरी उपकरणों और छोटे कैमरों की मदद से किया जाता है। यह एक जटिल सर्जरी है और बहुत कम दिन तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता पड़ती है। लैप्रोस्कोपी जीनाकोलॉजिक सर्जरी, हृदय सर्जरी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, किडनी की सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, एक या दोनों एड्रेनल ग्रंथियों को हटाने और गैल्स्टोन को हटाने के लिए किया जाता है। डॉक्टर इस प्रक्रिया के माध्यम से बायोप्सी नमूने भी ले सकते हैं। इसे पारंपरिक (खुली) सर्जरी पर तेजी से पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें बड़ी चीरे और अस्पताल में रहने का समय शामिल है।

Laparoscopic Roeder's Knot

Although it demands an advanced set of skills that remain substantially hard to don, many of the salient steps of “open” surgery, including suturing, are credibly “replicated” in its laparoscopic counterpart with the intention of achieving similar optimal results. This video demonstrate how to tie Laparoscopic Roeder's Knot. Laparoscopic Roeder's Knot is one of the oldest knot used in laparoscopic surgery. It is used most commonly during laparoscopic appendectomy surgery. Recent literature, though abundant with numerous reports pertaining to a variety of endoscopic knotting techniques and technologies, appears to lack scientific data but Roeder's knot is a time tasted extra corporeal slip knot which is secure for 6-8 mm diameter tubular structure.

कैंसर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

कैंसर क्या है? कैंसर एक किस्म की बीमारी नहीं होती, बल्कि यह कई रूप में होता है। कैंसर के 100 से अधिक प्रकार होते हैं। अधिकतर कैंसरों के नाम उस अंग या कोशिकाओं के नाम पर रखे जाते हैं जिनमें वे शुरू होते हैं- उदाहरण के लिए, बृहदान्त्र में शुरू होने वाला कैंसर पेट का कैंसर कहा जाता है, कैंसर जो कि त्वचा की बेसल कोशिकाओं में शुरू होता है बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है। ओवेरियन कैंसर : 10% ओवरी के ट्यूमर कैंसरस हो सकते हैं. इस उम्र में अधिकतर कैंसर जर्म सेल ट्यूमर होते हैं जैसे-डिसजर्मिनोमा, योक सैक ट्यूमर आदि. ये ठोस होते हैं और बढ़ कर 10-15 सेमी हो जाते हैं. इनका पता पेट दर्द से चलता है. यह प्राय: एक ओर होता है तथा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाला जा सकता है. शुरू में इलाज हो जाये, तो यह ठीक हो सकता है. इलाज से दूसरे तरफ की ओवरी बचा ली जाती है, जिससे प्रजनन संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं | लेप्रोस्कोपी सर्जरी में पेट में तीन छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं, जो एक मिलीमीटर से लेकर एक सेंटीमीटर के हो सकते हैं। इस की-होल शल्य चिकित्सा के उपयोग से मरीज को दर्द कम होता है। कैंसर शब्द ऐसे रोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के विभाजित होती हैं और वे अन्य ऊतकों पर आक्रमण करने में सक्षम होती हैं। कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं। कैंसर के कुछ लक्षण - स्तन या शरीर के किसी अन्य भाग में कड़ापन या गांठ। - एक नया तिल या मौजूदा तिल में परिवर्तन। - कोई ख़राश जो ठीक नहीं हो पाती। - स्वर बैठना या खाँसी ना हटना। - आंत्र या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन। - खाने के बाद असुविधा महसूस करना। - निगलने के समय कठिनाई होना। - वजन में बिना किसी कारण के वृद्धि या कमी। - असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज। - कमजोर लगना या बहुत थकावट महसूस करना।

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus

This video demonstrate Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus. Despite the increased operation time and blood loss, laparoscopic myomectomy can be safely performed in the treatment of large uterine fibroid. However, high risk of blood transfusion in these patients has to be kept in mind. With laparoscopic approach, there is minimal tissue handling which reduces risk of adhesions. Saline irrigation is also constantly in use which prevents drying of tissues and blood clots from sticking to the tissues. Meticulous control of bleeding also is essential. Finally, adhesion prevention barrier such as Adept solution or Interceed is used at the end of the procedure.

Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM This video demonstration is Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture by Dr. R. K. Mishra at World Laparoscopy Hospital. A major benefit of the laparoscopic technique is for patients who present with bilateral inguinal hernias and recurrent hernia. Laparoscopy allows for both hernias to be repaired in a single operation without need for additional ports or incisions. As a result, recovery time is similar to unilateral laparoscopic hernia repair.

Laparoscopic Weston Knot

Nowadays, the acquisition of safe, effective yet rapid and minimally invasive suturing skills has become not only desirable but also an essential part of any laparoscopic intervention. Laparoscopic Weston Knot was initially started by arthroscopic surgeons but now widely used in laparoscopic general surgery or gynecology. Although there remains a substantial body of literature focusing mainly on varied minimal access knotting techniques, there seem to be scarcely any contributions devoted specifically to the crux of its successful execution—the precise intracorporeal needle loading methodology that eventually translates into easy and secure tissue approximation.

Laparoscopic Management of Retrocecal Subserous Ruptured Appendix

This video demonstrate Retrocecal Subserous ruptured appendix surgery performed by Laparoscopy. Although there are several factors that can contribute to this rare pathology, the main cause of neglected medical management of appendicitis is the persistence of a large appendicular lump. CT and US are very useful diagnosis tools. Treatment consists to a careful appendectomy of the subserous part of appendix which can be carried out by laparoscopic approach. In this rare pathology a prior history of appendectomy can delay the diagnosis and increase its associated morbidity and even mortality. https://www.laparoscopyhospital.com/international-patients.html

Laparoscopic Tayside Knot

Tayside knot is a good laparoscopic knot which is used by laparoscopic surgeons to ligate tubular structures using multifilament suture material. practice of this not is necessary. In this video the Tayside knots correct configuration and method of tying this knot has been demonstrated. After experience of 20 years of teaching laparoscopic surgery we conclude that the acquisition of laparoscopic incorporeal suturing and knot tying technique is dependent on practice rather than whether the surgeon is in training or not.

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | |

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | | पित्ताशय में पथरी के कारण (Causes of gall bladder stone) पित्ताशय में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता हैं। कुछ फ़ैक्टर हैं जो गॉलस्टोन्स (gallstones) की संभावना को बढ़ा सकता है जैसे की – मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes) मोटापा (Obesity) गर्भधारण (Pregnancy) मोटापे की सर्जरी के बाद (post bariatric surgery) कुछ दवाओं का सेवन कुछ लम्बी अवधि की बीमारीयों के बाद “गॉलस्टोन्स की सम्भावना मोटापे और डायबिटीज से बढ़ती है” डॉ अमरचंद सूचित करते हैं। “ज़्यादातर पित्त की थैली में पथरी औरतों में पाई जाती है” “ऐसा होने का कारण अभी तक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ हैं।” गॉलस्टोन्स के लक्षण (Signs and symptoms of gallstones) कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी होती है। पित्त की थैली में पथरी के दिखाई देनें वाले कुछ खास लक्षण हैं (signs and symptoms of gallstones): पेट के उपरी भाग और दाहिने तरफ़ में दर्द बदहजमी खट्टापन पेट फुलाना अगर पित्त की थैली में पथरी होने की वजह से आपको पेट दर्द हो रहा है तो इसका ईलाज करना ज़रूरी है।नहीं तो यह पथरी आगे जाके दिक़्क़त का कारण बन सकती हैं।” अगर गॉल्स्टोन 3 cm से बड़ा है या फिर अगर गॉलब्लेडर पोलिप (gallbladder polyp) के साथ है जो 1 cm या उससे बड़ा है, तो गॉलब्लेडर कैंसर (gallbladder cancer) की संभावना भी बढ़ जाती हैं। लैप्रोस्कोपी अर्थात दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं जबकि चीरा विधि की अपेक्षा दूरबीन विधि में मरीज को ज्यादा लंबे समय तक हॉस्पिटल में भर्ती नहीं रहना पड़ता। इसके साथ ही पेट पर एक या चार छेद कर हार्निया, एपेंडिक्स, ट्यूमर व पथरी का सफल ऑपरेशन किया जा सकता है। इसमें समय कम लगता है और खून की भी जरूरत न के बराबर होती है। दूरबीन विधि का एक अन्य लाभ यह है कि इसमें पेट में चीरा व टांके नहीं लगते और सिर्फ एक छेद नाभि में होने से पेट कटने के कोई निशान भी नहीं आते।

ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें |

ओवरियन सिस्ट अंडाशय से सिस्ट (पुटी) हटाने की सर्जरी क्या है? ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें | औरतों के दो ओवरी होते हैं। जब किसी एक ओवरी में द्रव से भरी हुई थैली उत्पन्न हो जाती है उसे सिस्ट कहते हैं। माना जाता है कि ज़्यादातर महिलाओं को उनके जीवनकाल में कम से कम एक बार सिस्ट का विकास होता है। ओवेरियन सिस्ट के प्रकार 1. फॉलिकल सिस्ट 2. कार्पस लुटियम सिस्ट 3. डरमोईड सिस्ट 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम 1. फॉलिकल सिस्ट महिलाओं के मासिक चक्र के दौरान फॉलिकल थैली में एक अंडे का विकास होता है। अधिकांश मामलों में यह थैली टूट जाती है और अंडा रिलीज़ हो जाता है। जब फॉलिकल टूटता नहीं और अंडा रिलीज़ नहीं करता तब उसके अंदर का फ्लूइड सिस्ट बना देता है। आमतौर पर यह समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाता है। 2. कार्पस लुटियम सिस्ट अंडा निकलने के बाद फॉलिकल नष्ट हो जाते हैं। यदि यह फॉलिकल नष्ट नहीं होता तो इसमें अतिरिक्त द्रव इकठ्ठा हो जाता है जिसकी वजह से कार्पस लुटियम सिस्ट बनता है। 3. डरमोईड सिस्ट सिस्ट जिनमें बाल, चमड़ी या दांत जैसे टिशू होते हैं दूसरे टिशू बनाने के लिए इस तरह के टिशू का विकास असामान्य तरीके से होता है। 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट यह ओवरी के बाहरी सतह पर विकसित होता है। यह पानी या फिर म्यूकस मटेरियल से भरा हो सकता है। 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट जब कोई टिशू गर्भाशय के अंदर बनता है तो वो गर्भाशय के बाहर भी विकसित होने लगता है और अंडाशय से जुड़ा होता है जिसके कारण सिस्ट बनता है। ऐसा तब होता है जब यूटरन एंडोमेट्रियल कोशिका गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह वह स्थिति है जब दोनों ओवरी में विभिन्न छोटे सिस्ट विकसित होने लगते हैं। यह कई सारे हार्मोनल समस्याओं से जुड़ा हुआ है। क्या ओवेरियन सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर होता है? आमतौर पर ओवेरियन सिस्ट हानिकारक नहीं होता और बिना किसी इलाज के अपने आप ही खत्म हो जाता है। कई महिलाओं में सिस्ट का विकास उनके रिप्रोडक्टिव पीरियड के दौरान होता है। सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर हो भी सकता है और नहीं भी। कई सिस्ट कैंसर का रूप नहीं लेते लेकिन कुछ मामलों में ऐसा संभव है। जैसा कि सिस्ट और कैंसर के लक्षण एक जैसे ही होते हैं इसलिए इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। हालांकि कुछ जांच और परीक्षण से इसका पता लगाया जा सकता है। सही समय पर चिकित्सीय ध्यान देकर कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। ओवेरियन सिस्ट डायग्नोसिस नियमित श्रोणि के परीक्षण से ओवेरियन सिस्ट और कैंसर की संभावनाओं के बारे में पता लगाया जा सकता है। टेस्ट का प्रकार सिस्ट के साइज़ और कम्पोजीशन पर निर्भर करता है। डॉक्टर इमेजिंग टूल्स की मदद से सिस्ट का पता लगा सकते हैं जिसमें सी टी स्कैन: आंतरिक ऑर्गन्स के क्रॉस सेक्शनल इमेज बनाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है ताकि सिस्ट का पता लगाया जा सके। एमआरआई: इसका प्रयोग आंतरिक अंगों की गहरी छवि के लिए किया जाता है ताकि सिस्ट का इलाज हो सके। अल्ट्रासाउंड टेस्ट (अल्ट्रासोनोग्राफी): इसका प्रयोग सिस्ट के साइज़, शेप, लोकेशन और कम्पोजीशन को जानने के लिए किया जाता है।

Why Laparoscopic Surgery is Better ?

The purported advantages of laparoscopic surgery over conventional open techniques are less pain and faster return to normal functional status. Very few studies have included validated measures of quality of life as end points. This lecture of Dr R K Mishra assessed the health status outcomes of patients.. Here’s an example. With traditional methods, you might spend a week or more in the hospital for intestinal surgery, and your total recovery might take 4 to 8 weeks. If you have laparoscopic surgery, you might stay only 2 nights in the hospital and recover in 2 or 3 weeks. And a shorter hospital stay generally costs less. Laparoscopic surgery has demonstrably better quality-of-life outcomes than open surgery for cholecystectomy, splenectomy, and esophageal surgery. However, open hernioplasty has at least as good, if not better, health status outcomes than laparoscopic repair.

Laparoscopic Management of Bladder Endometrioma

https://www.laparoscopyhospital.com/ An optimal treatment of bladder and urethral endometriosis should ideally involve a team of experts, ie, gynecologic endoscopists, radiologists, and urologists, who are familiar with endometriosis. Endometriosis means presence of endometrium outside the uterus. Pelvic surgeries such as caesarean section, tubal ligation, hysterotomy, laparotomy for ectopic pregnancy and hysterectomy lead to implantation of endometrium in skin, subcutaneous tissue, sheath, rectus muscles, vesicovaginal septum and in uterine scar . Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. This supports the migratory or metastatic theory of implantation of endometriosis. Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. Most commonly it affects organs such as the ovaries, uterine ligaments, fallopian tubes, rectum and the cervico-vaginal region. Involvement of the urinary tract, is seen in just about 1% cases. Bladder is involved in 84% cases. Patients underwent coagulation of the endometriotic foci over the uterovesical peritoneum.

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गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ की सारी जानकारी दी गयी है | गर्भाशय में रसौली, जिसे गर्भाशय लेयोओमामा या फाइब्रॉएड भी कहा जाता है, गर्भाशय के सौम्य चिकनी मांसपेशियों के ट्यूमर होते हैं। ज्यादातर महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता है जबकि अन्य दर्दनाक या भारी माहवारी हो सकती हैं। एक महिला में एक गर्भाशय रसौली या कई हो सकती हैं। कभी-कभी, रसौली से गर्भवती होने में मुश्किल हो सकती है, हालांकि यह असामान्य है। गर्भाशय में रसौली का सटीक कारण अस्पष्ट है। हालांकि, रसौली परिवार के एक पिडी से दुसरी पिडी में चलती हैं और आंशिक रूप से हार्मोन के स्तर से निर्धारित होती हैं। इसका निदान पैल्विक परीक्षा या चिकित्सा इमेजिंग द्वारा किया जा सकता है। यदि कोई लक्षण नहीं है तो उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। एनआईबीएड्स, जैसे कि इबुप्रोफेन, दर्द और खून बहने में मदद कर सकते हैं जबकि पेरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) दर्द से मदद कर सकता है। भारी माहवारी वाले लोगों में आयरन की खुराक की आवश्यकता हो सकती है। हार्मोन एगोनिस्ट क्लास को जारी करने वाले गोनाडोट्रॉपिन की दवाएं रसौली के आकार को कम कर सकती हैं लेकिन महंगी हैं और साइड इफेक्ट्स से जुड़ी हैं।यदि अधिक लक्षण मौजूद हैं, तो रसौली या गर्भाशय को हटाने के लिए सर्जरी मदद कर सकती है। गर्भाशय धमनी अन्त:शल्य प्रक्रिया भी मदद कर सकती हैं। रसौली के कैंसर संस्करण बहुत दुर्लभ हैं और यह लेयोमायोसारकोमा के रूप में जाना जाता है। लगभग 20% से 80% महिलाएं 50 वर्ष की आयु तक रसौली विकसित करती हैं। 2013 में, अनुमान लगाया गया था कि 171 मिलियन महिलाएं प्रभावित हुईं। रसौली आम तौर पर प्रजनन वर्षों के मध्य और बाद के दौरान पाई जाती हैं। रजोनिवृत्ति के बाद,रसौली आमतौर पर आकार में कम हो जाती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में,गर्भाशय में रसौली गर्भाशय को हटाने के लिए एक आम कारण है।

Laparoscopic Cholecystectomy made easy by Mishra's Knot

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM Extracorporeal and intracorporeal knotting in laparoscopic surgery can be used in various situations and though it can be technically demanding, it can be overcome with repeated practice. Mishra's knot is a modification of the Roeder's knot or the Meltzer's knot. In the case of a wide cystic duct, where laparoscopic clips would not occlude the full width, an extracorporeal slip knot would be appropriate. Other advantages of applying Mishra knot include less expense and eliminating the risk of catching the common bile duct with the end of the clips. In step 1, interpose the stem of instrument A above the suture to prevent ‘cheese wiring’ the cystic duct on pulling through. remember to ‘snug down’ the throws that have been previously performed. Finally, push the knot down using a knot pusher as in step 6. Do not pull up like a lasso as it would saw through and tear the tissue.

लेप्रोस्कोपी सर्जरी के बारे में सब कुछ जाने |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | लैप्रोस्कोपी एक सर्जरी प्रक्रिया है जो आम तौर पर पेट या श्रोणि के अंदर अंगों की जांच करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह छोटी चीजों (0.5-1.5 सेमी), छोटी ट्यूबों, सर्जरी उपकरणों और छोटे कैमरों की मदद से किया जाता है। यह एक जटिल सर्जरी है और बहुत कम दिन तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता पड़ती है। लैप्रोस्कोपी जीनाकोलॉजिक सर्जरी, हृदय सर्जरी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, किडनी की सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, एक या दोनों एड्रेनल ग्रंथियों को हटाने और गैल्स्टोन को हटाने के लिए किया जाता है। डॉक्टर इस प्रक्रिया के माध्यम से बायोप्सी नमूने भी ले सकते हैं। इसे पारंपरिक (खुली) सर्जरी पर तेजी से पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें बड़ी चीरे और अस्पताल में रहने का समय शामिल है।

Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse in Elderly Women

This video demonstrate Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Total Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy is performed in order to correct prolapse and/or herniation of the vagina, uterus, and bladder. In this procedure, which is done in conjunction with a laparoscopic hysterectomy, mesh is used to anchor the cervix to the anterior longitudinal ligament of sacrum, thereby lifting the vagina and bladder into their normal anatomic positions. Laparoscopic sacrocolpopexy can also be performed in women who have suffered a prolapse of the vagina and sometimes the intestines as well—a condition known as enterocele. Traditional open abdominal sacrocolpopexy has been shown to be a durable and successful method of repairing symptomatic prolapse while maintaining natural vaginal depth and length. We have now adapted the techniques utilized in open surgery to laparoscopic sacrocolpopexy. Laparoscopic surgery offers a minimally invasive approach with several technical advantages for the surgeon, including enhanced visualization with magnification, reduced blood loss, improved suturing techniques. Laparoscopic sacrocolpopexy avoids the need for a large abdominal incision, women undergoing this procedure are able to experience a less painful recovery with a significantly quicker return to normal activities than would be possible with open surgery. In this procedure, the patient is placed under general anesthesia and five small incisions are made in the lower abdomen, allowing introduction of a camera, three robotic instrument arms and one accessory port for passage of sutures and mesh materials. In cases of advanced uterine prolapse, a hysterectomy will then be performed with preservation of the cervix. Following this, a small piece of polypropylene mesh is used to anchor the cervix, vagina and bladder to the anterior longitudial ligament of sacral bone. In some cases, the uterus can be preserved and suspended in a similar manner—a procedure known as sacrohysteropexy. Finally, tissues are sewn over the mesh to form a barrier between the mesh and surrounding pelvic organs.

Laparoscopic Roeder's Knot

Although it demands an advanced set of skills that remain substantially hard to don, many of the salient steps of “open” surgery, including suturing, are credibly “replicated” in its laparoscopic counterpart with the intention of achieving similar optimal results. This video demonstrate how to tie Laparoscopic Roeder's Knot. Laparoscopic Roeder's Knot is one of the oldest knot used in laparoscopic surgery. It is used most commonly during laparoscopic appendectomy surgery. Recent literature, though abundant with numerous reports pertaining to a variety of endoscopic knotting techniques and technologies, appears to lack scientific data but Roeder's knot is a time tasted extra corporeal slip knot which is secure for 6-8 mm diameter tubular structure.

Extra Corporeal Mishra's Knot

Extra Corporeal Mishra's Knot is ideal knot for thick pedicles. We prefer to use a monofilament poly trimethylene carbonate absorbable suture for Mishra's Knot. It is very good knot for uterine vascular bundle, splenic artery, renal artery or In-mass Ligation in cholecystectomy. It combines excellent tensile strength with good handling properties. It has a good first-throw holding capacity and a smooth knot tie-down, which facilitates tissue approximation and reduces intraoperative knot repositioning, despite its relatively high memory. If a Mishra's knot has to be placed extracorporeally, we use a monofilament polypropylene or polygalactane suture as in conventional surgery. We prefer to use coated, braided polyester nonabsorbable sutures in sutured rectopexy also in Mishra's Knot.

ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें |

ओवरियन सिस्ट अंडाशय से सिस्ट (पुटी) हटाने की सर्जरी क्या है? ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें | औरतों के दो ओवरी होते हैं। जब किसी एक ओवरी में द्रव से भरी हुई थैली उत्पन्न हो जाती है उसे सिस्ट कहते हैं। माना जाता है कि ज़्यादातर महिलाओं को उनके जीवनकाल में कम से कम एक बार सिस्ट का विकास होता है। ओवेरियन सिस्ट के प्रकार 1. फॉलिकल सिस्ट 2. कार्पस लुटियम सिस्ट 3. डरमोईड सिस्ट 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम 1. फॉलिकल सिस्ट महिलाओं के मासिक चक्र के दौरान फॉलिकल थैली में एक अंडे का विकास होता है। अधिकांश मामलों में यह थैली टूट जाती है और अंडा रिलीज़ हो जाता है। जब फॉलिकल टूटता नहीं और अंडा रिलीज़ नहीं करता तब उसके अंदर का फ्लूइड सिस्ट बना देता है। आमतौर पर यह समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाता है। 2. कार्पस लुटियम सिस्ट अंडा निकलने के बाद फॉलिकल नष्ट हो जाते हैं। यदि यह फॉलिकल नष्ट नहीं होता तो इसमें अतिरिक्त द्रव इकठ्ठा हो जाता है जिसकी वजह से कार्पस लुटियम सिस्ट बनता है। 3. डरमोईड सिस्ट सिस्ट जिनमें बाल, चमड़ी या दांत जैसे टिशू होते हैं दूसरे टिशू बनाने के लिए इस तरह के टिशू का विकास असामान्य तरीके से होता है। 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट यह ओवरी के बाहरी सतह पर विकसित होता है। यह पानी या फिर म्यूकस मटेरियल से भरा हो सकता है। 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट जब कोई टिशू गर्भाशय के अंदर बनता है तो वो गर्भाशय के बाहर भी विकसित होने लगता है और अंडाशय से जुड़ा होता है जिसके कारण सिस्ट बनता है। ऐसा तब होता है जब यूटरन एंडोमेट्रियल कोशिका गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह वह स्थिति है जब दोनों ओवरी में विभिन्न छोटे सिस्ट विकसित होने लगते हैं। यह कई सारे हार्मोनल समस्याओं से जुड़ा हुआ है। क्या ओवेरियन सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर होता है? आमतौर पर ओवेरियन सिस्ट हानिकारक नहीं होता और बिना किसी इलाज के अपने आप ही खत्म हो जाता है। कई महिलाओं में सिस्ट का विकास उनके रिप्रोडक्टिव पीरियड के दौरान होता है। सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर हो भी सकता है और नहीं भी। कई सिस्ट कैंसर का रूप नहीं लेते लेकिन कुछ मामलों में ऐसा संभव है। जैसा कि सिस्ट और कैंसर के लक्षण एक जैसे ही होते हैं इसलिए इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। हालांकि कुछ जांच और परीक्षण से इसका पता लगाया जा सकता है। सही समय पर चिकित्सीय ध्यान देकर कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। ओवेरियन सिस्ट डायग्नोसिस नियमित श्रोणि के परीक्षण से ओवेरियन सिस्ट और कैंसर की संभावनाओं के बारे में पता लगाया जा सकता है। टेस्ट का प्रकार सिस्ट के साइज़ और कम्पोजीशन पर निर्भर करता है। डॉक्टर इमेजिंग टूल्स की मदद से सिस्ट का पता लगा सकते हैं जिसमें सी टी स्कैन: आंतरिक ऑर्गन्स के क्रॉस सेक्शनल इमेज बनाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है ताकि सिस्ट का पता लगाया जा सके। एमआरआई: इसका प्रयोग आंतरिक अंगों की गहरी छवि के लिए किया जाता है ताकि सिस्ट का इलाज हो सके। अल्ट्रासाउंड टेस्ट (अल्ट्रासोनोग्राफी): इसका प्रयोग सिस्ट के साइज़, शेप, लोकेशन और कम्पोजीशन को जानने के लिए किया जाता है।

Laparoscopic orchiectomy combined with hernia repair

This video demonstrate Laparoscopic treatment for inguinal hernia combined with cryptorchidism management by Trans Abdominal Preperitoneal repair of hernia in a patient with undescended testes with hernia. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view. Approximately 7% of child patients with inguinal hernias also present with cryptorchidism. On the other hand, combined adult cases are uncommon. Here we report two adult cases of inguinal hernia combined with intra-canalicular cryptorchidism who underwent TAPP repair with orchiodectomy under the same operative view. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view could be safely performed in adults with an inguinal hernia combined with extra-abdominal cryptorchidism. This procedure could be an option for the treatment of such adult patients. Cryptorchidism is a condition in which one or both testes fail to descend into the scrotum before birth. The frequency of undescended testes has been reported as 4.1–6.9% during the neonatal period, 1.0–1.6% by 3 months of age, 1.0–1.7% by 1 year of age, and less than 1.0% after 1 year of age. Orchiectomy is also recommended for adult cases because adult patients with cryptorchidism already lack spermatogenic function and have a risk of neoplasms. https://www.laparoscopyhospital.com/laparoscopic-urology.html

Laparoscopic Management of Bladder Endometrioma

https://www.laparoscopyhospital.com/ An optimal treatment of bladder and urethral endometriosis should ideally involve a team of experts, ie, gynecologic endoscopists, radiologists, and urologists, who are familiar with endometriosis. Endometriosis means presence of endometrium outside the uterus. Pelvic surgeries such as caesarean section, tubal ligation, hysterotomy, laparotomy for ectopic pregnancy and hysterectomy lead to implantation of endometrium in skin, subcutaneous tissue, sheath, rectus muscles, vesicovaginal septum and in uterine scar . Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. This supports the migratory or metastatic theory of implantation of endometriosis. Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. Most commonly it affects organs such as the ovaries, uterine ligaments, fallopian tubes, rectum and the cervico-vaginal region. Involvement of the urinary tract, is seen in just about 1% cases. Bladder is involved in 84% cases. Patients underwent coagulation of the endometriotic foci over the uterovesical peritoneum.

Extra-peritoneal Hernia Surgery

This video demonstrate Totally Extra-peritoneal Hernia Surgery (TEP). A hernia is repaired generally using a synthetic mesh either with open surgery or increasingly using less invasive laparoscopic procedures. The most common laparoscopic techniques for inguinal hernia repair are transabdominal preperitoneal (TAPP) repair and totally extraperitoneal (TEP) repair.

Laparoscopic Nephrectomy

This video demonstrate details of Laparoscopic Nephrectomy. Laparoscopic Nephrectomy provides patients with a safe and effective way to remove a diseased or cancerous kidney. Laparoscopic nephrectomy is a minimally invasive technique, which provides patients with less discomfort and equivalent results when compared to the larger incision required with traditional open surgery. When compared to conventional open surgery, laparoscopic nephrectomy has resulted in significantly less post-operative pain, a shorter hospital stay, earlier return to work and daily activities, a more favorable cosmetic result and outcomes identical to that of open surgery.

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) |

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) | हिस्टेरेक्टॉमी एक शल्यक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी महिला के गर्भाशय को निकाला जाता है। गर्भाशय महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का एक अंग है तथा यह मनुष्य की बंद मुट्ठी के आकार का होता है। आपका गर्भाशय निकाले जाने के बाद आप संतान पैदा नहीं कर सकती, तथा इसके बाद आपको मासिक धर्म भी नहीं होगा। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) नहीं निकाले गए हैं, तो आप मादा हार्मोन पैदा करती रहेंगी। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) निकाले गए हैं, तो मासिक धर्म रुक जाएगा। हिस्टेरेक्टॉमी शल्य क्रिया की कई किस्में हैं। अपने चिकित्सक से पूछें कि आप किस प्रकार की शल्य क्रिया करा रहीं हैं तथा क्या आपकी गर्भग्रीवा (सर्विक्स), डिंबवाही नलियां तथा अंडाशय भी हटाए जा रहे हैं। • योनीय (वेजाइनल) हिस्टेरेक्टॉमी - गर्भाशय को योनि मार्ग से हटाया जाता है, तथा पेट में कोई चीरफाड़ नहीं होती। • उदरीय (एब्डॉमिनल) हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में चीरा लगाकर, गर्भाशय को निकाला जाता है। • लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में कई छोटे सुराख किए जाते हैं और डॉक्टर इन छोटे सुराखों के माध्यम से लेप्रोस्कोप का प्रयोग करते हुए काम करता है। यह यंत्र डॉक्टर को शल्य क्रिया के दौरान छोटे स्थानों को देख पाना आसान बनाता है। अन्य छोटे यंत्र गर्भाशय को अलग करने और निकालने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी - यह लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी से बहुत मिलती जुलती है। यंत्र अधिक लचीले होते हैं और डॉक्टर द्वारा शल्य क्रिया के दौरान यंत्र की सहायता करने के लिए विशेष कैमरे का उपयोग किया जाता है।

रोबाटिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी प्राप्त करें |

चिकित्सा क्षेत्र में आ रहे तकनीकी बदलावों के बीच रोबोटिक सर्जरी अब अपने देश में भी होने लगी है. रोबोटिक सर्जरी में विशेषज्ञता प्राप्त सर्जन मुश्किल सर्जरी के लिए रोबोट का इस्तेमाल कर रहे हैं. रोबोट की मदद से सर्जन बेहद सटीकता व निपुणता के साथ सर्जरी को सफलतापूर्वक कर पा रहे हैं | उन्होंने कहा, मरीज भी रोबाटिक सर्जरी के बाद जल्दी ठीक होता है क्योंकि इसमें छोटा चीरा लगाया जाता है, जिसके कारण खून बहने की संभावना कम होती है. मरीज को खून चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती. मरीज को रोबाटिक सर्जरी के बाद अस्पताल में कम समय के लिए रुकना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च भी कम हो जाता है. कॉस्मेसिस इसका एक और फायदा है जिसके चलते आज बड़ी संख्या में मरीज रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुन रहे हैं.

Learn Steps of Total Laparoscopic Hysterectomy in 15 Minutes with Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html Vaginal and laparoscopic hysterectomies have been clearly associated with decreased blood loss, shorter hospital stay, speedier return to normal activities, and fewer abdominal wall infections when compared with abdominal hysterectomies. In this video Dr R K Mishra has outlined the steps to a successful Total laparoscopic hysterectomy. Due to a wide variety in anatomy and in the course of the uterine vessels, we find it helpful to initially skeletonize them with the Harmonic scalpel and uterine artery with ligasure. Total laparoscopic hysterectomy is a safe and effective procedure for women needing a hysterectomy. We enjoy a high operative volume and perform approximately 200 laparoscopic hysterectomy cases annually. The steps described herein are not meant to be an absolute truth, but rather a true and tested method that has served us well to safely accomplish this procedure.

कैंसर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

कैंसर क्या है? कैंसर एक किस्म की बीमारी नहीं होती, बल्कि यह कई रूप में होता है। कैंसर के 100 से अधिक प्रकार होते हैं। अधिकतर कैंसरों के नाम उस अंग या कोशिकाओं के नाम पर रखे जाते हैं जिनमें वे शुरू होते हैं- उदाहरण के लिए, बृहदान्त्र में शुरू होने वाला कैंसर पेट का कैंसर कहा जाता है, कैंसर जो कि त्वचा की बेसल कोशिकाओं में शुरू होता है बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है। ओवेरियन कैंसर : 10% ओवरी के ट्यूमर कैंसरस हो सकते हैं. इस उम्र में अधिकतर कैंसर जर्म सेल ट्यूमर होते हैं जैसे-डिसजर्मिनोमा, योक सैक ट्यूमर आदि. ये ठोस होते हैं और बढ़ कर 10-15 सेमी हो जाते हैं. इनका पता पेट दर्द से चलता है. यह प्राय: एक ओर होता है तथा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाला जा सकता है. शुरू में इलाज हो जाये, तो यह ठीक हो सकता है. इलाज से दूसरे तरफ की ओवरी बचा ली जाती है, जिससे प्रजनन संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं | लेप्रोस्कोपी सर्जरी में पेट में तीन छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं, जो एक मिलीमीटर से लेकर एक सेंटीमीटर के हो सकते हैं। इस की-होल शल्य चिकित्सा के उपयोग से मरीज को दर्द कम होता है। कैंसर शब्द ऐसे रोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के विभाजित होती हैं और वे अन्य ऊतकों पर आक्रमण करने में सक्षम होती हैं। कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं। कैंसर के कुछ लक्षण - स्तन या शरीर के किसी अन्य भाग में कड़ापन या गांठ। - एक नया तिल या मौजूदा तिल में परिवर्तन। - कोई ख़राश जो ठीक नहीं हो पाती। - स्वर बैठना या खाँसी ना हटना। - आंत्र या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन। - खाने के बाद असुविधा महसूस करना। - निगलने के समय कठिनाई होना। - वजन में बिना किसी कारण के वृद्धि या कमी। - असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज। - कमजोर लगना या बहुत थकावट महसूस करना।

Errors in laparoscopic surgery

Laparoscopic surgery is the most significant advancement in the field of surgery over the past 25 years. This minimal access approach has been widely embraced and adopted to many common operations. Demonstrated benefits include decreased post-operative pain, shorter lengths of in-patient hospitalization, increased patient acceptance, and a more rapid return to gainful employment. With its ever-growing popularity, it has become fertile ground for civil litigation, ranking along with birth injuries and failure to diagnose cancer. A brief synopsis of the history of its evolution is presented along with general and specific comments concerning potential errors as they relate to specific common operations which are commonly done utilizing this technique. This video lecture demonstrate how to avoid mistakes in Minimal Access Surgery. https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic Weston Knot

Nowadays, the acquisition of safe, effective yet rapid and minimally invasive suturing skills has become not only desirable but also an essential part of any laparoscopic intervention. Laparoscopic Weston Knot was initially started by arthroscopic surgeons but now widely used in laparoscopic general surgery or gynecology. Although there remains a substantial body of literature focusing mainly on varied minimal access knotting techniques, there seem to be scarcely any contributions devoted specifically to the crux of its successful execution—the precise intracorporeal needle loading methodology that eventually translates into easy and secure tissue approximation.

Laparoscopic Cervical Cerclage

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM This video demonstrate laparoscopic cervical cerclage performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Laparoscopic Cervical cerclage, also known as a cervical stitch, is a treatment for cervical incompetence or insufficiency, when the cervix starts to shorten and open too early during a pregnancy causing either a late miscarriage or preterm birth in second trimester. As a general rule, laparoscopic cervical cerclages work best when they are placed early in pregnancy and when the cervix is longer and thicker. Rates for carrying the pregnancy to term after cerclage vary from 85 to 90 percent, depending on the type of cerclage used.

Extra Corporeal Meltzer's Knot

Extra Corporeal Meltzer's Knot is a modification of roeder's knot. Roeder's knot is 1:3:1 and Melzer's knot is 2:3:2. In this knot 2 hitches three wind and two lock is present. Therefore, Melzer knot is a geometrical modified roeder's knot which was made of all modifications and all data on knot security and loop security of the knot were analyzed. The introduction of the original knot and its applicable modifications paralleled the increase in minimally invasive techniques and the spread of these techniques in all the medical specialties. Roeder loop security depends predominantly on the number of initial turns around the standing part. Its knot security depends on the additional half hitches used to backup the knot after it has been tightened. Only a few of the modifications improved the security of the knot or its previous modifications and one of that is Meltzer's knot.

Extra Corporeal Roeder's Knot

The first laparoscopic sliding knot to be described was the Roeder knot; it has been used for a variety of procedures in all surgical disciplines. It was surmised that the introduction of new modifications in the geometry of the knot paralleled the introduction of its new indications, and that not all modifications improved its security of roeder's knot but still it is most popular extracorporeal knot in laparoscopic surgery. The lack of direct manual contact, for which palpation with current laparoscopic instruments cannot completely compensate is atracting surgeon to use extracorporeal knot in laparoscopic surgery. Roeder's knot is one of the oldest extracorporeal knot which was first time used for appendectomy. The limited movement of laparoscopic instruments that are inserted through a cannula anchored to the abdominal wall. The working field is a cone with a fixed point at the insertion point of the cannula. Because of the limited field of movement of laparoscopic instruments, proper placement of the cannula is critical to tie an entracorporeal knot. In these situation extracorporeal roaders knot is a good alternative.. The lack of normal binocular vision without true depth perception, which makes conventional techniques difficult to apply make these knots easier. Roeder's knot can be safely used to ligate any tubular structure upto 6-8mm in diameter.

Laparoscopic Surgery for Ovarian Cyst Diseases

This video demonstrate laparoscopic surgery for various ovarian diseases. Ovarian cyst removal is surgery to remove a cyst or cysts from 1 or both of ovaries. A laparoscopic surgery uses small incisions and specialized tools. It may offer faster recovery times than open surgery , which uses a larger abdominal incision. Most cysts can be removed using laparoscopy. This is a type of keyhole surgery where small cuts are made in your tummy and gas is blown into the pelvis to allow the surgeon to access your ovaries. A laparoscope is passed into abdomen so the surgeon can see your internal organs. The surgeon then removes the cyst through the small cuts in skin. After the cyst has been removed, the cuts will be closed using dissolvable stitches. A laparoscopy is preferred because it causes less pain and has a quicker recovery time. Most women are able to go home on the same day or the following day. For detail go to https://www.laparoscopyhospital.com/

Tips and Tricks for Hysterectomy

This video demonstrate Tips and Tricks of performing Laparoscopic Hysterectomy. Hysterectomy stills represents the most common gynecological surgery. However, despite the development of laparoscopy, only 12% of hysterectomies are performed by laparoscopy. In this lecture, some tips and tricks for the different key steps of hysterectomy are explained to simplify this surgery, make it faster and also reproducible. https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM

Why Laparoscopic Surgery is Better ?

The purported advantages of laparoscopic surgery over conventional open techniques are less pain and faster return to normal functional status. Very few studies have included validated measures of quality of life as end points. This lecture of Dr R K Mishra assessed the health status outcomes of patients.. Here’s an example. With traditional methods, you might spend a week or more in the hospital for intestinal surgery, and your total recovery might take 4 to 8 weeks. If you have laparoscopic surgery, you might stay only 2 nights in the hospital and recover in 2 or 3 weeks. And a shorter hospital stay generally costs less. Laparoscopic surgery has demonstrably better quality-of-life outcomes than open surgery for cholecystectomy, splenectomy, and esophageal surgery. However, open hernioplasty has at least as good, if not better, health status outcomes than laparoscopic repair.

Laparoscopic Cervical Cerclage for cervical incompetence or insufficiency

When a woman’s cervix is weak (sometimes called an incompetent cervix) she is more likely to have a baby born prematurely because the cervix shortens or opens too early. In order to prevent premature labor, a woman’s doctor may recommend a cervical cerclage. A cerclage is used to prevent these early changes in a woman’s cervix, thus preventing premature labor. A closed cervix helps a developing baby stay inside the uterus until the mother reaches 37-38 weeks of pregnancy. Treatment for cervical incompetence is a surgical procedure called cervical cerclage, in which the cervix is sewn closed during pregnancy. The cervix is the lowest part of the uterus and extends into the vagina. For more information https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic Repair of Incisional Hernia by Two Ports

Various ventral and incisional hernia repair techniques exist and have largely replaced the open ones. The purpose of this video is to show the 2-port technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Laparoscopic herniorrhaphy with the 2-port technique offers an efficient, safe, and effective repair for ventral and incisional hernias. We at Worls Laparoscopy Hospital started performing all the ventral hernia by two port in year 2002. Access to the abdomen and creation of pneumoperitoneum is obtained by placing a Veress needle in the left upper quadrant. One 10-mm to 12-mm balloon port and one 5-mm straight port are placed opposite the hernia as laterally as possible, preferably on the left side. The surgeon's nondominant hand compresses the abdominal wall to bring it down to the scissors tip or Harmonic scalpel for dissection or adhesiolysis. The hernia sac content is then reduced, and the margins of the hernia defect cleared circumferentially to a distance of at least 6 cm.

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | |

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | | पित्ताशय में पथरी के कारण (Causes of gall bladder stone) पित्ताशय में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता हैं। कुछ फ़ैक्टर हैं जो गॉलस्टोन्स (gallstones) की संभावना को बढ़ा सकता है जैसे की – मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes) मोटापा (Obesity) गर्भधारण (Pregnancy) मोटापे की सर्जरी के बाद (post bariatric surgery) कुछ दवाओं का सेवन कुछ लम्बी अवधि की बीमारीयों के बाद “गॉलस्टोन्स की सम्भावना मोटापे और डायबिटीज से बढ़ती है” डॉ अमरचंद सूचित करते हैं। “ज़्यादातर पित्त की थैली में पथरी औरतों में पाई जाती है” “ऐसा होने का कारण अभी तक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ हैं।” गॉलस्टोन्स के लक्षण (Signs and symptoms of gallstones) कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी होती है। पित्त की थैली में पथरी के दिखाई देनें वाले कुछ खास लक्षण हैं (signs and symptoms of gallstones): पेट के उपरी भाग और दाहिने तरफ़ में दर्द बदहजमी खट्टापन पेट फुलाना अगर पित्त की थैली में पथरी होने की वजह से आपको पेट दर्द हो रहा है तो इसका ईलाज करना ज़रूरी है।नहीं तो यह पथरी आगे जाके दिक़्क़त का कारण बन सकती हैं।” अगर गॉल्स्टोन 3 cm से बड़ा है या फिर अगर गॉलब्लेडर पोलिप (gallbladder polyp) के साथ है जो 1 cm या उससे बड़ा है, तो गॉलब्लेडर कैंसर (gallbladder cancer) की संभावना भी बढ़ जाती हैं। लैप्रोस्कोपी अर्थात दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं जबकि चीरा विधि की अपेक्षा दूरबीन विधि में मरीज को ज्यादा लंबे समय तक हॉस्पिटल में भर्ती नहीं रहना पड़ता। इसके साथ ही पेट पर एक या चार छेद कर हार्निया, एपेंडिक्स, ट्यूमर व पथरी का सफल ऑपरेशन किया जा सकता है। इसमें समय कम लगता है और खून की भी जरूरत न के बराबर होती है। दूरबीन विधि का एक अन्य लाभ यह है कि इसमें पेट में चीरा व टांके नहीं लगते और सिर्फ एक छेद नाभि में होने से पेट कटने के कोई निशान भी नहीं आते।

Laparoscopic Management of Ectopic Pregnancies Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ This Video Lecture of Dr R K Mishra is to compare the laparoscopic approach with laparotomy in the treatment of ectopic pregnancy. The aim of this lecture was to evaluate the safety and efficacy of laparoscopic surgery for ectopic pregnancies. In the laparoscopic group, the postoperative morbidity and post-hospital stay were significantly less. Although laparoscopic surgery for ectopic pregnancies is a new approach and it is not widely practised in service hospitals, it has more advantages than open surgery and it has been well accepted by the surgeons and patients. It is a safe and feasible approach.

Laparoscopic Cholecystectomy for 5 Year Old Child

https://www.laparoscopyhospital.com/ This video demonstrate laparoscopic cholecystectomy in a five year old girl. Gallstone disease has been considered an uncommon entity in children and infants, but its incidence is reportedly increasing which may be attributed to widespread use of diagnostic imaging (ultrasonography). An apparently healthy 5 year old female child presented to our Outpatient department with chief complaint of recurrent abdominal pain. The episodes of pain were acute in onset and associated with vomiting. As per the complete examination and findings, a diagnosis of chronic calculous cholecystitis was made. A four port laparoscopic cholecystectomy was done. The incidence of gallstones in children in India has not been sufficiently studied. The incidence of gallstone disease in India was found to be 0.3% with the incidence in age group 0–10 being less than 0.1%. In contrast to adult gallstone disease, it has been found that there is no female preponderance in gallstone diseases of infancy. Also, the majority of children having increased haemoglobin turnover develop pigment stones only after 5 years of age. The probability of gallstone disease in infants and young children should not be ignored. Gall stones should always be considered as a differential diagnosis when young patients present with complaints of abdominal pain.

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus

This video demonstrate Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus. Despite the increased operation time and blood loss, laparoscopic myomectomy can be safely performed in the treatment of large uterine fibroid. However, high risk of blood transfusion in these patients has to be kept in mind. With laparoscopic approach, there is minimal tissue handling which reduces risk of adhesions. Saline irrigation is also constantly in use which prevents drying of tissues and blood clots from sticking to the tissues. Meticulous control of bleeding also is essential. Finally, adhesion prevention barrier such as Adept solution or Interceed is used at the end of the procedure.

Laparoscopic Myomectomy Step by Step Video

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html This video demonstrate all the steps of laparoscopic myomectomy. Surgeons who have the experience and skill and know the size, number, and position of fibroids are able to select the appropriate candidates for laparoscopic myomectomy. Authors of a study of 2,050 laparoscopic myomectomies found that fibroids larger than 5 cm, removal of more than 3 fibroids, and broad ligament fibroids were more likely to be associated with major complications, including visceral injury, conversion to laparotomy, and bleeding requiring blood transfusion. For all women considering laparoscopic or robot-assisted myomectomy, Surgeon should order pelvic MRI with and without contrast. Having the radiologist limit the number of MRI sequences may reduce the cost and make it comparable to that of other imaging modalities. Fibroids may affect quality of life—they may cause heavy menstrual bleeding, pelvic pain or pressure, or urinary frequency or incontinence. For many women who want large or numerous fibroids removed but the uterus preserved, abdominal myomectomy is required. Smaller and less numerous fibroids usually can be managed laparoscopically or with robotic assistance.

MGB - An Effective Bariatric Surgery

The Mini-Gastric Bypass MGB is an excellent choice for bariatric surgery. All over world bariatric surgeons generally provides the MGB with strongly positive reviews. This international group of bariatric experts from 6 continents and 23 countries judged the MGB as a short simple effective durable bariatric procedure. In most questions the MGB was judged significantly better than similar assessments of the Band, Sleeve and the RNY. This video demonstration suggests that there is a deep reservoir of knowledge and experience that has here to fore been untapped that may assist surgeons and their patients in making good decisions about weight loss surgery. This surgery was developed by considering its less operating time and simplicity. Mini gastric bypass reduces stomach size and reroutes intestines because of which patient feels full even with small meals, absorbs less calories, lose ¾ of weight in 2 years, improves health. As compared to gastric bypass, mini gastric bypass involves low complications and minimum size effects. Mini Gastric Bypas Surgery in Qatar,Oman Because of its simplicity mini gastric bypass can minimize the chances of post-surgical complications. Patient can live a healthy lifestyle after surgery with sustained weight loss. Mini-gastric bypass is a good option to reduce unhealthy weight and is enjoying high success rate. It is true that MGB can help in weight loss, but it totally depends on patients’ ability to maintain healthy lifestyle followed by regular exercise and diet.

Extra Corporeal Dundee Jamming Knot

The ability to suture in laparoscopic surgery is necessary less frequently than in conventional surgery, yet this ability is essential in certain critical situations, such as providing tissue support, maintaining tissue closure, and in creating certain surgical anastomoses. Although the principles of suturing and tying knots in endoscopic surgery are identical to those in conventional surgery, major modifications in technique are necessary as a result Extra Corporeal Dundee Jamming Knot is very useful. It can be prepared outside and then it can be introduced inside the abdomen to use as continuous suturing. The termination of this knot is by Aberdeen termination.

Laparoscopic Mishra's Knot

This video demonstrate how to tie extracorporeal Mishra's knot. Nowadays, laparoscopy has become an indispensable component of surgical training across the globe. Many complicated procedures are quite regularly performed by minimally invasive approaches. As such, acquiring proficiency in endoscopic suturing has virtually turned an obligatory prerequisite into safe execution of not only advanced but also basic laparoscopic. However, intracorporeal suturing is remarkably difficult to learn and at times quite frustrating and time-consuming. To attain that required dexterity, a needle-to driver shaft angle is generally recommended].However, as per the persistent observations made and experience gained by us over the last two decades, such a right angled grip is arguably supportive only in the most favorable circumstances wherein the tissue to be sutured lies on the “floor” of the monitor, is co-axially aligned with the needle holder, and is easily accessible; thus can it finally tied the knot. Etracorporeal knot does not has these problems. Extracorporeal surgeons knot is used widely to ligated big vessels like splenic artery, renal artery and vein. Uterine artery and partial cholecystectomy. Configuration of this knot is 1:1:1:1:1:1:1.

IPOM Umbilical Hernia Repair by VIPRO II Mesh

Laparoscopic umbilical hernia repair has largely replaced open method. The purpose of this video is to demonstrate the laparoscopic umbilical hernia repair using two port with intraabdominal VIPRO II mesh fixation with transabdominal absorbable suture technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Methods. Two-port technique was used and the umbilical defect was closed using transabdominal VIPRO II mesh was placed intra-bdominally and fixed to abdominal wall using transabdominal suture. Results. Laparoscopic umbilical hernia repair with intraabdominal mesh fixation using absorbable sutures offers an efficient, safe, and effective repair for umbilical hernia.

Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM This video demonstration is Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture by Dr. R. K. Mishra at World Laparoscopy Hospital. A major benefit of the laparoscopic technique is for patients who present with bilateral inguinal hernias and recurrent hernia. Laparoscopy allows for both hernias to be repaired in a single operation without need for additional ports or incisions. As a result, recovery time is similar to unilateral laparoscopic hernia repair.

अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | क्‍या है अपेंडिक्‍स? अपेंडिक्स छोटी और बड़ी आंतों के बीच की कड़ी है, जो शहतूत के आकार की होती है। यह आंतों से बाहर की ओर निकली रहती है। पहले इसकी उपयोगियता या अनुपयोगियता के बारे में जानकारी नहीं थी। अक्सर चिकित्सक पेट दर्द होने पर अपेंडिक्स को हटा देने में ही भलाई समझते थे, इससे मरीजो को कोई समस्या नहीं आती है। फिर भी पूरी तरह परीक्षण किए बगैर मामूली से या अन्य किसी कारण से होने वाले पेटदर्द के निदान के लिए इस अवशेषी अंग को निकाल फेंकना गलत है। अपेंडिक्‍स के कारण अपेंडिक्‍स के कारणों में लम्बे समय तक कब्ज का रहना, पेट में पलने वाला परजीवी व आंतों के रोग इत्यादि से अपेंडिक्स की नाली में रुकावट आ जाती है। ऐसे भोजन का सेवन करना जिसमें फाइबर बहुत ही कम या बिल्कुल न हो, भी इस समस्या को निमंत्रण दे सकता है। जब यह अपेंडिक्स में लगातार रुकावट की स्थिति बनी रहे तो सूजन और संक्रमण के बाद यह फटने की स्थिति में हो जाती है। फटने पर यह पेट और रक्‍त में संक्रमण फैला सकता है। फिर तो यह बहुत ही भयावह हो सकता है।

Bilateral Dermoid Cyst

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM The challenging aspect of this case was that the patient was a 19-year-old unmarried woman with bilateral mature cystic teratoma of the ovary. The whole of the left ovary was involved in the dermoid cyst without any normal ovarian tissue. An Ovarian dermoid cyst is a saclike growth that is present at birth. It contains structures such as hair, fluid, teeth, or skin glands that can be found on or in the skin. Dermoid cysts grow slowly and are not tender unless ruptured. They usually occur on the face, inside the skull, on the lower back, and in the ovaries. Superficial dermoid cysts on the face usually can be removed without complications. Removal of other, more rare dermoid cysts requires special laparoscopic techniques and training.

Laparoscopic Instrument Demonstration - Trocars and other Hand Instruments

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM Demonstration of laparoscopic instrument design of Hand Instruments. Laparoscopic Instruments like Laparoscopy Veress Needle, Laparoscopic Hand Instruments also known as laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, monopolar hand instruments, laparoscopic atraumatic grasper, Laparoscopic Forceps, Laparoscopic Hand Instruments available in different types like Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Long Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Kelly Dissecting and Grasping Forceps, Mixter/ Right angled Dissecting & Grasping Forceps, Fenestrated Grasping Forceps, Babcock Grasping Forceps, Universal/ Maxi Grip Grasping Forceps, Strong Atraumatic Grasping Forceps, Allis Grasping Forceps , Tooth Grasping Forceps, Endoclinch Grasping Forceps, Bowel Grasping Forceps, Crocie-Olmi type Grasping Forceps, Grasping Forceps, Claw Forceps, Spoon Forceps, Metzenbaum Curved Scissor, Hook Scissors and Micro Scissor. Laparoscopic Trocar, Laparoscopic Hand Instruments, laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, Laparoscopic Clip Applicator, Laparoscopic Needle Holder, Laparoscopic Suction Irrigation SET, Laparoscopic Bipolar Instruments, Laparoscopic Electrodes, Laparoscopic Fan Retractor, Port Closure, Laparoscopic Aspiration Needle, Laparoscopic Knot Pusher, Laparoscopic Cable .

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Myoma

This video demonstrate laparoscopic myomectomy for large intramural myoma. Laparoscopic myomectomy using pneumoperitoneum for large intramural myomas is considered a difficult and time-consuming procedure, requiring great skill to move a large uterus; to locate, grasp, enucleate, and remove a bulky myoma from the abdominal cavity; to achieve adequate hemostasis; and to repair the muscle layer. Laparoscopic myomectomy allows your surgeon to remove your fibroids through several small incisions. This may be done robotically. It's less invasive and recovery is faster than with abdominal myomectomy. Laparoscopic myomectomy (LM) currently brings more attention because of increased demands on uterine conservation and less invasive management of myomas. The advantages of Laparoscopic Myomectomy are shorter hospitalization, faster recovery, fewer adhesions, and less blood loss. In spite of the increasing improvements in laparoscopic instruments and techniques, advanced laparoscopic technical skills are required to perform Laparoscopic Myomectomy with success. Technical problems inherent to the removal of large uterine myomas include hemostasis, uterine closure, and removal of the uterine tissue.

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery. Recently major developments in video imaging have been achieved: among these, the use of high definition and 3D imaging systems, and more recently indocyanine green (ICG) fluorescence imaging are emerging as major contributions to intraoperative decision making during surgical procedures. Many Infrared systems are developed to determine the potential role of infrared imaging as a tool for localizing anatomic structures and assessing tissue viability during laparoscopic surgical procedures. A camera system sensitive to emitted energy in the midinfrared range (3-5 micron) is incorporated into a two-channel visible laparoscope. Laparoscopic cholecystectomy, dissection of the ureter, and assessment of bowel perfusion were performed in a porcine model with the aid of this infrared imaging system. The ICG fluorescence imaging system seems to be simple, safe, and useful. The technique may well become a standard in the near future in view of its different diagnostic and oncological capabilities.

Standard Laparoscopic Cholecystectomy

This video describes a standard approach for laparoscopic cholecystectomies with ideal anatomy. In laparoscopic cholecystectomy, the safest and best approach to identify the structures of the Triangle of Calot is to achieve the Critical View of Safety (CVS). The Triangle of Calot is also known as the cystohepatic triangle. It is bounded by the inferior surface of the liver, the cystic duct, and the common hepatic duct. To achieve CVS, the Triangle of Calot must be clearly dissected, the lowest part of the gallbladder must be separated from the cystic plate, and only two structures should be seeing entering the gallbladder - the cystic artery and the cystic plate.

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | महिलाओं में बांझपन के लक्षण इस वीडियो मे बांझपन का लेप्रोस्कोपी से इलाज एवं लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | महिलाओं में बांझपन के लक्षण मासिकधर्म प्रारंभ होने के साथ ही दिखने लगते हैं. इन में से कईर् लक्षण ऐसे होते हैं, जिन्हें तुरंत पहचान कर उन का उपचार करा लिया जाए तो बहुत संभव है कि भविष्य में होने वाली बांझपन की आशंका से बचा जाए. अनियमित मासिकधर्म महिलाओं में मासिकधर्म की अनियमितता बांझपन का सब से प्रमुख कारण है. कईर् महिलाओं में संतुलित व पोषक भोजन के सेवन और नियमित ऐक्सरसाइज के द्वारा यह समस्या दूर हो जाती है, लेकिन कई महिलाओं को उपचार की आवश्यकता पड़ती है. मासिकचक्र से संबंधित निम्न अनियमितताएं हो सकती हैं: – 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना. – पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना. – 2 पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं. – 3 मासिकचक्र में पीरियड्स न आना. – पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना. – मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना. मासिकधर्म न आना कई महिलाओं में कभीकभी मासिकधर्म आता ही नहीं. इस का कारण अंडाशय या गर्भाशय की अनुपस्थिति होती है. यह समस्या जन्मजात हाती है, लेकिन इस के बारे में पता यौवनावस्था प्रारंभ होने पर लगता है. ऐसी महिलाएं कभी मां नहीं बन पाती हैं. हारमोन असंतुलन कभीकभी महिलाओं में बांझपन हारमोन समस्याओं से भी संबंधित होता है. इस मामले में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं: – त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है. – सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना. – होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास. – बालों का झड़ना या पतला होना. – वजन बढ़ना. – निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है. – सैक्स के दौरान दर्द होना. – असामान्य मासिकचक्र.

मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे | मोटापे के कारण | मोटापे के कई कारण हो सकते है। इनमें से प्रमुख है:- मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना, ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा के उपयोग के बीच असंतुलन के कारण होता है। मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना भी मोटापे का कारण है। कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन मोटापे का प्रमुख कारण है। असंतुलित व्यवहार औऱ मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापे का कारण बनता है। शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है। बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा व्यस्क होने पर भी रह सकता है। हाइपोथाइरॉयडिज़्म (अवटु अल्पक्रियता) | स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी और ऐसी ही दूसरी बैरियाट्रिक सर्जरी में पेट के आकार को ऑपरेशन के जरिए छोटा किया जाता है. इससे भूख जगाने वाले हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है जिससे वजन कम होने लगता है. ओबेसिटी ऐंड मेटाबॉलिक सर्जरी सोसायटी ऑफ इंडिया का अनुमान है कि देश में हर साल 12 से 15 हजार बैरियाट्रिक सर्जरी की जाती हैं. इनमें से एक बड़ी तादाद विदेशी मरीजों की भी होती है.

Laparoscopic Tayside Knot

Tayside knot is a good laparoscopic knot which is used by laparoscopic surgeons to ligate tubular structures using multifilament suture material. practice of this not is necessary. In this video the Tayside knots correct configuration and method of tying this knot has been demonstrated. After experience of 20 years of teaching laparoscopic surgery we conclude that the acquisition of laparoscopic incorporeal suturing and knot tying technique is dependent on practice rather than whether the surgeon is in training or not.

Extra Corporeal Weston Knot

In Laparoscopic Surgery there is no ideal suture available that combines easy handling, ability to form secure knots for all situations, easy sterilization, and low cost. Thus, the surgeon has to choose which suture is appropriate for each purpose, which means deciding between monofilamentous or multifilamentous (twisted or braided) and absorbable (polyglycolic acid, polyglactin, polydioxanone, or polytrimethylene carbonate) or nonabsorbable sutures (silk, nylon, polypropylene, braided polyester). Weston knot is very good knot which can be used as extracorporeal locked knot without a knot pusher. In general, superior tensile strength and knot security reduce the risk of breakage and allow the use of finer sutures with Weston Knot. These properties also minimize tissue reaction and expedite laparoscopic procedures.

Laparoscopic Mini Gastric Bypass Step by Step Demonstration by Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ Laparoscopic Mini Gastric Bypass (MGB) is one of the most commonly performed bariatric surgery and slowly getting popular all over world as obesity surgery. This video demonstrate step by step technique of performing mini gastric bypass surgery by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital for a female suffering from Morbid Obesity. Mini Gastric Bypass has Restrictive, Malabsorptive and Hormonal component. Restrictive: A small stomach pouch is created restricting the amount of food you can eat. Malabsorptive: A portion of the small intestine is bypassed. Since the small intestine is responsible for absorbing the calories from the food you eat, bypassing a portion of the small intestine results in fewer calories being absorbed, thus creating additional weight loss. Hormonal: The hormone ghrelin has been nicknamed the “Hunger Hormone” by researchers because of its significant effect on appetite. Gastric Bypass results in a fall in ghrelin levels resulting in a reduced appetite.

Laparoscopic Dundee Jamming Knot

Acquiring the skills of laparoscopic suturing and knotting techniques can be considered a prerequisite to learn advanced laparoscopic procedures for laparoscopic surgeon and gynecologist. Despite the concept that developing such suturing skills should be reserved for the younger generation of laparoscopic surgeons due to the high level of difficulty in manual laparoscopic skills involved. Dundee Jamming knot is very good starter knot which is prepared outside the abdomen and then dropped inside the abdomen through one of the port to tie intracorporeal continuous suturing.

Laparoscopic Management of Retrocecal Subserous Ruptured Appendix

This video demonstrate Retrocecal Subserous ruptured appendix surgery performed by Laparoscopy. Although there are several factors that can contribute to this rare pathology, the main cause of neglected medical management of appendicitis is the persistence of a large appendicular lump. CT and US are very useful diagnosis tools. Treatment consists to a careful appendectomy of the subserous part of appendix which can be carried out by laparoscopic approach. In this rare pathology a prior history of appendectomy can delay the diagnosis and increase its associated morbidity and even mortality. https://www.laparoscopyhospital.com/international-patients.html

Extra Corporeal Tayside Knot

The surgeon's preference usually determines which suture knot he want to use in conventional surgery. The choice may be somewhat restricted in laparoscopic surgery because access to the target tissue and techniques for suturing and tying the knot may be limited. For extracorporeal knots (slip or square knots), a suture material that slides easily (such as silk, catgut, or a monofilament suture ) is preferable. In suture material that slides easily, however, the first hitch may loosen before the second hitch can be secured. Thus, in some cases a material that does not slide as easily but that provides a good knot strength will be preferable. Although sutures made of polyglycolic or polyglactic acid may be used as in conventional surgery, it may be difficult to slide the knot in place smoothly using these materials. Tayside knot is a good extracorporeal knot for a suture material like silk.

Laparoscopic Meltzer's Knot

This video demonstrate how to ligate Laparoscopic Meltzer's Knot. Laparoscopic Meltzer's Knot is also called as modified roeder's knot. However, after accumulating over 20 years of experience in this field, we have consistently observed this knot to be very user-friendly; on the contrary, it is ergonomically much easy particularly in areas with limited accessibility for laparoscopic instruments. To counter the limitations of laparoscopic surgery, we have devised a simple technique that ensures gripping the suture in a peculiar way to make endoscopic Meltzer's knotting rather effortless, faster and easy to learn.

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IPOM Umbilical Hernia Repair by VIPRO II Mesh

Laparoscopic umbilical hernia repair has largely replaced open method. The purpose of this video is to demonstrate the laparoscopic umbilical hernia repair using two port with intraabdominal VIPRO II mesh fixation with transabdominal absorbable suture technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Methods. Two-port technique was used and the umbilical defect was closed using transabdominal VIPRO II mesh was placed intra-bdominally and fixed to abdominal wall using transabdominal suture. Results. Laparoscopic umbilical hernia repair with intraabdominal mesh fixation using absorbable sutures offers an efficient, safe, and effective repair for umbilical hernia.

Laparoscopic Cholecystectomy for 5 Year Old Child

https://www.laparoscopyhospital.com/ This video demonstrate laparoscopic cholecystectomy in a five year old girl. Gallstone disease has been considered an uncommon entity in children and infants, but its incidence is reportedly increasing which may be attributed to widespread use of diagnostic imaging (ultrasonography). An apparently healthy 5 year old female child presented to our Outpatient department with chief complaint of recurrent abdominal pain. The episodes of pain were acute in onset and associated with vomiting. As per the complete examination and findings, a diagnosis of chronic calculous cholecystitis was made. A four port laparoscopic cholecystectomy was done. The incidence of gallstones in children in India has not been sufficiently studied. The incidence of gallstone disease in India was found to be 0.3% with the incidence in age group 0–10 being less than 0.1%. In contrast to adult gallstone disease, it has been found that there is no female preponderance in gallstone diseases of infancy. Also, the majority of children having increased haemoglobin turnover develop pigment stones only after 5 years of age. The probability of gallstone disease in infants and young children should not be ignored. Gall stones should always be considered as a differential diagnosis when young patients present with complaints of abdominal pain.

Errors in laparoscopic surgery

Laparoscopic surgery is the most significant advancement in the field of surgery over the past 25 years. This minimal access approach has been widely embraced and adopted to many common operations. Demonstrated benefits include decreased post-operative pain, shorter lengths of in-patient hospitalization, increased patient acceptance, and a more rapid return to gainful employment. With its ever-growing popularity, it has become fertile ground for civil litigation, ranking along with birth injuries and failure to diagnose cancer. A brief synopsis of the history of its evolution is presented along with general and specific comments concerning potential errors as they relate to specific common operations which are commonly done utilizing this technique. This video lecture demonstrate how to avoid mistakes in Minimal Access Surgery. https://www.laparoscopyhospital.com/

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | |

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | | पित्ताशय में पथरी के कारण (Causes of gall bladder stone) पित्ताशय में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता हैं। कुछ फ़ैक्टर हैं जो गॉलस्टोन्स (gallstones) की संभावना को बढ़ा सकता है जैसे की – मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes) मोटापा (Obesity) गर्भधारण (Pregnancy) मोटापे की सर्जरी के बाद (post bariatric surgery) कुछ दवाओं का सेवन कुछ लम्बी अवधि की बीमारीयों के बाद “गॉलस्टोन्स की सम्भावना मोटापे और डायबिटीज से बढ़ती है” डॉ अमरचंद सूचित करते हैं। “ज़्यादातर पित्त की थैली में पथरी औरतों में पाई जाती है” “ऐसा होने का कारण अभी तक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ हैं।” गॉलस्टोन्स के लक्षण (Signs and symptoms of gallstones) कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी होती है। पित्त की थैली में पथरी के दिखाई देनें वाले कुछ खास लक्षण हैं (signs and symptoms of gallstones): पेट के उपरी भाग और दाहिने तरफ़ में दर्द बदहजमी खट्टापन पेट फुलाना अगर पित्त की थैली में पथरी होने की वजह से आपको पेट दर्द हो रहा है तो इसका ईलाज करना ज़रूरी है।नहीं तो यह पथरी आगे जाके दिक़्क़त का कारण बन सकती हैं।” अगर गॉल्स्टोन 3 cm से बड़ा है या फिर अगर गॉलब्लेडर पोलिप (gallbladder polyp) के साथ है जो 1 cm या उससे बड़ा है, तो गॉलब्लेडर कैंसर (gallbladder cancer) की संभावना भी बढ़ जाती हैं। लैप्रोस्कोपी अर्थात दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं जबकि चीरा विधि की अपेक्षा दूरबीन विधि में मरीज को ज्यादा लंबे समय तक हॉस्पिटल में भर्ती नहीं रहना पड़ता। इसके साथ ही पेट पर एक या चार छेद कर हार्निया, एपेंडिक्स, ट्यूमर व पथरी का सफल ऑपरेशन किया जा सकता है। इसमें समय कम लगता है और खून की भी जरूरत न के बराबर होती है। दूरबीन विधि का एक अन्य लाभ यह है कि इसमें पेट में चीरा व टांके नहीं लगते और सिर्फ एक छेद नाभि में होने से पेट कटने के कोई निशान भी नहीं आते।

Extra Corporeal Roeder's Knot

The first laparoscopic sliding knot to be described was the Roeder knot; it has been used for a variety of procedures in all surgical disciplines. It was surmised that the introduction of new modifications in the geometry of the knot paralleled the introduction of its new indications, and that not all modifications improved its security of roeder's knot but still it is most popular extracorporeal knot in laparoscopic surgery. The lack of direct manual contact, for which palpation with current laparoscopic instruments cannot completely compensate is atracting surgeon to use extracorporeal knot in laparoscopic surgery. Roeder's knot is one of the oldest extracorporeal knot which was first time used for appendectomy. The limited movement of laparoscopic instruments that are inserted through a cannula anchored to the abdominal wall. The working field is a cone with a fixed point at the insertion point of the cannula. Because of the limited field of movement of laparoscopic instruments, proper placement of the cannula is critical to tie an entracorporeal knot. In these situation extracorporeal roaders knot is a good alternative.. The lack of normal binocular vision without true depth perception, which makes conventional techniques difficult to apply make these knots easier. Roeder's knot can be safely used to ligate any tubular structure upto 6-8mm in diameter.

Laparoscopic Mini Gastric Bypass Step by Step Demonstration by Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ Laparoscopic Mini Gastric Bypass (MGB) is one of the most commonly performed bariatric surgery and slowly getting popular all over world as obesity surgery. This video demonstrate step by step technique of performing mini gastric bypass surgery by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital for a female suffering from Morbid Obesity. Mini Gastric Bypass has Restrictive, Malabsorptive and Hormonal component. Restrictive: A small stomach pouch is created restricting the amount of food you can eat. Malabsorptive: A portion of the small intestine is bypassed. Since the small intestine is responsible for absorbing the calories from the food you eat, bypassing a portion of the small intestine results in fewer calories being absorbed, thus creating additional weight loss. Hormonal: The hormone ghrelin has been nicknamed the “Hunger Hormone” by researchers because of its significant effect on appetite. Gastric Bypass results in a fall in ghrelin levels resulting in a reduced appetite.

रोबाटिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी प्राप्त करें |

चिकित्सा क्षेत्र में आ रहे तकनीकी बदलावों के बीच रोबोटिक सर्जरी अब अपने देश में भी होने लगी है. रोबोटिक सर्जरी में विशेषज्ञता प्राप्त सर्जन मुश्किल सर्जरी के लिए रोबोट का इस्तेमाल कर रहे हैं. रोबोट की मदद से सर्जन बेहद सटीकता व निपुणता के साथ सर्जरी को सफलतापूर्वक कर पा रहे हैं | उन्होंने कहा, मरीज भी रोबाटिक सर्जरी के बाद जल्दी ठीक होता है क्योंकि इसमें छोटा चीरा लगाया जाता है, जिसके कारण खून बहने की संभावना कम होती है. मरीज को खून चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती. मरीज को रोबाटिक सर्जरी के बाद अस्पताल में कम समय के लिए रुकना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च भी कम हो जाता है. कॉस्मेसिस इसका एक और फायदा है जिसके चलते आज बड़ी संख्या में मरीज रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुन रहे हैं.

Laparoscopic Nephrectomy

This video demonstrate details of Laparoscopic Nephrectomy. Laparoscopic Nephrectomy provides patients with a safe and effective way to remove a diseased or cancerous kidney. Laparoscopic nephrectomy is a minimally invasive technique, which provides patients with less discomfort and equivalent results when compared to the larger incision required with traditional open surgery. When compared to conventional open surgery, laparoscopic nephrectomy has resulted in significantly less post-operative pain, a shorter hospital stay, earlier return to work and daily activities, a more favorable cosmetic result and outcomes identical to that of open surgery.

Laparoscopic Surgery for Ovarian Cyst Diseases

This video demonstrate laparoscopic surgery for various ovarian diseases. Ovarian cyst removal is surgery to remove a cyst or cysts from 1 or both of ovaries. A laparoscopic surgery uses small incisions and specialized tools. It may offer faster recovery times than open surgery , which uses a larger abdominal incision. Most cysts can be removed using laparoscopy. This is a type of keyhole surgery where small cuts are made in your tummy and gas is blown into the pelvis to allow the surgeon to access your ovaries. A laparoscope is passed into abdomen so the surgeon can see your internal organs. The surgeon then removes the cyst through the small cuts in skin. After the cyst has been removed, the cuts will be closed using dissolvable stitches. A laparoscopy is preferred because it causes less pain and has a quicker recovery time. Most women are able to go home on the same day or the following day. For detail go to https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic Tayside Knot

Tayside knot is a good laparoscopic knot which is used by laparoscopic surgeons to ligate tubular structures using multifilament suture material. practice of this not is necessary. In this video the Tayside knots correct configuration and method of tying this knot has been demonstrated. After experience of 20 years of teaching laparoscopic surgery we conclude that the acquisition of laparoscopic incorporeal suturing and knot tying technique is dependent on practice rather than whether the surgeon is in training or not.

Learn Steps of Total Laparoscopic Hysterectomy in 15 Minutes with Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html Vaginal and laparoscopic hysterectomies have been clearly associated with decreased blood loss, shorter hospital stay, speedier return to normal activities, and fewer abdominal wall infections when compared with abdominal hysterectomies. In this video Dr R K Mishra has outlined the steps to a successful Total laparoscopic hysterectomy. Due to a wide variety in anatomy and in the course of the uterine vessels, we find it helpful to initially skeletonize them with the Harmonic scalpel and uterine artery with ligasure. Total laparoscopic hysterectomy is a safe and effective procedure for women needing a hysterectomy. We enjoy a high operative volume and perform approximately 200 laparoscopic hysterectomy cases annually. The steps described herein are not meant to be an absolute truth, but rather a true and tested method that has served us well to safely accomplish this procedure.

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) |

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) | हिस्टेरेक्टॉमी एक शल्यक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी महिला के गर्भाशय को निकाला जाता है। गर्भाशय महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का एक अंग है तथा यह मनुष्य की बंद मुट्ठी के आकार का होता है। आपका गर्भाशय निकाले जाने के बाद आप संतान पैदा नहीं कर सकती, तथा इसके बाद आपको मासिक धर्म भी नहीं होगा। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) नहीं निकाले गए हैं, तो आप मादा हार्मोन पैदा करती रहेंगी। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) निकाले गए हैं, तो मासिक धर्म रुक जाएगा। हिस्टेरेक्टॉमी शल्य क्रिया की कई किस्में हैं। अपने चिकित्सक से पूछें कि आप किस प्रकार की शल्य क्रिया करा रहीं हैं तथा क्या आपकी गर्भग्रीवा (सर्विक्स), डिंबवाही नलियां तथा अंडाशय भी हटाए जा रहे हैं। • योनीय (वेजाइनल) हिस्टेरेक्टॉमी - गर्भाशय को योनि मार्ग से हटाया जाता है, तथा पेट में कोई चीरफाड़ नहीं होती। • उदरीय (एब्डॉमिनल) हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में चीरा लगाकर, गर्भाशय को निकाला जाता है। • लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में कई छोटे सुराख किए जाते हैं और डॉक्टर इन छोटे सुराखों के माध्यम से लेप्रोस्कोप का प्रयोग करते हुए काम करता है। यह यंत्र डॉक्टर को शल्य क्रिया के दौरान छोटे स्थानों को देख पाना आसान बनाता है। अन्य छोटे यंत्र गर्भाशय को अलग करने और निकालने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी - यह लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी से बहुत मिलती जुलती है। यंत्र अधिक लचीले होते हैं और डॉक्टर द्वारा शल्य क्रिया के दौरान यंत्र की सहायता करने के लिए विशेष कैमरे का उपयोग किया जाता है।

Laparoscopic Management of Retrocecal Subserous Ruptured Appendix

This video demonstrate Retrocecal Subserous ruptured appendix surgery performed by Laparoscopy. Although there are several factors that can contribute to this rare pathology, the main cause of neglected medical management of appendicitis is the persistence of a large appendicular lump. CT and US are very useful diagnosis tools. Treatment consists to a careful appendectomy of the subserous part of appendix which can be carried out by laparoscopic approach. In this rare pathology a prior history of appendectomy can delay the diagnosis and increase its associated morbidity and even mortality. https://www.laparoscopyhospital.com/international-patients.html

Laparoscopic Cholecystectomy made easy by Mishra's Knot

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM Extracorporeal and intracorporeal knotting in laparoscopic surgery can be used in various situations and though it can be technically demanding, it can be overcome with repeated practice. Mishra's knot is a modification of the Roeder's knot or the Meltzer's knot. In the case of a wide cystic duct, where laparoscopic clips would not occlude the full width, an extracorporeal slip knot would be appropriate. Other advantages of applying Mishra knot include less expense and eliminating the risk of catching the common bile duct with the end of the clips. In step 1, interpose the stem of instrument A above the suture to prevent ‘cheese wiring’ the cystic duct on pulling through. remember to ‘snug down’ the throws that have been previously performed. Finally, push the knot down using a knot pusher as in step 6. Do not pull up like a lasso as it would saw through and tear the tissue.

Laparoscopic Cervical Cerclage

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM This video demonstrate laparoscopic cervical cerclage performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Laparoscopic Cervical cerclage, also known as a cervical stitch, is a treatment for cervical incompetence or insufficiency, when the cervix starts to shorten and open too early during a pregnancy causing either a late miscarriage or preterm birth in second trimester. As a general rule, laparoscopic cervical cerclages work best when they are placed early in pregnancy and when the cervix is longer and thicker. Rates for carrying the pregnancy to term after cerclage vary from 85 to 90 percent, depending on the type of cerclage used.

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | महिलाओं में बांझपन के लक्षण इस वीडियो मे बांझपन का लेप्रोस्कोपी से इलाज एवं लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | महिलाओं में बांझपन के लक्षण मासिकधर्म प्रारंभ होने के साथ ही दिखने लगते हैं. इन में से कईर् लक्षण ऐसे होते हैं, जिन्हें तुरंत पहचान कर उन का उपचार करा लिया जाए तो बहुत संभव है कि भविष्य में होने वाली बांझपन की आशंका से बचा जाए. अनियमित मासिकधर्म महिलाओं में मासिकधर्म की अनियमितता बांझपन का सब से प्रमुख कारण है. कईर् महिलाओं में संतुलित व पोषक भोजन के सेवन और नियमित ऐक्सरसाइज के द्वारा यह समस्या दूर हो जाती है, लेकिन कई महिलाओं को उपचार की आवश्यकता पड़ती है. मासिकचक्र से संबंधित निम्न अनियमितताएं हो सकती हैं: – 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना. – पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना. – 2 पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं. – 3 मासिकचक्र में पीरियड्स न आना. – पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना. – मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना. मासिकधर्म न आना कई महिलाओं में कभीकभी मासिकधर्म आता ही नहीं. इस का कारण अंडाशय या गर्भाशय की अनुपस्थिति होती है. यह समस्या जन्मजात हाती है, लेकिन इस के बारे में पता यौवनावस्था प्रारंभ होने पर लगता है. ऐसी महिलाएं कभी मां नहीं बन पाती हैं. हारमोन असंतुलन कभीकभी महिलाओं में बांझपन हारमोन समस्याओं से भी संबंधित होता है. इस मामले में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं: – त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है. – सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना. – होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास. – बालों का झड़ना या पतला होना. – वजन बढ़ना. – निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है. – सैक्स के दौरान दर्द होना. – असामान्य मासिकचक्र.

Laparoscopic Mishra's Knot

This video demonstrate how to tie extracorporeal Mishra's knot. Nowadays, laparoscopy has become an indispensable component of surgical training across the globe. Many complicated procedures are quite regularly performed by minimally invasive approaches. As such, acquiring proficiency in endoscopic suturing has virtually turned an obligatory prerequisite into safe execution of not only advanced but also basic laparoscopic. However, intracorporeal suturing is remarkably difficult to learn and at times quite frustrating and time-consuming. To attain that required dexterity, a needle-to driver shaft angle is generally recommended].However, as per the persistent observations made and experience gained by us over the last two decades, such a right angled grip is arguably supportive only in the most favorable circumstances wherein the tissue to be sutured lies on the “floor” of the monitor, is co-axially aligned with the needle holder, and is easily accessible; thus can it finally tied the knot. Etracorporeal knot does not has these problems. Extracorporeal surgeons knot is used widely to ligated big vessels like splenic artery, renal artery and vein. Uterine artery and partial cholecystectomy. Configuration of this knot is 1:1:1:1:1:1:1.

गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ की सारी जानकारी दी गयी है | गर्भाशय में रसौली, जिसे गर्भाशय लेयोओमामा या फाइब्रॉएड भी कहा जाता है, गर्भाशय के सौम्य चिकनी मांसपेशियों के ट्यूमर होते हैं। ज्यादातर महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता है जबकि अन्य दर्दनाक या भारी माहवारी हो सकती हैं। एक महिला में एक गर्भाशय रसौली या कई हो सकती हैं। कभी-कभी, रसौली से गर्भवती होने में मुश्किल हो सकती है, हालांकि यह असामान्य है। गर्भाशय में रसौली का सटीक कारण अस्पष्ट है। हालांकि, रसौली परिवार के एक पिडी से दुसरी पिडी में चलती हैं और आंशिक रूप से हार्मोन के स्तर से निर्धारित होती हैं। इसका निदान पैल्विक परीक्षा या चिकित्सा इमेजिंग द्वारा किया जा सकता है। यदि कोई लक्षण नहीं है तो उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। एनआईबीएड्स, जैसे कि इबुप्रोफेन, दर्द और खून बहने में मदद कर सकते हैं जबकि पेरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) दर्द से मदद कर सकता है। भारी माहवारी वाले लोगों में आयरन की खुराक की आवश्यकता हो सकती है। हार्मोन एगोनिस्ट क्लास को जारी करने वाले गोनाडोट्रॉपिन की दवाएं रसौली के आकार को कम कर सकती हैं लेकिन महंगी हैं और साइड इफेक्ट्स से जुड़ी हैं।यदि अधिक लक्षण मौजूद हैं, तो रसौली या गर्भाशय को हटाने के लिए सर्जरी मदद कर सकती है। गर्भाशय धमनी अन्त:शल्य प्रक्रिया भी मदद कर सकती हैं। रसौली के कैंसर संस्करण बहुत दुर्लभ हैं और यह लेयोमायोसारकोमा के रूप में जाना जाता है। लगभग 20% से 80% महिलाएं 50 वर्ष की आयु तक रसौली विकसित करती हैं। 2013 में, अनुमान लगाया गया था कि 171 मिलियन महिलाएं प्रभावित हुईं। रसौली आम तौर पर प्रजनन वर्षों के मध्य और बाद के दौरान पाई जाती हैं। रजोनिवृत्ति के बाद,रसौली आमतौर पर आकार में कम हो जाती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में,गर्भाशय में रसौली गर्भाशय को हटाने के लिए एक आम कारण है।

Tips and Tricks for Hysterectomy

This video demonstrate Tips and Tricks of performing Laparoscopic Hysterectomy. Hysterectomy stills represents the most common gynecological surgery. However, despite the development of laparoscopy, only 12% of hysterectomies are performed by laparoscopy. In this lecture, some tips and tricks for the different key steps of hysterectomy are explained to simplify this surgery, make it faster and also reproducible. https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery. Recently major developments in video imaging have been achieved: among these, the use of high definition and 3D imaging systems, and more recently indocyanine green (ICG) fluorescence imaging are emerging as major contributions to intraoperative decision making during surgical procedures. Many Infrared systems are developed to determine the potential role of infrared imaging as a tool for localizing anatomic structures and assessing tissue viability during laparoscopic surgical procedures. A camera system sensitive to emitted energy in the midinfrared range (3-5 micron) is incorporated into a two-channel visible laparoscope. Laparoscopic cholecystectomy, dissection of the ureter, and assessment of bowel perfusion were performed in a porcine model with the aid of this infrared imaging system. The ICG fluorescence imaging system seems to be simple, safe, and useful. The technique may well become a standard in the near future in view of its different diagnostic and oncological capabilities.

अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | क्‍या है अपेंडिक्‍स? अपेंडिक्स छोटी और बड़ी आंतों के बीच की कड़ी है, जो शहतूत के आकार की होती है। यह आंतों से बाहर की ओर निकली रहती है। पहले इसकी उपयोगियता या अनुपयोगियता के बारे में जानकारी नहीं थी। अक्सर चिकित्सक पेट दर्द होने पर अपेंडिक्स को हटा देने में ही भलाई समझते थे, इससे मरीजो को कोई समस्या नहीं आती है। फिर भी पूरी तरह परीक्षण किए बगैर मामूली से या अन्य किसी कारण से होने वाले पेटदर्द के निदान के लिए इस अवशेषी अंग को निकाल फेंकना गलत है। अपेंडिक्‍स के कारण अपेंडिक्‍स के कारणों में लम्बे समय तक कब्ज का रहना, पेट में पलने वाला परजीवी व आंतों के रोग इत्यादि से अपेंडिक्स की नाली में रुकावट आ जाती है। ऐसे भोजन का सेवन करना जिसमें फाइबर बहुत ही कम या बिल्कुल न हो, भी इस समस्या को निमंत्रण दे सकता है। जब यह अपेंडिक्स में लगातार रुकावट की स्थिति बनी रहे तो सूजन और संक्रमण के बाद यह फटने की स्थिति में हो जाती है। फटने पर यह पेट और रक्‍त में संक्रमण फैला सकता है। फिर तो यह बहुत ही भयावह हो सकता है।

Extra Corporeal Mishra's Knot

Extra Corporeal Mishra's Knot is ideal knot for thick pedicles. We prefer to use a monofilament poly trimethylene carbonate absorbable suture for Mishra's Knot. It is very good knot for uterine vascular bundle, splenic artery, renal artery or In-mass Ligation in cholecystectomy. It combines excellent tensile strength with good handling properties. It has a good first-throw holding capacity and a smooth knot tie-down, which facilitates tissue approximation and reduces intraoperative knot repositioning, despite its relatively high memory. If a Mishra's knot has to be placed extracorporeally, we use a monofilament polypropylene or polygalactane suture as in conventional surgery. We prefer to use coated, braided polyester nonabsorbable sutures in sutured rectopexy also in Mishra's Knot.

Laparoscopic Meltzer's Knot

This video demonstrate how to ligate Laparoscopic Meltzer's Knot. Laparoscopic Meltzer's Knot is also called as modified roeder's knot. However, after accumulating over 20 years of experience in this field, we have consistently observed this knot to be very user-friendly; on the contrary, it is ergonomically much easy particularly in areas with limited accessibility for laparoscopic instruments. To counter the limitations of laparoscopic surgery, we have devised a simple technique that ensures gripping the suture in a peculiar way to make endoscopic Meltzer's knotting rather effortless, faster and easy to learn.

Extra Corporeal Weston Knot

In Laparoscopic Surgery there is no ideal suture available that combines easy handling, ability to form secure knots for all situations, easy sterilization, and low cost. Thus, the surgeon has to choose which suture is appropriate for each purpose, which means deciding between monofilamentous or multifilamentous (twisted or braided) and absorbable (polyglycolic acid, polyglactin, polydioxanone, or polytrimethylene carbonate) or nonabsorbable sutures (silk, nylon, polypropylene, braided polyester). Weston knot is very good knot which can be used as extracorporeal locked knot without a knot pusher. In general, superior tensile strength and knot security reduce the risk of breakage and allow the use of finer sutures with Weston Knot. These properties also minimize tissue reaction and expedite laparoscopic procedures.

Why Laparoscopic Surgery is Better ?

The purported advantages of laparoscopic surgery over conventional open techniques are less pain and faster return to normal functional status. Very few studies have included validated measures of quality of life as end points. This lecture of Dr R K Mishra assessed the health status outcomes of patients.. Here’s an example. With traditional methods, you might spend a week or more in the hospital for intestinal surgery, and your total recovery might take 4 to 8 weeks. If you have laparoscopic surgery, you might stay only 2 nights in the hospital and recover in 2 or 3 weeks. And a shorter hospital stay generally costs less. Laparoscopic surgery has demonstrably better quality-of-life outcomes than open surgery for cholecystectomy, splenectomy, and esophageal surgery. However, open hernioplasty has at least as good, if not better, health status outcomes than laparoscopic repair.

Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM This video demonstration is Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture by Dr. R. K. Mishra at World Laparoscopy Hospital. A major benefit of the laparoscopic technique is for patients who present with bilateral inguinal hernias and recurrent hernia. Laparoscopy allows for both hernias to be repaired in a single operation without need for additional ports or incisions. As a result, recovery time is similar to unilateral laparoscopic hernia repair.

Laparoscopic Repair of Incisional Hernia by Two Ports

Various ventral and incisional hernia repair techniques exist and have largely replaced the open ones. The purpose of this video is to show the 2-port technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Laparoscopic herniorrhaphy with the 2-port technique offers an efficient, safe, and effective repair for ventral and incisional hernias. We at Worls Laparoscopy Hospital started performing all the ventral hernia by two port in year 2002. Access to the abdomen and creation of pneumoperitoneum is obtained by placing a Veress needle in the left upper quadrant. One 10-mm to 12-mm balloon port and one 5-mm straight port are placed opposite the hernia as laterally as possible, preferably on the left side. The surgeon's nondominant hand compresses the abdominal wall to bring it down to the scissors tip or Harmonic scalpel for dissection or adhesiolysis. The hernia sac content is then reduced, and the margins of the hernia defect cleared circumferentially to a distance of at least 6 cm.

Laparoscopic orchiectomy combined with hernia repair

This video demonstrate Laparoscopic treatment for inguinal hernia combined with cryptorchidism management by Trans Abdominal Preperitoneal repair of hernia in a patient with undescended testes with hernia. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view. Approximately 7% of child patients with inguinal hernias also present with cryptorchidism. On the other hand, combined adult cases are uncommon. Here we report two adult cases of inguinal hernia combined with intra-canalicular cryptorchidism who underwent TAPP repair with orchiodectomy under the same operative view. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view could be safely performed in adults with an inguinal hernia combined with extra-abdominal cryptorchidism. This procedure could be an option for the treatment of such adult patients. Cryptorchidism is a condition in which one or both testes fail to descend into the scrotum before birth. The frequency of undescended testes has been reported as 4.1–6.9% during the neonatal period, 1.0–1.6% by 3 months of age, 1.0–1.7% by 1 year of age, and less than 1.0% after 1 year of age. Orchiectomy is also recommended for adult cases because adult patients with cryptorchidism already lack spermatogenic function and have a risk of neoplasms. https://www.laparoscopyhospital.com/laparoscopic-urology.html

Extra Corporeal Dundee Jamming Knot

The ability to suture in laparoscopic surgery is necessary less frequently than in conventional surgery, yet this ability is essential in certain critical situations, such as providing tissue support, maintaining tissue closure, and in creating certain surgical anastomoses. Although the principles of suturing and tying knots in endoscopic surgery are identical to those in conventional surgery, major modifications in technique are necessary as a result Extra Corporeal Dundee Jamming Knot is very useful. It can be prepared outside and then it can be introduced inside the abdomen to use as continuous suturing. The termination of this knot is by Aberdeen termination.

Standard Laparoscopic Cholecystectomy

This video describes a standard approach for laparoscopic cholecystectomies with ideal anatomy. In laparoscopic cholecystectomy, the safest and best approach to identify the structures of the Triangle of Calot is to achieve the Critical View of Safety (CVS). The Triangle of Calot is also known as the cystohepatic triangle. It is bounded by the inferior surface of the liver, the cystic duct, and the common hepatic duct. To achieve CVS, the Triangle of Calot must be clearly dissected, the lowest part of the gallbladder must be separated from the cystic plate, and only two structures should be seeing entering the gallbladder - the cystic artery and the cystic plate.

Extra Corporeal Tayside Knot

The surgeon's preference usually determines which suture knot he want to use in conventional surgery. The choice may be somewhat restricted in laparoscopic surgery because access to the target tissue and techniques for suturing and tying the knot may be limited. For extracorporeal knots (slip or square knots), a suture material that slides easily (such as silk, catgut, or a monofilament suture ) is preferable. In suture material that slides easily, however, the first hitch may loosen before the second hitch can be secured. Thus, in some cases a material that does not slide as easily but that provides a good knot strength will be preferable. Although sutures made of polyglycolic or polyglactic acid may be used as in conventional surgery, it may be difficult to slide the knot in place smoothly using these materials. Tayside knot is a good extracorporeal knot for a suture material like silk.

Laparoscopic Management of Bladder Endometrioma

https://www.laparoscopyhospital.com/ An optimal treatment of bladder and urethral endometriosis should ideally involve a team of experts, ie, gynecologic endoscopists, radiologists, and urologists, who are familiar with endometriosis. Endometriosis means presence of endometrium outside the uterus. Pelvic surgeries such as caesarean section, tubal ligation, hysterotomy, laparotomy for ectopic pregnancy and hysterectomy lead to implantation of endometrium in skin, subcutaneous tissue, sheath, rectus muscles, vesicovaginal septum and in uterine scar . Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. This supports the migratory or metastatic theory of implantation of endometriosis. Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. Most commonly it affects organs such as the ovaries, uterine ligaments, fallopian tubes, rectum and the cervico-vaginal region. Involvement of the urinary tract, is seen in just about 1% cases. Bladder is involved in 84% cases. Patients underwent coagulation of the endometriotic foci over the uterovesical peritoneum.

लेप्रोस्कोपी सर्जरी के बारे में सब कुछ जाने |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | लैप्रोस्कोपी एक सर्जरी प्रक्रिया है जो आम तौर पर पेट या श्रोणि के अंदर अंगों की जांच करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह छोटी चीजों (0.5-1.5 सेमी), छोटी ट्यूबों, सर्जरी उपकरणों और छोटे कैमरों की मदद से किया जाता है। यह एक जटिल सर्जरी है और बहुत कम दिन तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता पड़ती है। लैप्रोस्कोपी जीनाकोलॉजिक सर्जरी, हृदय सर्जरी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, किडनी की सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, एक या दोनों एड्रेनल ग्रंथियों को हटाने और गैल्स्टोन को हटाने के लिए किया जाता है। डॉक्टर इस प्रक्रिया के माध्यम से बायोप्सी नमूने भी ले सकते हैं। इसे पारंपरिक (खुली) सर्जरी पर तेजी से पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें बड़ी चीरे और अस्पताल में रहने का समय शामिल है।

Extra-peritoneal Hernia Surgery

This video demonstrate Totally Extra-peritoneal Hernia Surgery (TEP). A hernia is repaired generally using a synthetic mesh either with open surgery or increasingly using less invasive laparoscopic procedures. The most common laparoscopic techniques for inguinal hernia repair are transabdominal preperitoneal (TAPP) repair and totally extraperitoneal (TEP) repair.

MGB - An Effective Bariatric Surgery

The Mini-Gastric Bypass MGB is an excellent choice for bariatric surgery. All over world bariatric surgeons generally provides the MGB with strongly positive reviews. This international group of bariatric experts from 6 continents and 23 countries judged the MGB as a short simple effective durable bariatric procedure. In most questions the MGB was judged significantly better than similar assessments of the Band, Sleeve and the RNY. This video demonstration suggests that there is a deep reservoir of knowledge and experience that has here to fore been untapped that may assist surgeons and their patients in making good decisions about weight loss surgery. This surgery was developed by considering its less operating time and simplicity. Mini gastric bypass reduces stomach size and reroutes intestines because of which patient feels full even with small meals, absorbs less calories, lose ¾ of weight in 2 years, improves health. As compared to gastric bypass, mini gastric bypass involves low complications and minimum size effects. Mini Gastric Bypas Surgery in Qatar,Oman Because of its simplicity mini gastric bypass can minimize the chances of post-surgical complications. Patient can live a healthy lifestyle after surgery with sustained weight loss. Mini-gastric bypass is a good option to reduce unhealthy weight and is enjoying high success rate. It is true that MGB can help in weight loss, but it totally depends on patients’ ability to maintain healthy lifestyle followed by regular exercise and diet.

Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse in Elderly Women

This video demonstrate Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Total Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy is performed in order to correct prolapse and/or herniation of the vagina, uterus, and bladder. In this procedure, which is done in conjunction with a laparoscopic hysterectomy, mesh is used to anchor the cervix to the anterior longitudinal ligament of sacrum, thereby lifting the vagina and bladder into their normal anatomic positions. Laparoscopic sacrocolpopexy can also be performed in women who have suffered a prolapse of the vagina and sometimes the intestines as well—a condition known as enterocele. Traditional open abdominal sacrocolpopexy has been shown to be a durable and successful method of repairing symptomatic prolapse while maintaining natural vaginal depth and length. We have now adapted the techniques utilized in open surgery to laparoscopic sacrocolpopexy. Laparoscopic surgery offers a minimally invasive approach with several technical advantages for the surgeon, including enhanced visualization with magnification, reduced blood loss, improved suturing techniques. Laparoscopic sacrocolpopexy avoids the need for a large abdominal incision, women undergoing this procedure are able to experience a less painful recovery with a significantly quicker return to normal activities than would be possible with open surgery. In this procedure, the patient is placed under general anesthesia and five small incisions are made in the lower abdomen, allowing introduction of a camera, three robotic instrument arms and one accessory port for passage of sutures and mesh materials. In cases of advanced uterine prolapse, a hysterectomy will then be performed with preservation of the cervix. Following this, a small piece of polypropylene mesh is used to anchor the cervix, vagina and bladder to the anterior longitudial ligament of sacral bone. In some cases, the uterus can be preserved and suspended in a similar manner—a procedure known as sacrohysteropexy. Finally, tissues are sewn over the mesh to form a barrier between the mesh and surrounding pelvic organs.

Laparoscopic Roeder's Knot

Although it demands an advanced set of skills that remain substantially hard to don, many of the salient steps of “open” surgery, including suturing, are credibly “replicated” in its laparoscopic counterpart with the intention of achieving similar optimal results. This video demonstrate how to tie Laparoscopic Roeder's Knot. Laparoscopic Roeder's Knot is one of the oldest knot used in laparoscopic surgery. It is used most commonly during laparoscopic appendectomy surgery. Recent literature, though abundant with numerous reports pertaining to a variety of endoscopic knotting techniques and technologies, appears to lack scientific data but Roeder's knot is a time tasted extra corporeal slip knot which is secure for 6-8 mm diameter tubular structure.

मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे | मोटापे के कारण | मोटापे के कई कारण हो सकते है। इनमें से प्रमुख है:- मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना, ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा के उपयोग के बीच असंतुलन के कारण होता है। मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना भी मोटापे का कारण है। कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन मोटापे का प्रमुख कारण है। असंतुलित व्यवहार औऱ मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापे का कारण बनता है। शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है। बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा व्यस्क होने पर भी रह सकता है। हाइपोथाइरॉयडिज़्म (अवटु अल्पक्रियता) | स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी और ऐसी ही दूसरी बैरियाट्रिक सर्जरी में पेट के आकार को ऑपरेशन के जरिए छोटा किया जाता है. इससे भूख जगाने वाले हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है जिससे वजन कम होने लगता है. ओबेसिटी ऐंड मेटाबॉलिक सर्जरी सोसायटी ऑफ इंडिया का अनुमान है कि देश में हर साल 12 से 15 हजार बैरियाट्रिक सर्जरी की जाती हैं. इनमें से एक बड़ी तादाद विदेशी मरीजों की भी होती है.

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus

This video demonstrate Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus. Despite the increased operation time and blood loss, laparoscopic myomectomy can be safely performed in the treatment of large uterine fibroid. However, high risk of blood transfusion in these patients has to be kept in mind. With laparoscopic approach, there is minimal tissue handling which reduces risk of adhesions. Saline irrigation is also constantly in use which prevents drying of tissues and blood clots from sticking to the tissues. Meticulous control of bleeding also is essential. Finally, adhesion prevention barrier such as Adept solution or Interceed is used at the end of the procedure.

Laparoscopic Cervical Cerclage for cervical incompetence or insufficiency

When a woman’s cervix is weak (sometimes called an incompetent cervix) she is more likely to have a baby born prematurely because the cervix shortens or opens too early. In order to prevent premature labor, a woman’s doctor may recommend a cervical cerclage. A cerclage is used to prevent these early changes in a woman’s cervix, thus preventing premature labor. A closed cervix helps a developing baby stay inside the uterus until the mother reaches 37-38 weeks of pregnancy. Treatment for cervical incompetence is a surgical procedure called cervical cerclage, in which the cervix is sewn closed during pregnancy. The cervix is the lowest part of the uterus and extends into the vagina. For more information https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic Myomectomy Step by Step Video

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html This video demonstrate all the steps of laparoscopic myomectomy. Surgeons who have the experience and skill and know the size, number, and position of fibroids are able to select the appropriate candidates for laparoscopic myomectomy. Authors of a study of 2,050 laparoscopic myomectomies found that fibroids larger than 5 cm, removal of more than 3 fibroids, and broad ligament fibroids were more likely to be associated with major complications, including visceral injury, conversion to laparotomy, and bleeding requiring blood transfusion. For all women considering laparoscopic or robot-assisted myomectomy, Surgeon should order pelvic MRI with and without contrast. Having the radiologist limit the number of MRI sequences may reduce the cost and make it comparable to that of other imaging modalities. Fibroids may affect quality of life—they may cause heavy menstrual bleeding, pelvic pain or pressure, or urinary frequency or incontinence. For many women who want large or numerous fibroids removed but the uterus preserved, abdominal myomectomy is required. Smaller and less numerous fibroids usually can be managed laparoscopically or with robotic assistance.

Laparoscopic Dundee Jamming Knot

Acquiring the skills of laparoscopic suturing and knotting techniques can be considered a prerequisite to learn advanced laparoscopic procedures for laparoscopic surgeon and gynecologist. Despite the concept that developing such suturing skills should be reserved for the younger generation of laparoscopic surgeons due to the high level of difficulty in manual laparoscopic skills involved. Dundee Jamming knot is very good starter knot which is prepared outside the abdomen and then dropped inside the abdomen through one of the port to tie intracorporeal continuous suturing.

Bilateral Dermoid Cyst

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM The challenging aspect of this case was that the patient was a 19-year-old unmarried woman with bilateral mature cystic teratoma of the ovary. The whole of the left ovary was involved in the dermoid cyst without any normal ovarian tissue. An Ovarian dermoid cyst is a saclike growth that is present at birth. It contains structures such as hair, fluid, teeth, or skin glands that can be found on or in the skin. Dermoid cysts grow slowly and are not tender unless ruptured. They usually occur on the face, inside the skull, on the lower back, and in the ovaries. Superficial dermoid cysts on the face usually can be removed without complications. Removal of other, more rare dermoid cysts requires special laparoscopic techniques and training.

कैंसर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

कैंसर क्या है? कैंसर एक किस्म की बीमारी नहीं होती, बल्कि यह कई रूप में होता है। कैंसर के 100 से अधिक प्रकार होते हैं। अधिकतर कैंसरों के नाम उस अंग या कोशिकाओं के नाम पर रखे जाते हैं जिनमें वे शुरू होते हैं- उदाहरण के लिए, बृहदान्त्र में शुरू होने वाला कैंसर पेट का कैंसर कहा जाता है, कैंसर जो कि त्वचा की बेसल कोशिकाओं में शुरू होता है बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है। ओवेरियन कैंसर : 10% ओवरी के ट्यूमर कैंसरस हो सकते हैं. इस उम्र में अधिकतर कैंसर जर्म सेल ट्यूमर होते हैं जैसे-डिसजर्मिनोमा, योक सैक ट्यूमर आदि. ये ठोस होते हैं और बढ़ कर 10-15 सेमी हो जाते हैं. इनका पता पेट दर्द से चलता है. यह प्राय: एक ओर होता है तथा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाला जा सकता है. शुरू में इलाज हो जाये, तो यह ठीक हो सकता है. इलाज से दूसरे तरफ की ओवरी बचा ली जाती है, जिससे प्रजनन संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं | लेप्रोस्कोपी सर्जरी में पेट में तीन छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं, जो एक मिलीमीटर से लेकर एक सेंटीमीटर के हो सकते हैं। इस की-होल शल्य चिकित्सा के उपयोग से मरीज को दर्द कम होता है। कैंसर शब्द ऐसे रोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के विभाजित होती हैं और वे अन्य ऊतकों पर आक्रमण करने में सक्षम होती हैं। कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं। कैंसर के कुछ लक्षण - स्तन या शरीर के किसी अन्य भाग में कड़ापन या गांठ। - एक नया तिल या मौजूदा तिल में परिवर्तन। - कोई ख़राश जो ठीक नहीं हो पाती। - स्वर बैठना या खाँसी ना हटना। - आंत्र या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन। - खाने के बाद असुविधा महसूस करना। - निगलने के समय कठिनाई होना। - वजन में बिना किसी कारण के वृद्धि या कमी। - असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज। - कमजोर लगना या बहुत थकावट महसूस करना।

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Myoma

This video demonstrate laparoscopic myomectomy for large intramural myoma. Laparoscopic myomectomy using pneumoperitoneum for large intramural myomas is considered a difficult and time-consuming procedure, requiring great skill to move a large uterus; to locate, grasp, enucleate, and remove a bulky myoma from the abdominal cavity; to achieve adequate hemostasis; and to repair the muscle layer. Laparoscopic myomectomy allows your surgeon to remove your fibroids through several small incisions. This may be done robotically. It's less invasive and recovery is faster than with abdominal myomectomy. Laparoscopic myomectomy (LM) currently brings more attention because of increased demands on uterine conservation and less invasive management of myomas. The advantages of Laparoscopic Myomectomy are shorter hospitalization, faster recovery, fewer adhesions, and less blood loss. In spite of the increasing improvements in laparoscopic instruments and techniques, advanced laparoscopic technical skills are required to perform Laparoscopic Myomectomy with success. Technical problems inherent to the removal of large uterine myomas include hemostasis, uterine closure, and removal of the uterine tissue.

Laparoscopic Weston Knot

Nowadays, the acquisition of safe, effective yet rapid and minimally invasive suturing skills has become not only desirable but also an essential part of any laparoscopic intervention. Laparoscopic Weston Knot was initially started by arthroscopic surgeons but now widely used in laparoscopic general surgery or gynecology. Although there remains a substantial body of literature focusing mainly on varied minimal access knotting techniques, there seem to be scarcely any contributions devoted specifically to the crux of its successful execution—the precise intracorporeal needle loading methodology that eventually translates into easy and secure tissue approximation.

Laparoscopic Management of Ectopic Pregnancies Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ This Video Lecture of Dr R K Mishra is to compare the laparoscopic approach with laparotomy in the treatment of ectopic pregnancy. The aim of this lecture was to evaluate the safety and efficacy of laparoscopic surgery for ectopic pregnancies. In the laparoscopic group, the postoperative morbidity and post-hospital stay were significantly less. Although laparoscopic surgery for ectopic pregnancies is a new approach and it is not widely practised in service hospitals, it has more advantages than open surgery and it has been well accepted by the surgeons and patients. It is a safe and feasible approach.

Extra Corporeal Meltzer's Knot

Extra Corporeal Meltzer's Knot is a modification of roeder's knot. Roeder's knot is 1:3:1 and Melzer's knot is 2:3:2. In this knot 2 hitches three wind and two lock is present. Therefore, Melzer knot is a geometrical modified roeder's knot which was made of all modifications and all data on knot security and loop security of the knot were analyzed. The introduction of the original knot and its applicable modifications paralleled the increase in minimally invasive techniques and the spread of these techniques in all the medical specialties. Roeder loop security depends predominantly on the number of initial turns around the standing part. Its knot security depends on the additional half hitches used to backup the knot after it has been tightened. Only a few of the modifications improved the security of the knot or its previous modifications and one of that is Meltzer's knot.

Laparoscopic Instrument Demonstration - Trocars and other Hand Instruments

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM Demonstration of laparoscopic instrument design of Hand Instruments. Laparoscopic Instruments like Laparoscopy Veress Needle, Laparoscopic Hand Instruments also known as laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, monopolar hand instruments, laparoscopic atraumatic grasper, Laparoscopic Forceps, Laparoscopic Hand Instruments available in different types like Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Long Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Kelly Dissecting and Grasping Forceps, Mixter/ Right angled Dissecting & Grasping Forceps, Fenestrated Grasping Forceps, Babcock Grasping Forceps, Universal/ Maxi Grip Grasping Forceps, Strong Atraumatic Grasping Forceps, Allis Grasping Forceps , Tooth Grasping Forceps, Endoclinch Grasping Forceps, Bowel Grasping Forceps, Crocie-Olmi type Grasping Forceps, Grasping Forceps, Claw Forceps, Spoon Forceps, Metzenbaum Curved Scissor, Hook Scissors and Micro Scissor. Laparoscopic Trocar, Laparoscopic Hand Instruments, laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, Laparoscopic Clip Applicator, Laparoscopic Needle Holder, Laparoscopic Suction Irrigation SET, Laparoscopic Bipolar Instruments, Laparoscopic Electrodes, Laparoscopic Fan Retractor, Port Closure, Laparoscopic Aspiration Needle, Laparoscopic Knot Pusher, Laparoscopic Cable .

ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें |

ओवरियन सिस्ट अंडाशय से सिस्ट (पुटी) हटाने की सर्जरी क्या है? ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें | औरतों के दो ओवरी होते हैं। जब किसी एक ओवरी में द्रव से भरी हुई थैली उत्पन्न हो जाती है उसे सिस्ट कहते हैं। माना जाता है कि ज़्यादातर महिलाओं को उनके जीवनकाल में कम से कम एक बार सिस्ट का विकास होता है। ओवेरियन सिस्ट के प्रकार 1. फॉलिकल सिस्ट 2. कार्पस लुटियम सिस्ट 3. डरमोईड सिस्ट 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम 1. फॉलिकल सिस्ट महिलाओं के मासिक चक्र के दौरान फॉलिकल थैली में एक अंडे का विकास होता है। अधिकांश मामलों में यह थैली टूट जाती है और अंडा रिलीज़ हो जाता है। जब फॉलिकल टूटता नहीं और अंडा रिलीज़ नहीं करता तब उसके अंदर का फ्लूइड सिस्ट बना देता है। आमतौर पर यह समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाता है। 2. कार्पस लुटियम सिस्ट अंडा निकलने के बाद फॉलिकल नष्ट हो जाते हैं। यदि यह फॉलिकल नष्ट नहीं होता तो इसमें अतिरिक्त द्रव इकठ्ठा हो जाता है जिसकी वजह से कार्पस लुटियम सिस्ट बनता है। 3. डरमोईड सिस्ट सिस्ट जिनमें बाल, चमड़ी या दांत जैसे टिशू होते हैं दूसरे टिशू बनाने के लिए इस तरह के टिशू का विकास असामान्य तरीके से होता है। 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट यह ओवरी के बाहरी सतह पर विकसित होता है। यह पानी या फिर म्यूकस मटेरियल से भरा हो सकता है। 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट जब कोई टिशू गर्भाशय के अंदर बनता है तो वो गर्भाशय के बाहर भी विकसित होने लगता है और अंडाशय से जुड़ा होता है जिसके कारण सिस्ट बनता है। ऐसा तब होता है जब यूटरन एंडोमेट्रियल कोशिका गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह वह स्थिति है जब दोनों ओवरी में विभिन्न छोटे सिस्ट विकसित होने लगते हैं। यह कई सारे हार्मोनल समस्याओं से जुड़ा हुआ है। क्या ओवेरियन सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर होता है? आमतौर पर ओवेरियन सिस्ट हानिकारक नहीं होता और बिना किसी इलाज के अपने आप ही खत्म हो जाता है। कई महिलाओं में सिस्ट का विकास उनके रिप्रोडक्टिव पीरियड के दौरान होता है। सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर हो भी सकता है और नहीं भी। कई सिस्ट कैंसर का रूप नहीं लेते लेकिन कुछ मामलों में ऐसा संभव है। जैसा कि सिस्ट और कैंसर के लक्षण एक जैसे ही होते हैं इसलिए इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। हालांकि कुछ जांच और परीक्षण से इसका पता लगाया जा सकता है। सही समय पर चिकित्सीय ध्यान देकर कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। ओवेरियन सिस्ट डायग्नोसिस नियमित श्रोणि के परीक्षण से ओवेरियन सिस्ट और कैंसर की संभावनाओं के बारे में पता लगाया जा सकता है। टेस्ट का प्रकार सिस्ट के साइज़ और कम्पोजीशन पर निर्भर करता है। डॉक्टर इमेजिंग टूल्स की मदद से सिस्ट का पता लगा सकते हैं जिसमें सी टी स्कैन: आंतरिक ऑर्गन्स के क्रॉस सेक्शनल इमेज बनाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है ताकि सिस्ट का पता लगाया जा सके। एमआरआई: इसका प्रयोग आंतरिक अंगों की गहरी छवि के लिए किया जाता है ताकि सिस्ट का इलाज हो सके। अल्ट्रासाउंड टेस्ट (अल्ट्रासोनोग्राफी): इसका प्रयोग सिस्ट के साइज़, शेप, लोकेशन और कम्पोजीशन को जानने के लिए किया जाता है।

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Laparoscopic Mishra's Knot

This video demonstrate how to tie extracorporeal Mishra's knot. Nowadays, laparoscopy has become an indispensable component of surgical training across the globe. Many complicated procedures are quite regularly performed by minimally invasive approaches. As such, acquiring proficiency in endoscopic suturing has virtually turned an obligatory prerequisite into safe execution of not only advanced but also basic laparoscopic. However, intracorporeal suturing is remarkably difficult to learn and at times quite frustrating and time-consuming. To attain that required dexterity, a needle-to driver shaft angle is generally recommended].However, as per the persistent observations made and experience gained by us over the last two decades, such a right angled grip is arguably supportive only in the most favorable circumstances wherein the tissue to be sutured lies on the “floor” of the monitor, is co-axially aligned with the needle holder, and is easily accessible; thus can it finally tied the knot. Etracorporeal knot does not has these problems. Extracorporeal surgeons knot is used widely to ligated big vessels like splenic artery, renal artery and vein. Uterine artery and partial cholecystectomy. Configuration of this knot is 1:1:1:1:1:1:1.

IPOM Umbilical Hernia Repair by VIPRO II Mesh

Laparoscopic umbilical hernia repair has largely replaced open method. The purpose of this video is to demonstrate the laparoscopic umbilical hernia repair using two port with intraabdominal VIPRO II mesh fixation with transabdominal absorbable suture technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Methods. Two-port technique was used and the umbilical defect was closed using transabdominal VIPRO II mesh was placed intra-bdominally and fixed to abdominal wall using transabdominal suture. Results. Laparoscopic umbilical hernia repair with intraabdominal mesh fixation using absorbable sutures offers an efficient, safe, and effective repair for umbilical hernia.

Extra Corporeal Meltzer's Knot

Extra Corporeal Meltzer's Knot is a modification of roeder's knot. Roeder's knot is 1:3:1 and Melzer's knot is 2:3:2. In this knot 2 hitches three wind and two lock is present. Therefore, Melzer knot is a geometrical modified roeder's knot which was made of all modifications and all data on knot security and loop security of the knot were analyzed. The introduction of the original knot and its applicable modifications paralleled the increase in minimally invasive techniques and the spread of these techniques in all the medical specialties. Roeder loop security depends predominantly on the number of initial turns around the standing part. Its knot security depends on the additional half hitches used to backup the knot after it has been tightened. Only a few of the modifications improved the security of the knot or its previous modifications and one of that is Meltzer's knot.

Laparoscopic Mini Gastric Bypass Step by Step Demonstration by Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ Laparoscopic Mini Gastric Bypass (MGB) is one of the most commonly performed bariatric surgery and slowly getting popular all over world as obesity surgery. This video demonstrate step by step technique of performing mini gastric bypass surgery by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital for a female suffering from Morbid Obesity. Mini Gastric Bypass has Restrictive, Malabsorptive and Hormonal component. Restrictive: A small stomach pouch is created restricting the amount of food you can eat. Malabsorptive: A portion of the small intestine is bypassed. Since the small intestine is responsible for absorbing the calories from the food you eat, bypassing a portion of the small intestine results in fewer calories being absorbed, thus creating additional weight loss. Hormonal: The hormone ghrelin has been nicknamed the “Hunger Hormone” by researchers because of its significant effect on appetite. Gastric Bypass results in a fall in ghrelin levels resulting in a reduced appetite.

MGB - An Effective Bariatric Surgery

The Mini-Gastric Bypass MGB is an excellent choice for bariatric surgery. All over world bariatric surgeons generally provides the MGB with strongly positive reviews. This international group of bariatric experts from 6 continents and 23 countries judged the MGB as a short simple effective durable bariatric procedure. In most questions the MGB was judged significantly better than similar assessments of the Band, Sleeve and the RNY. This video demonstration suggests that there is a deep reservoir of knowledge and experience that has here to fore been untapped that may assist surgeons and their patients in making good decisions about weight loss surgery. This surgery was developed by considering its less operating time and simplicity. Mini gastric bypass reduces stomach size and reroutes intestines because of which patient feels full even with small meals, absorbs less calories, lose ¾ of weight in 2 years, improves health. As compared to gastric bypass, mini gastric bypass involves low complications and minimum size effects. Mini Gastric Bypas Surgery in Qatar,Oman Because of its simplicity mini gastric bypass can minimize the chances of post-surgical complications. Patient can live a healthy lifestyle after surgery with sustained weight loss. Mini-gastric bypass is a good option to reduce unhealthy weight and is enjoying high success rate. It is true that MGB can help in weight loss, but it totally depends on patients’ ability to maintain healthy lifestyle followed by regular exercise and diet.

Laparoscopic Cervical Cerclage for cervical incompetence or insufficiency

When a woman’s cervix is weak (sometimes called an incompetent cervix) she is more likely to have a baby born prematurely because the cervix shortens or opens too early. In order to prevent premature labor, a woman’s doctor may recommend a cervical cerclage. A cerclage is used to prevent these early changes in a woman’s cervix, thus preventing premature labor. A closed cervix helps a developing baby stay inside the uterus until the mother reaches 37-38 weeks of pregnancy. Treatment for cervical incompetence is a surgical procedure called cervical cerclage, in which the cervix is sewn closed during pregnancy. The cervix is the lowest part of the uterus and extends into the vagina. For more information https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic Nephrectomy

This video demonstrate details of Laparoscopic Nephrectomy. Laparoscopic Nephrectomy provides patients with a safe and effective way to remove a diseased or cancerous kidney. Laparoscopic nephrectomy is a minimally invasive technique, which provides patients with less discomfort and equivalent results when compared to the larger incision required with traditional open surgery. When compared to conventional open surgery, laparoscopic nephrectomy has resulted in significantly less post-operative pain, a shorter hospital stay, earlier return to work and daily activities, a more favorable cosmetic result and outcomes identical to that of open surgery.

Bilateral Dermoid Cyst

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM The challenging aspect of this case was that the patient was a 19-year-old unmarried woman with bilateral mature cystic teratoma of the ovary. The whole of the left ovary was involved in the dermoid cyst without any normal ovarian tissue. An Ovarian dermoid cyst is a saclike growth that is present at birth. It contains structures such as hair, fluid, teeth, or skin glands that can be found on or in the skin. Dermoid cysts grow slowly and are not tender unless ruptured. They usually occur on the face, inside the skull, on the lower back, and in the ovaries. Superficial dermoid cysts on the face usually can be removed without complications. Removal of other, more rare dermoid cysts requires special laparoscopic techniques and training.

Extra Corporeal Weston Knot

In Laparoscopic Surgery there is no ideal suture available that combines easy handling, ability to form secure knots for all situations, easy sterilization, and low cost. Thus, the surgeon has to choose which suture is appropriate for each purpose, which means deciding between monofilamentous or multifilamentous (twisted or braided) and absorbable (polyglycolic acid, polyglactin, polydioxanone, or polytrimethylene carbonate) or nonabsorbable sutures (silk, nylon, polypropylene, braided polyester). Weston knot is very good knot which can be used as extracorporeal locked knot without a knot pusher. In general, superior tensile strength and knot security reduce the risk of breakage and allow the use of finer sutures with Weston Knot. These properties also minimize tissue reaction and expedite laparoscopic procedures.

Standard Laparoscopic Cholecystectomy

This video describes a standard approach for laparoscopic cholecystectomies with ideal anatomy. In laparoscopic cholecystectomy, the safest and best approach to identify the structures of the Triangle of Calot is to achieve the Critical View of Safety (CVS). The Triangle of Calot is also known as the cystohepatic triangle. It is bounded by the inferior surface of the liver, the cystic duct, and the common hepatic duct. To achieve CVS, the Triangle of Calot must be clearly dissected, the lowest part of the gallbladder must be separated from the cystic plate, and only two structures should be seeing entering the gallbladder - the cystic artery and the cystic plate.

Why Laparoscopic Surgery is Better ?

The purported advantages of laparoscopic surgery over conventional open techniques are less pain and faster return to normal functional status. Very few studies have included validated measures of quality of life as end points. This lecture of Dr R K Mishra assessed the health status outcomes of patients.. Here’s an example. With traditional methods, you might spend a week or more in the hospital for intestinal surgery, and your total recovery might take 4 to 8 weeks. If you have laparoscopic surgery, you might stay only 2 nights in the hospital and recover in 2 or 3 weeks. And a shorter hospital stay generally costs less. Laparoscopic surgery has demonstrably better quality-of-life outcomes than open surgery for cholecystectomy, splenectomy, and esophageal surgery. However, open hernioplasty has at least as good, if not better, health status outcomes than laparoscopic repair.

गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे गर्भाशय में रसौली का लेप्रोस्कोपी से इलाज़ की सारी जानकारी दी गयी है | गर्भाशय में रसौली, जिसे गर्भाशय लेयोओमामा या फाइब्रॉएड भी कहा जाता है, गर्भाशय के सौम्य चिकनी मांसपेशियों के ट्यूमर होते हैं। ज्यादातर महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता है जबकि अन्य दर्दनाक या भारी माहवारी हो सकती हैं। एक महिला में एक गर्भाशय रसौली या कई हो सकती हैं। कभी-कभी, रसौली से गर्भवती होने में मुश्किल हो सकती है, हालांकि यह असामान्य है। गर्भाशय में रसौली का सटीक कारण अस्पष्ट है। हालांकि, रसौली परिवार के एक पिडी से दुसरी पिडी में चलती हैं और आंशिक रूप से हार्मोन के स्तर से निर्धारित होती हैं। इसका निदान पैल्विक परीक्षा या चिकित्सा इमेजिंग द्वारा किया जा सकता है। यदि कोई लक्षण नहीं है तो उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। एनआईबीएड्स, जैसे कि इबुप्रोफेन, दर्द और खून बहने में मदद कर सकते हैं जबकि पेरासिटामोल (एसिटामिनोफेन) दर्द से मदद कर सकता है। भारी माहवारी वाले लोगों में आयरन की खुराक की आवश्यकता हो सकती है। हार्मोन एगोनिस्ट क्लास को जारी करने वाले गोनाडोट्रॉपिन की दवाएं रसौली के आकार को कम कर सकती हैं लेकिन महंगी हैं और साइड इफेक्ट्स से जुड़ी हैं।यदि अधिक लक्षण मौजूद हैं, तो रसौली या गर्भाशय को हटाने के लिए सर्जरी मदद कर सकती है। गर्भाशय धमनी अन्त:शल्य प्रक्रिया भी मदद कर सकती हैं। रसौली के कैंसर संस्करण बहुत दुर्लभ हैं और यह लेयोमायोसारकोमा के रूप में जाना जाता है। लगभग 20% से 80% महिलाएं 50 वर्ष की आयु तक रसौली विकसित करती हैं। 2013 में, अनुमान लगाया गया था कि 171 मिलियन महिलाएं प्रभावित हुईं। रसौली आम तौर पर प्रजनन वर्षों के मध्य और बाद के दौरान पाई जाती हैं। रजोनिवृत्ति के बाद,रसौली आमतौर पर आकार में कम हो जाती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में,गर्भाशय में रसौली गर्भाशय को हटाने के लिए एक आम कारण है।

Extra-peritoneal Hernia Surgery

This video demonstrate Totally Extra-peritoneal Hernia Surgery (TEP). A hernia is repaired generally using a synthetic mesh either with open surgery or increasingly using less invasive laparoscopic procedures. The most common laparoscopic techniques for inguinal hernia repair are transabdominal preperitoneal (TAPP) repair and totally extraperitoneal (TEP) repair.

Laparoscopic Roeder's Knot

Although it demands an advanced set of skills that remain substantially hard to don, many of the salient steps of “open” surgery, including suturing, are credibly “replicated” in its laparoscopic counterpart with the intention of achieving similar optimal results. This video demonstrate how to tie Laparoscopic Roeder's Knot. Laparoscopic Roeder's Knot is one of the oldest knot used in laparoscopic surgery. It is used most commonly during laparoscopic appendectomy surgery. Recent literature, though abundant with numerous reports pertaining to a variety of endoscopic knotting techniques and technologies, appears to lack scientific data but Roeder's knot is a time tasted extra corporeal slip knot which is secure for 6-8 mm diameter tubular structure.

ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें |

ओवरियन सिस्ट अंडाशय से सिस्ट (पुटी) हटाने की सर्जरी क्या है? ओवेरियन सिस्ट पर सारी जानकारी प्राप्त करें | औरतों के दो ओवरी होते हैं। जब किसी एक ओवरी में द्रव से भरी हुई थैली उत्पन्न हो जाती है उसे सिस्ट कहते हैं। माना जाता है कि ज़्यादातर महिलाओं को उनके जीवनकाल में कम से कम एक बार सिस्ट का विकास होता है। ओवेरियन सिस्ट के प्रकार 1. फॉलिकल सिस्ट 2. कार्पस लुटियम सिस्ट 3. डरमोईड सिस्ट 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम 1. फॉलिकल सिस्ट महिलाओं के मासिक चक्र के दौरान फॉलिकल थैली में एक अंडे का विकास होता है। अधिकांश मामलों में यह थैली टूट जाती है और अंडा रिलीज़ हो जाता है। जब फॉलिकल टूटता नहीं और अंडा रिलीज़ नहीं करता तब उसके अंदर का फ्लूइड सिस्ट बना देता है। आमतौर पर यह समय के साथ अपने आप ही ठीक हो जाता है। 2. कार्पस लुटियम सिस्ट अंडा निकलने के बाद फॉलिकल नष्ट हो जाते हैं। यदि यह फॉलिकल नष्ट नहीं होता तो इसमें अतिरिक्त द्रव इकठ्ठा हो जाता है जिसकी वजह से कार्पस लुटियम सिस्ट बनता है। 3. डरमोईड सिस्ट सिस्ट जिनमें बाल, चमड़ी या दांत जैसे टिशू होते हैं दूसरे टिशू बनाने के लिए इस तरह के टिशू का विकास असामान्य तरीके से होता है। 4. सिस्टाडेनोमास सिस्ट यह ओवरी के बाहरी सतह पर विकसित होता है। यह पानी या फिर म्यूकस मटेरियल से भरा हो सकता है। 5. एंडोमेटियमोमास सिस्ट जब कोई टिशू गर्भाशय के अंदर बनता है तो वो गर्भाशय के बाहर भी विकसित होने लगता है और अंडाशय से जुड़ा होता है जिसके कारण सिस्ट बनता है। ऐसा तब होता है जब यूटरन एंडोमेट्रियल कोशिका गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगता है। 6. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यह वह स्थिति है जब दोनों ओवरी में विभिन्न छोटे सिस्ट विकसित होने लगते हैं। यह कई सारे हार्मोनल समस्याओं से जुड़ा हुआ है। क्या ओवेरियन सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर होता है? आमतौर पर ओवेरियन सिस्ट हानिकारक नहीं होता और बिना किसी इलाज के अपने आप ही खत्म हो जाता है। कई महिलाओं में सिस्ट का विकास उनके रिप्रोडक्टिव पीरियड के दौरान होता है। सिस्ट के कारण ओवेरियन कैंसर हो भी सकता है और नहीं भी। कई सिस्ट कैंसर का रूप नहीं लेते लेकिन कुछ मामलों में ऐसा संभव है। जैसा कि सिस्ट और कैंसर के लक्षण एक जैसे ही होते हैं इसलिए इसका पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। हालांकि कुछ जांच और परीक्षण से इसका पता लगाया जा सकता है। सही समय पर चिकित्सीय ध्यान देकर कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। ओवेरियन सिस्ट डायग्नोसिस नियमित श्रोणि के परीक्षण से ओवेरियन सिस्ट और कैंसर की संभावनाओं के बारे में पता लगाया जा सकता है। टेस्ट का प्रकार सिस्ट के साइज़ और कम्पोजीशन पर निर्भर करता है। डॉक्टर इमेजिंग टूल्स की मदद से सिस्ट का पता लगा सकते हैं जिसमें सी टी स्कैन: आंतरिक ऑर्गन्स के क्रॉस सेक्शनल इमेज बनाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है ताकि सिस्ट का पता लगाया जा सके। एमआरआई: इसका प्रयोग आंतरिक अंगों की गहरी छवि के लिए किया जाता है ताकि सिस्ट का इलाज हो सके। अल्ट्रासाउंड टेस्ट (अल्ट्रासोनोग्राफी): इसका प्रयोग सिस्ट के साइज़, शेप, लोकेशन और कम्पोजीशन को जानने के लिए किया जाता है।

Laparoscopic Meltzer's Knot

This video demonstrate how to ligate Laparoscopic Meltzer's Knot. Laparoscopic Meltzer's Knot is also called as modified roeder's knot. However, after accumulating over 20 years of experience in this field, we have consistently observed this knot to be very user-friendly; on the contrary, it is ergonomically much easy particularly in areas with limited accessibility for laparoscopic instruments. To counter the limitations of laparoscopic surgery, we have devised a simple technique that ensures gripping the suture in a peculiar way to make endoscopic Meltzer's knotting rather effortless, faster and easy to learn.

Laparoscopic orchiectomy combined with hernia repair

This video demonstrate Laparoscopic treatment for inguinal hernia combined with cryptorchidism management by Trans Abdominal Preperitoneal repair of hernia in a patient with undescended testes with hernia. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view. Approximately 7% of child patients with inguinal hernias also present with cryptorchidism. On the other hand, combined adult cases are uncommon. Here we report two adult cases of inguinal hernia combined with intra-canalicular cryptorchidism who underwent TAPP repair with orchiodectomy under the same operative view. Laparoscopic hernia repair with orchiectomy under the same operative view could be safely performed in adults with an inguinal hernia combined with extra-abdominal cryptorchidism. This procedure could be an option for the treatment of such adult patients. Cryptorchidism is a condition in which one or both testes fail to descend into the scrotum before birth. The frequency of undescended testes has been reported as 4.1–6.9% during the neonatal period, 1.0–1.6% by 3 months of age, 1.0–1.7% by 1 year of age, and less than 1.0% after 1 year of age. Orchiectomy is also recommended for adult cases because adult patients with cryptorchidism already lack spermatogenic function and have a risk of neoplasms. https://www.laparoscopyhospital.com/laparoscopic-urology.html

Extra Corporeal Mishra's Knot

Extra Corporeal Mishra's Knot is ideal knot for thick pedicles. We prefer to use a monofilament poly trimethylene carbonate absorbable suture for Mishra's Knot. It is very good knot for uterine vascular bundle, splenic artery, renal artery or In-mass Ligation in cholecystectomy. It combines excellent tensile strength with good handling properties. It has a good first-throw holding capacity and a smooth knot tie-down, which facilitates tissue approximation and reduces intraoperative knot repositioning, despite its relatively high memory. If a Mishra's knot has to be placed extracorporeally, we use a monofilament polypropylene or polygalactane suture as in conventional surgery. We prefer to use coated, braided polyester nonabsorbable sutures in sutured rectopexy also in Mishra's Knot.

Laparoscopic Surgery for Ovarian Cyst Diseases

This video demonstrate laparoscopic surgery for various ovarian diseases. Ovarian cyst removal is surgery to remove a cyst or cysts from 1 or both of ovaries. A laparoscopic surgery uses small incisions and specialized tools. It may offer faster recovery times than open surgery , which uses a larger abdominal incision. Most cysts can be removed using laparoscopy. This is a type of keyhole surgery where small cuts are made in your tummy and gas is blown into the pelvis to allow the surgeon to access your ovaries. A laparoscope is passed into abdomen so the surgeon can see your internal organs. The surgeon then removes the cyst through the small cuts in skin. After the cyst has been removed, the cuts will be closed using dissolvable stitches. A laparoscopy is preferred because it causes less pain and has a quicker recovery time. Most women are able to go home on the same day or the following day. For detail go to https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Myoma

This video demonstrate laparoscopic myomectomy for large intramural myoma. Laparoscopic myomectomy using pneumoperitoneum for large intramural myomas is considered a difficult and time-consuming procedure, requiring great skill to move a large uterus; to locate, grasp, enucleate, and remove a bulky myoma from the abdominal cavity; to achieve adequate hemostasis; and to repair the muscle layer. Laparoscopic myomectomy allows your surgeon to remove your fibroids through several small incisions. This may be done robotically. It's less invasive and recovery is faster than with abdominal myomectomy. Laparoscopic myomectomy (LM) currently brings more attention because of increased demands on uterine conservation and less invasive management of myomas. The advantages of Laparoscopic Myomectomy are shorter hospitalization, faster recovery, fewer adhesions, and less blood loss. In spite of the increasing improvements in laparoscopic instruments and techniques, advanced laparoscopic technical skills are required to perform Laparoscopic Myomectomy with success. Technical problems inherent to the removal of large uterine myomas include hemostasis, uterine closure, and removal of the uterine tissue.

Laparoscopic Cholecystectomy made easy by Mishra's Knot

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM Extracorporeal and intracorporeal knotting in laparoscopic surgery can be used in various situations and though it can be technically demanding, it can be overcome with repeated practice. Mishra's knot is a modification of the Roeder's knot or the Meltzer's knot. In the case of a wide cystic duct, where laparoscopic clips would not occlude the full width, an extracorporeal slip knot would be appropriate. Other advantages of applying Mishra knot include less expense and eliminating the risk of catching the common bile duct with the end of the clips. In step 1, interpose the stem of instrument A above the suture to prevent ‘cheese wiring’ the cystic duct on pulling through. remember to ‘snug down’ the throws that have been previously performed. Finally, push the knot down using a knot pusher as in step 6. Do not pull up like a lasso as it would saw through and tear the tissue.

Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse in Elderly Women

This video demonstrate Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy for Uterine Prolapse performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Total Laparoscopic Hysterectomy with Sacrocolpopexy is performed in order to correct prolapse and/or herniation of the vagina, uterus, and bladder. In this procedure, which is done in conjunction with a laparoscopic hysterectomy, mesh is used to anchor the cervix to the anterior longitudinal ligament of sacrum, thereby lifting the vagina and bladder into their normal anatomic positions. Laparoscopic sacrocolpopexy can also be performed in women who have suffered a prolapse of the vagina and sometimes the intestines as well—a condition known as enterocele. Traditional open abdominal sacrocolpopexy has been shown to be a durable and successful method of repairing symptomatic prolapse while maintaining natural vaginal depth and length. We have now adapted the techniques utilized in open surgery to laparoscopic sacrocolpopexy. Laparoscopic surgery offers a minimally invasive approach with several technical advantages for the surgeon, including enhanced visualization with magnification, reduced blood loss, improved suturing techniques. Laparoscopic sacrocolpopexy avoids the need for a large abdominal incision, women undergoing this procedure are able to experience a less painful recovery with a significantly quicker return to normal activities than would be possible with open surgery. In this procedure, the patient is placed under general anesthesia and five small incisions are made in the lower abdomen, allowing introduction of a camera, three robotic instrument arms and one accessory port for passage of sutures and mesh materials. In cases of advanced uterine prolapse, a hysterectomy will then be performed with preservation of the cervix. Following this, a small piece of polypropylene mesh is used to anchor the cervix, vagina and bladder to the anterior longitudial ligament of sacral bone. In some cases, the uterus can be preserved and suspended in a similar manner—a procedure known as sacrohysteropexy. Finally, tissues are sewn over the mesh to form a barrier between the mesh and surrounding pelvic organs.

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery

Use of Infrared Imaging Technique in Laparoscopic Surgery. Recently major developments in video imaging have been achieved: among these, the use of high definition and 3D imaging systems, and more recently indocyanine green (ICG) fluorescence imaging are emerging as major contributions to intraoperative decision making during surgical procedures. Many Infrared systems are developed to determine the potential role of infrared imaging as a tool for localizing anatomic structures and assessing tissue viability during laparoscopic surgical procedures. A camera system sensitive to emitted energy in the midinfrared range (3-5 micron) is incorporated into a two-channel visible laparoscope. Laparoscopic cholecystectomy, dissection of the ureter, and assessment of bowel perfusion were performed in a porcine model with the aid of this infrared imaging system. The ICG fluorescence imaging system seems to be simple, safe, and useful. The technique may well become a standard in the near future in view of its different diagnostic and oncological capabilities.

Extra Corporeal Tayside Knot

The surgeon's preference usually determines which suture knot he want to use in conventional surgery. The choice may be somewhat restricted in laparoscopic surgery because access to the target tissue and techniques for suturing and tying the knot may be limited. For extracorporeal knots (slip or square knots), a suture material that slides easily (such as silk, catgut, or a monofilament suture ) is preferable. In suture material that slides easily, however, the first hitch may loosen before the second hitch can be secured. Thus, in some cases a material that does not slide as easily but that provides a good knot strength will be preferable. Although sutures made of polyglycolic or polyglactic acid may be used as in conventional surgery, it may be difficult to slide the knot in place smoothly using these materials. Tayside knot is a good extracorporeal knot for a suture material like silk.

Laparoscopic Repair of Incisional Hernia by Two Ports

Various ventral and incisional hernia repair techniques exist and have largely replaced the open ones. The purpose of this video is to show the 2-port technique and demonstrate that it is feasible, efficient, and safe. Laparoscopic herniorrhaphy with the 2-port technique offers an efficient, safe, and effective repair for ventral and incisional hernias. We at Worls Laparoscopy Hospital started performing all the ventral hernia by two port in year 2002. Access to the abdomen and creation of pneumoperitoneum is obtained by placing a Veress needle in the left upper quadrant. One 10-mm to 12-mm balloon port and one 5-mm straight port are placed opposite the hernia as laterally as possible, preferably on the left side. The surgeon's nondominant hand compresses the abdominal wall to bring it down to the scissors tip or Harmonic scalpel for dissection or adhesiolysis. The hernia sac content is then reduced, and the margins of the hernia defect cleared circumferentially to a distance of at least 6 cm.

Learn Steps of Total Laparoscopic Hysterectomy in 15 Minutes with Dr R K Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html Vaginal and laparoscopic hysterectomies have been clearly associated with decreased blood loss, shorter hospital stay, speedier return to normal activities, and fewer abdominal wall infections when compared with abdominal hysterectomies. In this video Dr R K Mishra has outlined the steps to a successful Total laparoscopic hysterectomy. Due to a wide variety in anatomy and in the course of the uterine vessels, we find it helpful to initially skeletonize them with the Harmonic scalpel and uterine artery with ligasure. Total laparoscopic hysterectomy is a safe and effective procedure for women needing a hysterectomy. We enjoy a high operative volume and perform approximately 200 laparoscopic hysterectomy cases annually. The steps described herein are not meant to be an absolute truth, but rather a true and tested method that has served us well to safely accomplish this procedure.

Laparoscopic Management of Ectopic Pregnancies Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/ This Video Lecture of Dr R K Mishra is to compare the laparoscopic approach with laparotomy in the treatment of ectopic pregnancy. The aim of this lecture was to evaluate the safety and efficacy of laparoscopic surgery for ectopic pregnancies. In the laparoscopic group, the postoperative morbidity and post-hospital stay were significantly less. Although laparoscopic surgery for ectopic pregnancies is a new approach and it is not widely practised in service hospitals, it has more advantages than open surgery and it has been well accepted by the surgeons and patients. It is a safe and feasible approach.

अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी अपेन्डिसाइटिस का लेप्रोस्कोपी से इलाज के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | क्‍या है अपेंडिक्‍स? अपेंडिक्स छोटी और बड़ी आंतों के बीच की कड़ी है, जो शहतूत के आकार की होती है। यह आंतों से बाहर की ओर निकली रहती है। पहले इसकी उपयोगियता या अनुपयोगियता के बारे में जानकारी नहीं थी। अक्सर चिकित्सक पेट दर्द होने पर अपेंडिक्स को हटा देने में ही भलाई समझते थे, इससे मरीजो को कोई समस्या नहीं आती है। फिर भी पूरी तरह परीक्षण किए बगैर मामूली से या अन्य किसी कारण से होने वाले पेटदर्द के निदान के लिए इस अवशेषी अंग को निकाल फेंकना गलत है। अपेंडिक्‍स के कारण अपेंडिक्‍स के कारणों में लम्बे समय तक कब्ज का रहना, पेट में पलने वाला परजीवी व आंतों के रोग इत्यादि से अपेंडिक्स की नाली में रुकावट आ जाती है। ऐसे भोजन का सेवन करना जिसमें फाइबर बहुत ही कम या बिल्कुल न हो, भी इस समस्या को निमंत्रण दे सकता है। जब यह अपेंडिक्स में लगातार रुकावट की स्थिति बनी रहे तो सूजन और संक्रमण के बाद यह फटने की स्थिति में हो जाती है। फटने पर यह पेट और रक्‍त में संक्रमण फैला सकता है। फिर तो यह बहुत ही भयावह हो सकता है।

Tips and Tricks for Hysterectomy

This video demonstrate Tips and Tricks of performing Laparoscopic Hysterectomy. Hysterectomy stills represents the most common gynecological surgery. However, despite the development of laparoscopy, only 12% of hysterectomies are performed by laparoscopy. In this lecture, some tips and tricks for the different key steps of hysterectomy are explained to simplify this surgery, make it faster and also reproducible. https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | |

गल्लब्लैडर स्टोन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | | पित्ताशय में पथरी के कारण (Causes of gall bladder stone) पित्ताशय में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता हैं। कुछ फ़ैक्टर हैं जो गॉलस्टोन्स (gallstones) की संभावना को बढ़ा सकता है जैसे की – मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes) मोटापा (Obesity) गर्भधारण (Pregnancy) मोटापे की सर्जरी के बाद (post bariatric surgery) कुछ दवाओं का सेवन कुछ लम्बी अवधि की बीमारीयों के बाद “गॉलस्टोन्स की सम्भावना मोटापे और डायबिटीज से बढ़ती है” डॉ अमरचंद सूचित करते हैं। “ज़्यादातर पित्त की थैली में पथरी औरतों में पाई जाती है” “ऐसा होने का कारण अभी तक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ हैं।” गॉलस्टोन्स के लक्षण (Signs and symptoms of gallstones) कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी होती है। पित्त की थैली में पथरी के दिखाई देनें वाले कुछ खास लक्षण हैं (signs and symptoms of gallstones): पेट के उपरी भाग और दाहिने तरफ़ में दर्द बदहजमी खट्टापन पेट फुलाना अगर पित्त की थैली में पथरी होने की वजह से आपको पेट दर्द हो रहा है तो इसका ईलाज करना ज़रूरी है।नहीं तो यह पथरी आगे जाके दिक़्क़त का कारण बन सकती हैं।” अगर गॉल्स्टोन 3 cm से बड़ा है या फिर अगर गॉलब्लेडर पोलिप (gallbladder polyp) के साथ है जो 1 cm या उससे बड़ा है, तो गॉलब्लेडर कैंसर (gallbladder cancer) की संभावना भी बढ़ जाती हैं। लैप्रोस्कोपी अर्थात दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने को लेकर लोगों में भ्रांतियां हैं जबकि चीरा विधि की अपेक्षा दूरबीन विधि में मरीज को ज्यादा लंबे समय तक हॉस्पिटल में भर्ती नहीं रहना पड़ता। इसके साथ ही पेट पर एक या चार छेद कर हार्निया, एपेंडिक्स, ट्यूमर व पथरी का सफल ऑपरेशन किया जा सकता है। इसमें समय कम लगता है और खून की भी जरूरत न के बराबर होती है। दूरबीन विधि का एक अन्य लाभ यह है कि इसमें पेट में चीरा व टांके नहीं लगते और सिर्फ एक छेद नाभि में होने से पेट कटने के कोई निशान भी नहीं आते।

Extra Corporeal Roeder's Knot

The first laparoscopic sliding knot to be described was the Roeder knot; it has been used for a variety of procedures in all surgical disciplines. It was surmised that the introduction of new modifications in the geometry of the knot paralleled the introduction of its new indications, and that not all modifications improved its security of roeder's knot but still it is most popular extracorporeal knot in laparoscopic surgery. The lack of direct manual contact, for which palpation with current laparoscopic instruments cannot completely compensate is atracting surgeon to use extracorporeal knot in laparoscopic surgery. Roeder's knot is one of the oldest extracorporeal knot which was first time used for appendectomy. The limited movement of laparoscopic instruments that are inserted through a cannula anchored to the abdominal wall. The working field is a cone with a fixed point at the insertion point of the cannula. Because of the limited field of movement of laparoscopic instruments, proper placement of the cannula is critical to tie an entracorporeal knot. In these situation extracorporeal roaders knot is a good alternative.. The lack of normal binocular vision without true depth perception, which makes conventional techniques difficult to apply make these knots easier. Roeder's knot can be safely used to ligate any tubular structure upto 6-8mm in diameter.

Laparoscopic Tayside Knot

Tayside knot is a good laparoscopic knot which is used by laparoscopic surgeons to ligate tubular structures using multifilament suture material. practice of this not is necessary. In this video the Tayside knots correct configuration and method of tying this knot has been demonstrated. After experience of 20 years of teaching laparoscopic surgery we conclude that the acquisition of laparoscopic incorporeal suturing and knot tying technique is dependent on practice rather than whether the surgeon is in training or not.

Laparoscopic Instrument Demonstration - Trocars and other Hand Instruments

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM Demonstration of laparoscopic instrument design of Hand Instruments. Laparoscopic Instruments like Laparoscopy Veress Needle, Laparoscopic Hand Instruments also known as laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, monopolar hand instruments, laparoscopic atraumatic grasper, Laparoscopic Forceps, Laparoscopic Hand Instruments available in different types like Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Long Marryland Dissecting and Grasping Forceps, Kelly Dissecting and Grasping Forceps, Mixter/ Right angled Dissecting & Grasping Forceps, Fenestrated Grasping Forceps, Babcock Grasping Forceps, Universal/ Maxi Grip Grasping Forceps, Strong Atraumatic Grasping Forceps, Allis Grasping Forceps , Tooth Grasping Forceps, Endoclinch Grasping Forceps, Bowel Grasping Forceps, Crocie-Olmi type Grasping Forceps, Grasping Forceps, Claw Forceps, Spoon Forceps, Metzenbaum Curved Scissor, Hook Scissors and Micro Scissor. Laparoscopic Trocar, Laparoscopic Hand Instruments, laparoscopic grasper, laparoscopic dissector, laparoscopic scissors, Laparoscopic Clip Applicator, Laparoscopic Needle Holder, Laparoscopic Suction Irrigation SET, Laparoscopic Bipolar Instruments, Laparoscopic Electrodes, Laparoscopic Fan Retractor, Port Closure, Laparoscopic Aspiration Needle, Laparoscopic Knot Pusher, Laparoscopic Cable .

Laparoscopic Management of Bladder Endometrioma

https://www.laparoscopyhospital.com/ An optimal treatment of bladder and urethral endometriosis should ideally involve a team of experts, ie, gynecologic endoscopists, radiologists, and urologists, who are familiar with endometriosis. Endometriosis means presence of endometrium outside the uterus. Pelvic surgeries such as caesarean section, tubal ligation, hysterotomy, laparotomy for ectopic pregnancy and hysterectomy lead to implantation of endometrium in skin, subcutaneous tissue, sheath, rectus muscles, vesicovaginal septum and in uterine scar . Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. This supports the migratory or metastatic theory of implantation of endometriosis. Involvement of decidua in uterine scar grows as bladder endometriosis. Most commonly it affects organs such as the ovaries, uterine ligaments, fallopian tubes, rectum and the cervico-vaginal region. Involvement of the urinary tract, is seen in just about 1% cases. Bladder is involved in 84% cases. Patients underwent coagulation of the endometriotic foci over the uterovesical peritoneum.

Laparoscopic Myomectomy Step by Step Video

https://www.laparoscopyhospital.com/gynaecological-laparoscopy.html This video demonstrate all the steps of laparoscopic myomectomy. Surgeons who have the experience and skill and know the size, number, and position of fibroids are able to select the appropriate candidates for laparoscopic myomectomy. Authors of a study of 2,050 laparoscopic myomectomies found that fibroids larger than 5 cm, removal of more than 3 fibroids, and broad ligament fibroids were more likely to be associated with major complications, including visceral injury, conversion to laparotomy, and bleeding requiring blood transfusion. For all women considering laparoscopic or robot-assisted myomectomy, Surgeon should order pelvic MRI with and without contrast. Having the radiologist limit the number of MRI sequences may reduce the cost and make it comparable to that of other imaging modalities. Fibroids may affect quality of life—they may cause heavy menstrual bleeding, pelvic pain or pressure, or urinary frequency or incontinence. For many women who want large or numerous fibroids removed but the uterus preserved, abdominal myomectomy is required. Smaller and less numerous fibroids usually can be managed laparoscopically or with robotic assistance.

रोबाटिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी प्राप्त करें |

चिकित्सा क्षेत्र में आ रहे तकनीकी बदलावों के बीच रोबोटिक सर्जरी अब अपने देश में भी होने लगी है. रोबोटिक सर्जरी में विशेषज्ञता प्राप्त सर्जन मुश्किल सर्जरी के लिए रोबोट का इस्तेमाल कर रहे हैं. रोबोट की मदद से सर्जन बेहद सटीकता व निपुणता के साथ सर्जरी को सफलतापूर्वक कर पा रहे हैं | उन्होंने कहा, मरीज भी रोबाटिक सर्जरी के बाद जल्दी ठीक होता है क्योंकि इसमें छोटा चीरा लगाया जाता है, जिसके कारण खून बहने की संभावना कम होती है. मरीज को खून चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ती. मरीज को रोबाटिक सर्जरी के बाद अस्पताल में कम समय के लिए रुकना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च भी कम हो जाता है. कॉस्मेसिस इसका एक और फायदा है जिसके चलते आज बड़ी संख्या में मरीज रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुन रहे हैं.

मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे | मोटापे के कारण | मोटापे के कई कारण हो सकते है। इनमें से प्रमुख है:- मोटापा और शरीर का वजन बढ़ना, ऊर्जा के सेवन और ऊर्जा के उपयोग के बीच असंतुलन के कारण होता है। मोटापे को लेप्रोस्कोपी सर्जरी से कम करे |अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना भी मोटापे का कारण है। कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन मोटापे का प्रमुख कारण है। असंतुलित व्यवहार औऱ मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापे का कारण बनता है। शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है। बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा व्यस्क होने पर भी रह सकता है। हाइपोथाइरॉयडिज़्म (अवटु अल्पक्रियता) | स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी और ऐसी ही दूसरी बैरियाट्रिक सर्जरी में पेट के आकार को ऑपरेशन के जरिए छोटा किया जाता है. इससे भूख जगाने वाले हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है जिससे वजन कम होने लगता है. ओबेसिटी ऐंड मेटाबॉलिक सर्जरी सोसायटी ऑफ इंडिया का अनुमान है कि देश में हर साल 12 से 15 हजार बैरियाट्रिक सर्जरी की जाती हैं. इनमें से एक बड़ी तादाद विदेशी मरीजों की भी होती है.

Laparoscopic Cervical Cerclage

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV01.HTM This video demonstrate laparoscopic cervical cerclage performed by Dr R K Mishra at World Laparoscopy Hospital. Laparoscopic Cervical cerclage, also known as a cervical stitch, is a treatment for cervical incompetence or insufficiency, when the cervix starts to shorten and open too early during a pregnancy causing either a late miscarriage or preterm birth in second trimester. As a general rule, laparoscopic cervical cerclages work best when they are placed early in pregnancy and when the cervix is longer and thicker. Rates for carrying the pregnancy to term after cerclage vary from 85 to 90 percent, depending on the type of cerclage used.

Laparoscopic Weston Knot

Nowadays, the acquisition of safe, effective yet rapid and minimally invasive suturing skills has become not only desirable but also an essential part of any laparoscopic intervention. Laparoscopic Weston Knot was initially started by arthroscopic surgeons but now widely used in laparoscopic general surgery or gynecology. Although there remains a substantial body of literature focusing mainly on varied minimal access knotting techniques, there seem to be scarcely any contributions devoted specifically to the crux of its successful execution—the precise intracorporeal needle loading methodology that eventually translates into easy and secure tissue approximation.

Extra Corporeal Dundee Jamming Knot

The ability to suture in laparoscopic surgery is necessary less frequently than in conventional surgery, yet this ability is essential in certain critical situations, such as providing tissue support, maintaining tissue closure, and in creating certain surgical anastomoses. Although the principles of suturing and tying knots in endoscopic surgery are identical to those in conventional surgery, major modifications in technique are necessary as a result Extra Corporeal Dundee Jamming Knot is very useful. It can be prepared outside and then it can be introduced inside the abdomen to use as continuous suturing. The termination of this knot is by Aberdeen termination.

Laparoscopic Cholecystectomy for 5 Year Old Child

https://www.laparoscopyhospital.com/ This video demonstrate laparoscopic cholecystectomy in a five year old girl. Gallstone disease has been considered an uncommon entity in children and infants, but its incidence is reportedly increasing which may be attributed to widespread use of diagnostic imaging (ultrasonography). An apparently healthy 5 year old female child presented to our Outpatient department with chief complaint of recurrent abdominal pain. The episodes of pain were acute in onset and associated with vomiting. As per the complete examination and findings, a diagnosis of chronic calculous cholecystitis was made. A four port laparoscopic cholecystectomy was done. The incidence of gallstones in children in India has not been sufficiently studied. The incidence of gallstone disease in India was found to be 0.3% with the incidence in age group 0–10 being less than 0.1%. In contrast to adult gallstone disease, it has been found that there is no female preponderance in gallstone diseases of infancy. Also, the majority of children having increased haemoglobin turnover develop pigment stones only after 5 years of age. The probability of gallstone disease in infants and young children should not be ignored. Gall stones should always be considered as a differential diagnosis when young patients present with complaints of abdominal pain.

कैंसर का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

कैंसर क्या है? कैंसर एक किस्म की बीमारी नहीं होती, बल्कि यह कई रूप में होता है। कैंसर के 100 से अधिक प्रकार होते हैं। अधिकतर कैंसरों के नाम उस अंग या कोशिकाओं के नाम पर रखे जाते हैं जिनमें वे शुरू होते हैं- उदाहरण के लिए, बृहदान्त्र में शुरू होने वाला कैंसर पेट का कैंसर कहा जाता है, कैंसर जो कि त्वचा की बेसल कोशिकाओं में शुरू होता है बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है। ओवेरियन कैंसर : 10% ओवरी के ट्यूमर कैंसरस हो सकते हैं. इस उम्र में अधिकतर कैंसर जर्म सेल ट्यूमर होते हैं जैसे-डिसजर्मिनोमा, योक सैक ट्यूमर आदि. ये ठोस होते हैं और बढ़ कर 10-15 सेमी हो जाते हैं. इनका पता पेट दर्द से चलता है. यह प्राय: एक ओर होता है तथा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाला जा सकता है. शुरू में इलाज हो जाये, तो यह ठीक हो सकता है. इलाज से दूसरे तरफ की ओवरी बचा ली जाती है, जिससे प्रजनन संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं | लेप्रोस्कोपी सर्जरी में पेट में तीन छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं, जो एक मिलीमीटर से लेकर एक सेंटीमीटर के हो सकते हैं। इस की-होल शल्य चिकित्सा के उपयोग से मरीज को दर्द कम होता है। कैंसर शब्द ऐसे रोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के विभाजित होती हैं और वे अन्य ऊतकों पर आक्रमण करने में सक्षम होती हैं। कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं। कैंसर के कुछ लक्षण - स्तन या शरीर के किसी अन्य भाग में कड़ापन या गांठ। - एक नया तिल या मौजूदा तिल में परिवर्तन। - कोई ख़राश जो ठीक नहीं हो पाती। - स्वर बैठना या खाँसी ना हटना। - आंत्र या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन। - खाने के बाद असुविधा महसूस करना। - निगलने के समय कठिनाई होना। - वजन में बिना किसी कारण के वृद्धि या कमी। - असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज। - कमजोर लगना या बहुत थकावट महसूस करना।

Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture - Dr. R. K. Mishra

https://www.laparoscopyhospital.com/SERV02.HTM This video demonstration is Laparoscopic Repair of Inguinal Hernia Lecture by Dr. R. K. Mishra at World Laparoscopy Hospital. A major benefit of the laparoscopic technique is for patients who present with bilateral inguinal hernias and recurrent hernia. Laparoscopy allows for both hernias to be repaired in a single operation without need for additional ports or incisions. As a result, recovery time is similar to unilateral laparoscopic hernia repair.

Laparoscopic Management of Retrocecal Subserous Ruptured Appendix

This video demonstrate Retrocecal Subserous ruptured appendix surgery performed by Laparoscopy. Although there are several factors that can contribute to this rare pathology, the main cause of neglected medical management of appendicitis is the persistence of a large appendicular lump. CT and US are very useful diagnosis tools. Treatment consists to a careful appendectomy of the subserous part of appendix which can be carried out by laparoscopic approach. In this rare pathology a prior history of appendectomy can delay the diagnosis and increase its associated morbidity and even mortality. https://www.laparoscopyhospital.com/international-patients.html

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) |

बच्चेदानी को लेप्रोस्कोपी से निकलने के बारे में जाने (हिस्टेरेक्टॉमी) | हिस्टेरेक्टॉमी एक शल्यक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी महिला के गर्भाशय को निकाला जाता है। गर्भाशय महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का एक अंग है तथा यह मनुष्य की बंद मुट्ठी के आकार का होता है। आपका गर्भाशय निकाले जाने के बाद आप संतान पैदा नहीं कर सकती, तथा इसके बाद आपको मासिक धर्म भी नहीं होगा। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) नहीं निकाले गए हैं, तो आप मादा हार्मोन पैदा करती रहेंगी। यदि आपके अंडाशय (ओवरी) निकाले गए हैं, तो मासिक धर्म रुक जाएगा। हिस्टेरेक्टॉमी शल्य क्रिया की कई किस्में हैं। अपने चिकित्सक से पूछें कि आप किस प्रकार की शल्य क्रिया करा रहीं हैं तथा क्या आपकी गर्भग्रीवा (सर्विक्स), डिंबवाही नलियां तथा अंडाशय भी हटाए जा रहे हैं। • योनीय (वेजाइनल) हिस्टेरेक्टॉमी - गर्भाशय को योनि मार्ग से हटाया जाता है, तथा पेट में कोई चीरफाड़ नहीं होती। • उदरीय (एब्डॉमिनल) हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में चीरा लगाकर, गर्भाशय को निकाला जाता है। • लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी - पेट में कई छोटे सुराख किए जाते हैं और डॉक्टर इन छोटे सुराखों के माध्यम से लेप्रोस्कोप का प्रयोग करते हुए काम करता है। यह यंत्र डॉक्टर को शल्य क्रिया के दौरान छोटे स्थानों को देख पाना आसान बनाता है। अन्य छोटे यंत्र गर्भाशय को अलग करने और निकालने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। रोबोटिक हिस्टेरेक्टॉमी - यह लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी से बहुत मिलती जुलती है। यंत्र अधिक लचीले होते हैं और डॉक्टर द्वारा शल्य क्रिया के दौरान यंत्र की सहायता करने के लिए विशेष कैमरे का उपयोग किया जाता है।

लेप्रोस्कोपी सर्जरी के बारे में सब कुछ जाने |

इस वीडियो मे लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | लैप्रोस्कोपी एक सर्जरी प्रक्रिया है जो आम तौर पर पेट या श्रोणि के अंदर अंगों की जांच करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह छोटी चीजों (0.5-1.5 सेमी), छोटी ट्यूबों, सर्जरी उपकरणों और छोटे कैमरों की मदद से किया जाता है। यह एक जटिल सर्जरी है और बहुत कम दिन तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता पड़ती है। लैप्रोस्कोपी जीनाकोलॉजिक सर्जरी, हृदय सर्जरी, ऑर्थोपेडिक सर्जरी, किडनी की सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, एक या दोनों एड्रेनल ग्रंथियों को हटाने और गैल्स्टोन को हटाने के लिए किया जाता है। डॉक्टर इस प्रक्रिया के माध्यम से बायोप्सी नमूने भी ले सकते हैं। इसे पारंपरिक (खुली) सर्जरी पर तेजी से पसंद किया जा रहा है, क्योंकि इसमें बड़ी चीरे और अस्पताल में रहने का समय शामिल है।

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज |

बांझपन का बांझपन का लेप्रोस्कोपिक तकनीक से बिना चीर-फाड़ से इलाज | महिलाओं में बांझपन के लक्षण इस वीडियो मे बांझपन का लेप्रोस्कोपी से इलाज एवं लॅपयरॉसकपिक सर्जरी के बारे मे सारी जानकारी दी गयी है | महिलाओं में बांझपन के लक्षण मासिकधर्म प्रारंभ होने के साथ ही दिखने लगते हैं. इन में से कईर् लक्षण ऐसे होते हैं, जिन्हें तुरंत पहचान कर उन का उपचार करा लिया जाए तो बहुत संभव है कि भविष्य में होने वाली बांझपन की आशंका से बचा जाए. अनियमित मासिकधर्म महिलाओं में मासिकधर्म की अनियमितता बांझपन का सब से प्रमुख कारण है. कईर् महिलाओं में संतुलित व पोषक भोजन के सेवन और नियमित ऐक्सरसाइज के द्वारा यह समस्या दूर हो जाती है, लेकिन कई महिलाओं को उपचार की आवश्यकता पड़ती है. मासिकचक्र से संबंधित निम्न अनियमितताएं हो सकती हैं: – 21 दिन से कम समय के अंतराल में पीरियड्स आना. – पीरियड्स के दौरान 2 दिन से भी कम समय तक ब्लीडिंग होना. – 2 पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना जिसे इंटरमैंस्ट्रुअल ब्लीडिंग कहते हैं. इसे स्पौटिंग भी कहते हैं. – 3 मासिकचक्र में पीरियड्स न आना. – पीरियड्स 35 दिन के अंतराल से अधिक समय में आना. – मासिकचक्र के दौरान अत्यधिक ब्लीडिंग होना. मासिकधर्म न आना कई महिलाओं में कभीकभी मासिकधर्म आता ही नहीं. इस का कारण अंडाशय या गर्भाशय की अनुपस्थिति होती है. यह समस्या जन्मजात हाती है, लेकिन इस के बारे में पता यौवनावस्था प्रारंभ होने पर लगता है. ऐसी महिलाएं कभी मां नहीं बन पाती हैं. हारमोन असंतुलन कभीकभी महिलाओं में बांझपन हारमोन समस्याओं से भी संबंधित होता है. इस मामले में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं: – त्वचा में परिवर्तन आ जाना, जिस में अत्यधिक मुंहासे होना सम्मिलित है. – सैक्स करने की इच्छा में परिवर्तन आ जाना. – होंठों, छाती और ठुड्डी पर बालों का विकास. – बालों का झड़ना या पतला होना. – वजन बढ़ना. – निप्पल से दूध जैसा सफेद डिस्चार्ज निकलना, जो स्तनपान से संबंधित नहीं होता है. – सैक्स के दौरान दर्द होना. – असामान्य मासिकचक्र.

Laparoscopic Dundee Jamming Knot

Acquiring the skills of laparoscopic suturing and knotting techniques can be considered a prerequisite to learn advanced laparoscopic procedures for laparoscopic surgeon and gynecologist. Despite the concept that developing such suturing skills should be reserved for the younger generation of laparoscopic surgeons due to the high level of difficulty in manual laparoscopic skills involved. Dundee Jamming knot is very good starter knot which is prepared outside the abdomen and then dropped inside the abdomen through one of the port to tie intracorporeal continuous suturing.

Errors in laparoscopic surgery

Laparoscopic surgery is the most significant advancement in the field of surgery over the past 25 years. This minimal access approach has been widely embraced and adopted to many common operations. Demonstrated benefits include decreased post-operative pain, shorter lengths of in-patient hospitalization, increased patient acceptance, and a more rapid return to gainful employment. With its ever-growing popularity, it has become fertile ground for civil litigation, ranking along with birth injuries and failure to diagnose cancer. A brief synopsis of the history of its evolution is presented along with general and specific comments concerning potential errors as they relate to specific common operations which are commonly done utilizing this technique. This video lecture demonstrate how to avoid mistakes in Minimal Access Surgery. https://www.laparoscopyhospital.com/

Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus

This video demonstrate Laparoscopic Myomectomy for Large Intramural Fibroid Uterus. Despite the increased operation time and blood loss, laparoscopic myomectomy can be safely performed in the treatment of large uterine fibroid. However, high risk of blood transfusion in these patients has to be kept in mind. With laparoscopic approach, there is minimal tissue handling which reduces risk of adhesions. Saline irrigation is also constantly in use which prevents drying of tissues and blood clots from sticking to the tissues. Meticulous control of bleeding also is essential. Finally, adhesion prevention barrier such as Adept solution or Interceed is used at the end of the procedure.

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